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मसालों की रानी…

हल्दी एक भारतीय वनस्पती है जिसे अंगेरजी में टर्मरिक (Turmeric) कहा जाता है और इसका वैज्ञानिक नाम करकुमा लौंगा (Curcuma Longa) है. यह अदरक प्रजाति का पौधा है.प्राचीन काल से ही हल्दी को आयुर्वेदिक औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है. आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार हल्दी को कई नामों से जानते हैं जैसे हरिद्रा, वरवर्णिनी, गौरी, क्रिम्घ्ना, योशितप्रिया, हट्टविलासिनी, हरदल और कुमकुम. भारतीय संस्कृति में हल्दी को विशेष स्थान प्राप्त है और इसका प्रयोग रसोई से लेकर धार्मिक अनुष्ठान तक किया जाता है, खासकर भारतीय वैवाहिक कार्यक्रम में हल्दी की एक विशेष रस्म होती है. इसीलिए तो हल्दी को मसालों की रानी भी कहा जाता है.

अनेक गुणों से भरपूर होती है हल्दी. वैसे तो हल्दी को एंटीबायोटिक भी कहा जाता है. इसके अलावा इसमें एंटी-बैक्टीरिया, एंटी-फंगल, प्रोटीन, विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन के, कैल्शियम, कॉपर, आयरन, जिंक के अतिरिक्त कुकुर्मिन नामक पीत रंजक द्रव्य भी पाया जाता है. रसोई की शान होने के साथ-साथ हल्दी में कई चमत्कारी ओषधिय गुण भी पाए जाते हैं इसिलिए आयुवेद में हल्दी अनेक बीमारियों में ईलाज में सहायक होता है. इसके साथ ही हल्दी को सौन्दर्यवर्धक भी मानी जाती है. प्रचीन काल से हल्दी का प्रयोग त्वचा को निखारने में भी किया जाता है. हल्दी का प्रयोग घरेलू औषधि से लेकर कई तरह की दवाइयों व सौन्दर्य प्रसाधन के रूप में व्यवसायिक रूप में उपयोग किया जाता है.

  • वर्तमान समय में कैंसर एक जटिल बीमारी है. डॉक्टर के अनुसार कैंसर की बीमारी में शरीर की कोशिकाएं के रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करने लगती हैं. हल्दी में पाया जाने वाला कर्क्युमिन जो न्यूरोब्लास्टोमा कैंसर को ख़त्म करने में सहायक हो सकता है. हल्दी के प्रयोग करने से कैंसर की कोशिकाएं नष्ट हो जाती है.
  • हल्दी में एंटीआक्सीडेंट तत्व पाए जाते है जो शरीर में फ्री रेडिकल्स को नष्ट कर देती है जिससे गठिया के रोगी को काफी आराम महसूस होता हैं.
  • कोलेस्ट्राल के बढने से कई तरह की बीमारियाँ हो जाती है लेकिन, हल्दी का लगातार प्रयोग करने से कोलेस्ट्राल को बढने से रोकता है.
  • हल्दी में मौजूदएंटी-बैक्टीरिया, एंटी-फंगल तत्वों की वजह से हमें सर्दी, खांसी, बुखार, फ्लू आदि से बचाने में बहुत ही सहायक सिद्ध होता है.
  • वर्तमान समय में डायबिटीज के रोगियों की संख्या लगातार बढती जा रही है लेकिन हल्दी के नियमित प्रयोग से शरीर में मौजूद ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है.
  • हल्दी को एंटीसेप्टिक के रूप में भी प्रयोग किया जाता है. शरीर में चोट लगने, कट जाने या घाव हो जाने पर आमतौर पर हल्दी का प्रयोग किया जाता है. चुकि हल्दी एंटीसेप्टिक के साथ ही एंटी -बायोटिक गुण भी पाया जाता है.
  • वर्तमान समय में अनियमित खान-पान या यूँ कहें कि बाजार में खाने के के प्रचलन के कारण अक्सर लोग मोटापे का शिकार हो जाते हैं. लेकिन हल्दी का पाउडर एक चम्मच प्रति दिन खाने से मोटापे पर कंट्रोल किया जा सकता है.
  • अक्सर लोगों को दांत में दर्द हो जाने की शिकायत करते हैं. दांत में दर्द होने पर हल्दी, सरसों का तेल और नमक मिलाकर लगाने से आराम महसूस होता है.

भारतीय संस्कृति में हल्दी का प्रयोग सौन्दर्य बढाने के लिए भी किया जाता है. शादी-विवाह के अवसर पर हल्दी की एक विशेष रस्म भी होती है, साथ ही भारतीय घरों की महिलाएं हल्दी के साथ दूध मिलकार चेहरे, हाथ-पैर व गर्दनों में लगाते हैं जिससे उनकी त्वचा आकर्षक व सुंदर हो जाता है.

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