मगध साम्राज्य…

मगध साम्राज्य…

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छायाचित्र :- अशोक सिन्हा
  • छठी सदी ई.पू. मेँ सोलह महाजनपद में से एक मगध महाजनपद का उत्कर्ष एक साम्राज्य के रुप मेँ हुआ. इसे भारत का प्रथम साम्राज्य होने का गौरव प्राप्त है.
  • हर्यक वंश के शासक बिंबिसार ने गिरिब्रज (राजगृह) को अपनी राजधानी बना कर मगध साम्राज्य की स्थापना की.
  • बिम्बिसार हर्यक वंश का प्रथम शक्तिशाली शासक था.
  • बिम्बिसार ने वैवाहिक संबंधों द्वारा अपनी राजनीतिक सुदृढ़ की और इसे अपनी समाजवादी महत्वाकांक्षा का आधार बनाया.
  • बिंबिसार ने कौशल जनपद की राजकुमारी कौशल देवी कथा लिच्छवी की राजकुमारी चेल्लन से विवाह किया.
  • बिंबिसार ने अंग राज्य पर अधिपत्य स्थापित करके उसे मगध साम्राज्य में मिला लिया.
  • गौतम बुद्ध का समकालीन था बिंबिसार. इसे ‘श्रेणिक’ के नाम से भी जाना जाता है.
  • बिम्बिसार ने अपने राजवैद्य जीवक को, अवंती नरेश चंद्रघ्रोत की चिकित्सा के लिए भेजा था.
  • 15 वर्ष की आयु में मगध साम्राज्य शासन की बागडोर संभालने वाला बिम्बिसार ने 52 वर्षों तक शासन किया.
  • बिंबिसार की हत्या करने के उपरांत का पुत्र अजातशत्रु मगध का शासक बना जिसे ‘कुणिक’ भी कहा जाता है.
  • अजातशत्रु ने भी साम्राज्य विस्तार की नीति अपनाई और उसने काशी तथा वाशि संघ को एक लंबे संघर्ष के बाद मगध साम्राज्य में मिला लिया.
  • बिच्छदियों के आक्रमण के भय से अजातशत्रु ने युद्ध में ‘इव्यमूसल’ तथा ‘महाशिलाकंटक’ नामक नए हथियारों का प्रयोग किया.
  • प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन राजगीर के सप्तपर्णी गुफा में आजातशत्रु के शासन काल में हुआ.
  • अजातशत्रु ने पुराणों के अनुसार 20 वर्ष तथा बौद्ध साहित्य के अनुसार 32 वर्ष तक शासन किया.
  • अजातशत्रु की हत्या करके उसका पुत्र उदयिन मगध साम्राज्य की गद्दी पर आसीन हुआ.
  • उदयिन ने गंगा नदी के संगम स्थल पर ‘कुसुमपुरा’ की स्थापना की जो बाद में पाटलिपुत्र के रुप में विख्यात हुआ.
  • उदयिन या उदय भद्र जैन धर्मावलंबी था.
  • उदयिन के बाद मगध सिंहासन पर बैठने वाले हर्यक वंश के शासक अनिरुद्ध, मुगल और दर्शक थे.
  • हर्यक वंश का अंतिम शासक ‘नागदशक’ था. जिसे ‘दर्शक’ भी कहा जाता है.
  • हर्यक वंश के शासकों के बाद मगध पर पर शिशुनाग वंश का शासन स्थापित हुआ.
  • शिशुनाग नमक एक अमात्य हर्यक वंश के अंतिम शासक नागदशक को पदच्युत करके मगध की गद्दी पर बैठा और शिशुनाग नामक नए वंश की नींव डाली.
  • शिशुनाग ने अवन्ति राज्य पर अधिकार करके उसे मगध साम्राज्य में मिला लिया.
  • शिशुनाग ने वज्जियों को नियंत्रित करने के लिए वैशाली को अपनी दूसरी राजधानी बनाया.
  • शिशुनाग ने 412 से 300 ई. पू. तक शासन किया.
  • कालाशोक के शासन काल की राजनीतिक उपलब्धियों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती है.
  • कालाशोक को पुराणों और बौद्ध ग्रंथ दिव्यादान में कालवर्प कहा गया है.
  • गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण के के लगभग 100 वर्ष बाद कालाशोक के शासन काल के 10वें वर्ष मेँ वैशाली में द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ था.
  • नंद वंश के शासक कालाशोक की मृत्यु के बाद मगध पर नंद वंश नामक एक शक्तिशाली राजवंश की स्थापना हुई.
  • इस वंश का संस्थापक महापद्मनंद एक शुद्र शासक था और उसने ‘सर्वअभावक’ की उपाधि धारण की थी.
  • महापद्मनंद कलिंग के कुछ लोगों पर अधिकार कर लिया था और वहाँ उसने एक नहर का निर्माण भी कराया था.
  • महापद्मनंद ने कलिंग के गिनसेन की प्रतिमा उठा ली थी. जिसके बाद एकराढ़ की उपाधि धारण की.
  • नंद वंश का अंतिम शासक घनानंद था.
  • घनानंद के शासन काल के 325 ईसा पूर्व में सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया था.