गुमनाम होती परंपराएँ…

गुमनाम होती परंपराएँ…

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भारतीय संस्कृति या यूँ कहें कि हिन्दू धर्म या परम्परा को पूरी दुनिया मानती है और जानती है  लेकिन, इस परम्परा से पूरी दुनिया विस्मित भी होती है. इस परम्परा की बात ही अनोखी है. सनातन परम्परा जितना पुराना है उतना ही पुराना इसका इतिहास भी है.

मानव जीवन जितना सत्य है उतना ही सत्य है मृत्यु. मृत्यु उपरान्त लोग अपनी-अपनी आस्था या यूँ कहें कि परम्परा, रीति-रिवाज के अनुसार दैहिक जीवन के आखरी रस्मो-रिवाज की प्रक्रिया को अंजाम देते है. हिन्दू धर्म में सोलह संस्कार किए जाते हैं. उन सोलह संस्कार में आखरी संस्कार है मृत्यु संस्कार. मानव जीवन नश्वर होता है यह हम सभी जानते हैं. मानव जीवन उपरान्त मृत्यु एक अटल सत्य है.

पिछले साल आई महामारी जो वर्तमान समय में पूरे शबाव पर है. इस महामारी  ने सनातन धर्म और उनसे जुड़ी परम्पराओं को झकझोड़ कर रख दिया. बताते चलें कि, 16वीं शताब्दी से काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर शुरू हुई यह परम्परा कोरोना के कारण बंद हो गई. यह परम्परा अकबर काल में राजा मान सिंह ने शुरू करवाया था. हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष पंचमी से शुरू होकर चैत्र शुक्ल पक्ष सप्तमी तक महाश्मशान बाबा का दरबार गुलजार हुआ करता था.

संकलन: – जेपी और भास्कर.

Video link :-  https://youtu.be/ITUmB4apyYE