दम तोड़ रही है भारतीय सभ्यता संस्कृति…

दम तोड़ रही है भारतीय सभ्यता संस्कृति…

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राम, कृष्ण,बुद्ध, महावीर, गुरु गोविंद सिंह की धरती पर भी राम मंदिर निर्माण के लिए पांच सौ बर्ष लग गये और यह मंदिर निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाबजूद भी एक वर्ग को लग रहा है कि हमारे साथ बहुत बड़ा जुल्म हुआ है,और दूसरे वर्ग राम मंदिर निर्माण का रास्ता प्रशस्त हो जाने के बाद राहत महसूस कर रहा है. भारत वर्ष आजाद रहा लेकिन आज भी भारतीय गुलाम है. सदियों से गुलाम हम भारतीय रहे यह समझ में नही आ रहा था. हुण,डच, पुर्तगाल,मुगल,अंग्रेज जो भी विदेशी आक्रांता हमारे देश में आऐ और वह हजारों बर्ष गुलाम बनाकर रखा और हमारे उपर शासन किया. आज अपने ही देश में भारतीय संस्कृति और सभ्यता की रक्षा के लिए गुहार लगाना पड़ता है और बर्षो बर्ष लग जाते है न्याय के लिए. न्याय की प्रक्रिया इतना कठिन बनाया गया है कि आप अपने ही देश में अपने पुरखों के जन्म स्थली के लिए सबुत देना पड़ता है जो हिन्दूस्थान से ही हिन्दुस्तान नाम पड़ा यह भी समझ के पड़े हैं. राजतंत्र से कुलीनतंत्र और कुलीनतंत्र से लोकतंत्र का सफर तय करते हुए ऐसा महसूस होता है कि देश में जब संविधान निर्मात्री सभा द्धारा ऐसा संविधान निर्माण किया गया है कि कोई भी व्यक्ति आपकी आस्था पर चोट पहुंचा कर यही देश में अपने को मुल और आप ही को आतातायी साबित कर रहे है. इसी तरह से यह देश को खंड खंड कर अंखड भारत का नाम दिया जा रहा है. भारतवर्ष काबूल से कंधार तक हमारी सीमा रेखा था. आज पाकिस्तान, बांग्लादेश, बर्मा, नेपाल, भूटान  तिब्बत सब आप के हिन्दूस्तान से विभाजन हुआ और अभी तक सभी देश आपके खिलाफ सीमा विवाद भी खडा किये हुए है, हमारा देश कलांतर में छोटा होते जा रहा है और हमारी आबादी भी घटती जा रही है फिर भी यह देश को चिंता नहीं है कि इस तरह का सोच सेकुलर देश बना रहा तो आने वाले समय देश को विभाजन होने से कोई रोक नही सकता, क्योंकि हमार देश अगड़ा पिछड़ा, दलित और आदिवासी मे हमलोग सिमट गये है और महापुरुषों को भी जातिवाद का रंग दे दिये है. बहुत अच्छा से लोगो को समझा दे रहा है कि मंदिर से क्या फायदा, उसके जगह पर अस्पताल बनाने से लोगों का फायदा होता. सभी धरोहर को नष्ट कर दो और उसके जगह पर अस्पताल पुरा देश में बना दिया जाय और बीमारी का प्रचार खूब किया जाय तो आपका देश को आगे बढने से कोई नही रोक सकता है.

जिसको न निज गौरवऔर देश का स्वाभिमान है, वह नर नहीं नीरा पशु और मृतक समान है. जय हिन्द,जय भारत.

संजय कुमार सिंह.