Dhram Sansar

दुर्लभ है रुद्राक्ष…

इस अंक में एक (1) मुखी से चौदह (14) मुखी के रुद्राक्ष व उनके मंत्र के बारे में चर्चा करते हैं. रुद्राक्ष के बारे में कई पौराणिक धर्मग्रन्थों में विस्तृत वर्णन किया गया है. ये पुराण हैं महाशिव पुराण, लिंगपुराण और स्कन्दपुराण. कहा जाता है कि, रुद्राक्ष का स्पर्श, दर्शन व उसकी माला से जाप करने पर समस्त पापों व विघ्नों का नाश होता है ऐसा ही भोले शंकर का वरदान है.

एक मुखी रुद्राक्ष:- 

मंत्र:-                     ।। ॐ ह्रीं नमः ।।

यह भगवान शिव का स्वरूप है. इसके धारण करने से ब्रहम हत्या आदि पापों को दूर करता है. इस मंत्र का जप  करते हुए एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए.

श्री रामकिंकर दास रामायणी

दो मुखी रुद्राक्ष:-

मंत्र:-                     ।। ॐ नमः ।।

यह भगवान शिव का अर्द्धनारीश्वर स्वरूप है. यह समस्त पापों को दूर करता है.

तीन मुखी रुद्राक्ष:-

मंत्र:-                     ।। ॐ क्लीं नमः ।।

यह भगवान शिव का अग्नि स्वरूप है. यह हत्या या पापों को दूर करने में समर्थ है साथ ही शौर्य व एश्वर्य को भी बढाता है.

चतुर्मुखी रुद्राक्ष:-

 मंत्र :-                    ।। ॐ ह्रीं नमः ।।

यह भगवान शिव का ब्रहमा स्वरूप है. इस रुद्राक्ष के स्पर्श व दर्शन मात्र से ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है.

पंच मुखी रुद्राक्ष:-

मंत्र :-                   ।। ॐ ह्रीं क्लीं नम:।।

यह भगवान शिव का पंच देव स्वरूप है. इसेक धारण करने से नर हत्या का पाप व काल अग्नि स्वरूप अगम्य पाप भी दूर होते हैं साथ ही मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं.

छह मुखी रुद्राक्ष:-

मंत्र:-                      ।। ॐ ह्रीं हुं नमः ।।

यह भगवान का कार्तिके स्वरूप है. इसे धारण करने से श्री औए आरोग्य की प्राप्ति होती है.

सप्त मुखी रुद्राक्ष:-

मंत्र :-                     ।। हुं नमः ।।

 यह भगवान शिव का कामदेव स्वरूप है. यह रुद्राक्ष अत्यंत भाग्यशाली व स्वर्ण चोरी आदि पापों को दूर करता है व एश्वर्य प्राप्ति में सहायक होता है.

अष्ट मुखी रुद्राक्ष:-

मंत्र :-                      ।। हुं नमः ।।

यह भगवान का विनायक देव स्वरूप है. इसे धारण करने से लम्बी आयु व पंच पातकों का नाश होता है.

नवमुखी रुद्राक्ष :-

 मंत्र :-                   ।। ॐ ह्रीं हुं नमः ।।

यह भगवान का भैरव और कपिल मुनि का प्रतीक माना गया है. नोऊ रूप धारण करने वाली माँ भगवती दुर्गा इसकी अधिष्ठात्री मानी गई है. अगर कोई व्यक्ति भगवती परायण होकर अपनी बाई भुजा पर इसे धारण करता है उस पर नव दुर्गा प्रसन्न रहती है और वह व्यक्ति भगवान शिव के समान बली हो जाता है.

दस मुखी रुद्राक्ष :-

मंत्र :-                   ।। ॐ ह्रीं नमः ।।         

  यह भगवान का जनार्दन स्वरूप है. इसे धारण करने से गढ़, भूत, पिशाच, बेताल, ब्रह्म, राक्षस और नाग आदी का भय दूर हो जाते हैं साथ ही सन्तान प्राप्ति होती है.

एकादशमुखी रुद्राक्ष :-

मंत्र  :-                  ।। ॐ ह्रीं हुं नमः ।।

यह भगवान का रूद्र स्वरूप है. इसे धारण करने से पुन्य फल, श्रेष्ठ यज्ञों के फल की प्राप्ति होती है और वह सर्वत्र विजयी होता है.

द्वादशमुखी रुद्राक्ष :-

मंत्र  :-                   ।। ॐ क्रों क्षों रों नमः ।।

यह भगवान का महाविष्णु स्वरूप है. इसे धारण करने से द्वादश आदित्य प्रसन्न होते हैं.

तेरहमुखी रुद्राक्ष :-

 मंत्र  :-                   ।। ॐ ह्रीं नमः ।।

यह भगवान का कामदेव स्वरूप है. इसे धारण करने से समस्त कामनाओं व इच्छित भोगों की प्राप्ति होती है.

चौदहमुखी रुद्राक्ष :-

मंत्र  :                     ।। ॐ नम:  ।।

यह भगवान का नेत्र स्वरूप है. इसे धारण करने से साधक शिव तुल्य हो कर सभी व्याधियों और रोगों को दूर कर आरोग्य प्रदान करता है. इसके अलावा गौरीशंकर रुद्राक्ष होता है जो समस्त प्रकार के सुख प्रदान करने वाला होता है.

मंत्र :-                      ।। ॐ नम:शिवाय ।।

 

 

श्री रामकिंकर दास रामायणी,

श्रीरामजानकी मंदिर, रामकोट, अयोध्या.

मो० :- 9006714547,8709142129.

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