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कलम के जादूगर…

व्यक्तिव...

ऐसे व्यक्तिव के बारे में बता रहें है जो कलम के धनी या यूँ कहें कि कलम के जादूगर है और उनकी लिखो गई रचनाओं में जन साधारण की भावनाओं, परिस्थितियों और उनकी समस्याओं का मार्मिक चित्रण किया है. ऐसे कलम के जादूगर का साहित्यिक नाम था “प्रेमचंद“.

आज 31 जुलाई है. वर्तमान समय से करीब 141 साल पहले प्रेमचंद का जन्म हुआ था. प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था. धनपत राय का जन्म 31 जुलाई,1880 को लमही (वाराणसी) में एक कायस्थ परिवार में हुआ था. धनपत राय के पिता का नाम अजायब लाल और माता आनन्दी देवी था. धनपत राय का बचपन गाँव में बीता था और उनकी आरम्भिक शिक्षा फ़ारसी में हुई थी. धनपत राय जब सात वर्ष के थे तब उनकी माता का देहांत हो गया था जिसके कारण उनका प्रारम्भिक जीवन संघर्षमय रहा. जब धनपत राय पन्द्रह वर्ष के हुए तब उनकी सोतेली माँ ने उनका विवाह कर दिया गया और सोलह वर्ष के होने पर उनके पिता का भी देहान्त हो गया.

धनपत राय ने वर्ष 1906 में दुसरा विवाह शिवरानी देवी से किया जो बाल-विधवा थीं. शिवरानी देवी सुशिक्षित महिला थीं और उनकी तीन सन्ताने हुईं. वर्ष 1898 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे एक स्थानीय विद्यालय में शिक्षक नियुक्त हो गए. उन्होंने नौकरी के साथ –साथ पढ़ाई भी जारी रखी. उन्होंने वर्ष 1910 में अंग्रेज़ी, दर्शन, फ़ारसी और इतिहास लेकर इण्टर किया और 1919  में अंग्रेजी, फ़ारसी और इतिहास लेकर बी. ए. किया. वर्ष  1919 में बी.ए. पास करने के बाद वे शिक्षा विभाग के इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त हुए. वर्ष 1921 ई. में असहयोग आन्दोलन के दौरान महात्मा गाँधी के सरकारी नौकरी छोड़ने के आह्वान पर स्कूल इंस्पेक्टर पद से 23 जून को त्यागपत्र दे दिया. इसके बाद उन्होंने लेखन को अपना व्यवसाय बना लिया.

बताते चलें कि धनपत राय (प्रेमचंद) ने सरकारी सेवा करते हुए कहानी नवाब राय नाम  से लिखना आरम्भ किया. प्रेमचंद की पहली रचना, जो अप्रकाशित ही रही, शायद उनका वह नाटक था . उनका दूसरा उपन्याएस ‘हमखुर्मा व हमसवाब’ है जिसका हिंदी रूपांतरण ‘प्रेमा’ नाम से 1907 में प्रकाशित हुआ. वर्ष 1908 ई. में उनका पहला कहानी संग्रह सोज़े-वतन प्रकाशित हुआ था. देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत इस संग्रह को अंग्रेज़ सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया और इसकी सभी प्रतियाँ जब्त कर लीं और इसके लेखक नवाब राय को भविष्यी में लेखन न करने की चेतावनी दी.

उसके बाद दयानारायन निगम ने  उनका साहित्यिक नाम “प्रेमचंद “ रखा. उसके बाद धनपत राय ने प्रेमचन्द के नाम से पहली कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ ज़माना पत्रिका के दिसम्बर 1910 के अंक में प्रकाशित हुई थी. वर्ष 1918 ई. में उनका पहला हिंदी उपन्यास सेवासदन प्रकाशित हुआ. उन्होंने सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान, कफन, पूस की रात, पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, बूढ़ी काकी, दो बैलों की कथा कफन अन्तिम कहानी, गोदान  सहित लगभग 300 कहानियाँ तथा डेढ़ दर्जन उपन्यास लिखे. इसके अलावा कर्बला और प्रेम की वेदी नामक नाटक भी लिखें. प्रेमचंद एक सफल अनुवादक भी थे. उन्होंमने दूसरी भाषाओं के जिन लेखकों को पढ़ा और जिनसे प्रभावित हुए, उनकी कृतियों का अनुवाद भी किया. जिनमे  ‘टॉलस्टॉ य की कहानियाँ’, गाल्सावर्दी के तीन नाटकों का हड़ताल, चाँदी की डिबिया और न्या‍य नाम से अनुवाद किया.

प्रेमचंद हिन्दी सिनेमा के सबसे अधिक लोकप्रिय साहित्यकारों में से हैं. सत्यजित राय ने उनकी दो कहानियों पर यादगार फ़िल्में बनाईं. वर्ष 1977 में शतरंज के खिलाड़ी और वर्ष 1981 में सद्गति. उनके देहांत के दो वर्षों बाद सुब्रमण्यम ने वर्ष 1938 में सेवासदन उपन्यास पर फ़िल्म बनाई जिसमें सुब्बालक्ष्मी ने मुख्य भूमिका निभाई थी.

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