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चुकंदर…

चुकंदर एक कंदमूल है जो लाल रंग का होता है. इसका वैज्ञानिक नाम बीटा वल्गारिस (Beta vulgaris) है. इसे दोमट मिटटी में उपजाया जाता है. यह भारत सहित रूस, फ़्रांस, जर्मनी, पोलैण्ड, ईटली, स्लोवाकिया, स्पेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, अर्जेंटीना तथा चीन आदि देशों में उपजाया जाता है. वर्ष में प्रतिवर्ष करीब 27 करोड़ टन चुकन्दर का उत्पादन किया जाता है. ज्ञात है कि चुकन्दर में प्रोटीन की मात्रा सर्वाधिक पाई जाती है और यह आँतों को साफ़ रखने में भी मदद करता है. चुकंदर का स्वाद कुछ मीठा होता है इसमें प्रोटीन, शर्करा, स्टार्च, विटामिन “ए, बी और सी”, कैल्शियम, फास्फोरस और लोहा पाया जाता है. इसके पत्तों में विटामिन और क्षार काफी मात्रा में पाया जाता है.

चुकन्दर को अपनी डेली डाइट में शामिल करना तंदरुस्ती के लिये किसी वरदान से कम नहीं है. इसका नियमित रूप से सेवन करने पर सम्पूर्ण शरीर को निरोग रखने में बेहद सहायक होता है. चुकंदर अपने अद्भुत सेहतमंद गुणों की बदौलत तो लाजवाब है ही लेकिन उससे भी बढ़कर इसकी खासियत यह है कि यह कई बेहद गंभीर रोगों को नष्ट करने में भी बेहद कारगर होता है. जिन चुकन्दर का तल गोलाई लिए होता है, वे दूसरों से अधिक स्वादिष्ट होता हैं. ताजे व कच्चे चुकन्दर में एक विशेष खुशबू होती है, जो इसके स्वाद को बढ़ाती है.

चुकन्दर में क्षारीयता की विशेष खूबी पाई जाती है जो शरीर में एसीडोसिस को रोकने में बेहद सहायक होता है. इसमें प्राप्त उच्च गुणवत्ता का लोह तत्व रक्त में हीमोग्लोबीन का निर्माण व लाल रक्तकणों की सक्रियता के लिए बेहद प्रभावशाली है. आयुर्वेदिक चिकत्सक के अनुसार, चुकन्दर के रस का नियमित सेवन रक्तचाप को नियन्त्रित रखने में मदद करता है. चुकन्दर का मुलायम रेशा आँतों की गति बनाए रखता है. इसको नियमित रूप से खाने से लम्बे समय से चली आ रही कब्ज से भी मुक्ति  मिल सकती है. चुकन्दर के रस का नियमित सेवन रक्त नलिकाओं में कैल्शियम के जमाव को हटाकर उनका लचीलापन बनाए रखता है, जिससे रक्त संचरण सुगमता से होता है. चुकन्दर में पाए जाने वाले अमीनो एसिड में कैंसररोधी तत्व पाए जाते हैं. शोध व अध्ययनों से पता चला है कि चुकन्दर के रस के नियमित सेवन से कैंसरकारक तत्वों का निर्माण बाधित होकर पाचन तन्त्र की कार्यक्षमता को बढ़ावा मिलता है. चुकन्दर के रस का नियमित सेवन न केवल यकृत, बल्कि सम्पूर्ण पाचन तन्त्र के हानिकारक तत्वों को शरीर से बाहर निकालकर आरोग्य प्रदान करता है. चुकन्दर के साथ यदि गाजर मिलाकर इसके रस का सेवन किया जाए तो यह पित्ताशय व वृक्क से हानिकारक तत्वों को हटाकर इन अंगों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है.

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