News

नेशन फर्स्ट, आलवेज फर्स्ट

कोरोना की तीसरी लहर आने ही वाला है और इस वर्ष देश अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है, अब ऐसे में देखना यह है कि इस दौरान कोरोना महामारी से बचाव के लिए सरकार द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन कितना और कैसे किया जा रहा है, जबकि 16 अगस्त से सभी स्कूल,कालेज और सारे शिक्षण संस्थानों को खोलने की अनुमति सरकार द्वारा दिया गया है बताते चलें कि इस वर्ष भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस समारोह की थीम नेशन फर्स्ट,आलवेज फर्स्ट रखी गई है परंपरा के अनुसार स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित करेंगे ये लगातार आठवी बार होगा जब प्रधानमंत्री लाल किले से अपना भाषण देंगे, वहीं टोक्यो ओलंपिक के पदक विजेता सभी एथलीटों को इस आयोजन के लिए स्पेशल इन्विटेशन भेजा गया है कोरोना महामारी के कारण इस वर्ष भी आयोजन में लोगों की एंट्री प्रतिबंधित रहेगी और किसी भी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम नही होगा. अंत में ये भी बता दे कि स्वतंत्रता दिवस केवल एक दिन विशेष नही बल्कि देश के उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान हमारे सम्मान को प्रदर्शित करने का जरिया भी है,जिन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अपना सर्वस्व त्याग दिया था.

भारत में पहला स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 1947 को मनाया गया था. इसी दिन के मध्यरात्रि में भारत को पंडित जवाहर लाल नेहरू ने स्वतंत्र देश घोषित किया जहां उन्होंने “भाग्य के साथ प्रयास” भाषण दिया,तभी से भारत का स्वतंत्रता दिवस पूरे देश में भारत का राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाता है यह बड़े हीं उत्साह के साथ एकता और अखंडता को प्रदर्शित करते हुए भारत के सभी राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है. बता दें कि भारत के राष्ट्रपति स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले शाम को (राष्ट्र को संबोधित करने के लिए) प्रति वर्ष एक भाषण देते हैं. दो सौ वर्षो के लंबी संघर्षों के बाद 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश सम्राज्य एवम अंग्रेजो ने भारत छोड़ा और देश को नेताओं को सौंपा था,इसलिए ये भारत के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण दिन है,और इस दिन को पूरे भारत में राष्ट्रीय और अराजपत्रित अवकाश के रूप में घोषित किया गया. बताते चलें कि भारत को यह आजादी आधी समय मिली थी. क्योंकि इतिहास की माने तो यह लॉर्ड माउंटबेटन ने निजी तौर पर भारत की स्वतंत्रता के लिए 15 अगस्त का दिन तय कर रखा था क्योंकि इस दिन को वे अपने कार्यकाल के लिए ” बेहद सौभाग्यशाली” मानते थे इसके पीछे खास वजह यह थी कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1945 में 15 अगस्त के हीं दिन जापान की सेना ने उनकी अगुआई में ब्रिटेन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, माउंटबेटन उस समय संबंध सेनाओ के कमांडर थे.

संजय श्रीवास्तव हाजीपुर.

Related Articles

Check Also
Close
Back to top button