मांसाहारी फूल रेफ्लेशिया…

मांसाहारी फूल रेफ्लेशिया…

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यह फूल गर्म एवं आद्र जलवायु या यूँ कहें कि, उष्णकटिबंधीय वर्ष वन में पैदा होते हैं. :फोटो :- गूगल.

फूलों की रंग-बिरंगी दुनिया में हर एक फूल आकर, प्रकार, रंग और सुगंध के अनुसार एक दुसरे से भिन्न होती है. फिल्म संसार में फूल पर गीत लिखे गये थे जो फूल के अनुसार ही उसके मोहक और आकर्षक ( फूल आहिस्ता फेंको, फूल बड़े नाज़ुक होते हैं…) हैं. लेकिन आज आपको हम एक ऐसे फूल के बारे में बताने जा रहे है जो विश्व का सबसे बड़ा, वजनदार, बदबूदार और दुर्लभ फूलों में एक फूल है जो आमतौर पर मलेशिया, सुमात्रा, फिलिपिन्स और इंडोनेशिया में पाया जाता है. इस फूल का नाम है रेफ्लेशिया (Rafflesia). इस फूल का वानस्पतिक नाम Rafflesia flower है. इंडोनेशिया में आमतौर पर ‘पदम् रक्षसा’ और ‘बूंगा बंगाकाई’ के नाम से भी जाना जाता है. यह फूल काफी दुर्लभ है और लुप्त होने की स्थिति पर है.

इतिहास:-

इस फूल की खोज सर्वप्रथम डाक्टर जोसेफ अर्नाल्ड व एक स्थानीय गाइड ने देखा था. इस फूल का नामकरण उसी खोजी दल के नेता सर थॉमस स्टैमफोर्ड रेफ्लस के नाम पर हुआ है. अब तक इसकी 26 प्रजातियों की खोज की जा चुकी है जिनमें से 04 का नामकरण स्पष्ट रूप से नहीं हुआ है. रेफ्लेशिया पृथ्वी पर मौजूद सबसे दुर्लभ पौधों में से एक है. यह फूल गर्म एवं आद्र जलवायु या यूँ कहें कि, उष्णकटिबंधीय वर्ष वन में पैदा होते हैं. रेफ्लेशिया का फूल वर्षा के मौसम में रात्री के समय खिलते हैं.

मिटटी :-

रेफ्लेशिया के फूलों को किसी प्रकार की मिटटी की आवश्यकता नहीं होती है चुकिं यह एक परजीवी पौधा होता है.

इस पौधे का जन्म किसी संक्रमित पेड़ की जड़ से होता है. सर्वप्रथम एक गाँठ बनती है और बड़ी होकर बंदगोभी के आकर की हो जाती है. करीब चार दिनों बाद इसकी पंखुडियां खुल कर प्रे फूल का आकर ले लेती है. रेफ्लेशिया फूल से सड़े मांस की दुर्गंध आती है, इसीलिए इसे कोर्पस्‌ (लाश) फ्लावर या मीट (मांस) फ्लावर भी कहा जाता है. रेफ्लेशिया के फूल लाल रंग के होते हैं और इस फूल की पांच पंखुड़ियां चमकीली और धब्बेदार होती हैं.

रेफ्लेशिया का फूल बीच में से कुएं की तरह होता है. इस कुएं में एक उभरी हुई सेंट्रल डिस्क होती है, जिस पर वर्टिकली कई कांटें लगे होते हैं. रेफ्लेशिया का फूल केवल 5-7 दिनों तक ही खिला रहता है, इसके बाद ये काला पड़कर सड़ने लगता है. बताते चलें कि, रेफ्लेशिया पौधे की मौजूदगी तभी पता चलती है, जब वाईन पर इसकी कली आती है. इस कली को खिलने में नौ से बारह महीने का समय लगता है.

ये फूल युनिसेक्शुअल होते हैं यानी नर और मादा फूल अलग-अलग होते हैं, इसलिए ये फूल पोलिनेशन के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर होता है. रेफ्लेशिया फूल की दुर्गंध से कीड़े-मकोड़े आकर्षित होते हैं जिससे फूल के परागन में सहायक होती है. इस फूल की सभी प्रजातियों की त्वचा को छूने या स्पर्श करने पर मांस की तरह प्रतीत होता है.इनके फूलों से सड़े मांस के जैसी दुर्गन्ध आती है.

इस फूल के पौधे की खासियत है कि इसमें कोई पत्ती या जड़ नहीं होती है. ये अपना भोजन पानी दुसरे पौधों से प्राप्त करता है. इसकी प्यालीनुमा पुष्पनाल में मौजूद गंध कीटपतंगों को आकर्षित करता है. जैसे ही कीटपतंग फूल के अंदर घुसते हैं तो गिर कर मर जाते हैं. इस फूल के खिलने की शुरुआत अक्टूबर से होती है और अगले साल मार्च तक पूरी तरह से खिल जाता है. रेफ्लेशिया के फूलों का जीवन कुछ ही दिनों का होता है. यह फूल 05-07 दिनों तक खिला हुआ रहता है उसके बाद काला पड़ कर सड़ जाता है.

इस पौधे में केवल फूल ही एक ऐसा भाग है जो जमीन के ऊपर रहता है शेष सब भाग कवक जाल की भांति पतले-पतले होते हैं और जमीन के अन्दर ही धागों के रूप में फैले रहते हैं. वर्तमान समय में पश्चिम मध्य सुमात्रा के जंगलों में सबसे बड़ा फूल खिला हुआ मिला जो करीब चार वर्ग फिट में फैला हुआ है. बताते चलें कि, वर्ष 2017 में भी इसी जंगल में 03 फीट जिसका वजन करीब 12 किलो का था.