अस्तित्व…

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छायाचित्र :- जेपी.

सनातन धर्म और संस्कृति वर्तमान समय में विश्व की मांग है. वर्तमान समय को आधुनिक युग कहा जाता है. इस युग में मानव मशीनों पर आधरित हो गया है. आज के मानवों की सोच भी मशीनी हो गई है लेकिन, वहीं सनातन धर्म और उनकी परम्परायें ऐसी है कि, इसके निर्वाह करने से जीवन सुखमय हो जाता है. पौराणीक धर्मग्रंथों में वर्णित कथा व कहानियाँ इस बात का परिणाम है कि, सनातन धर्म और उसकी व्याख्या जीवन के मूल श्रोत हैं.

सनातन धर्म का इतिहास इतना पुराना है कि, आज कई सदी गुजर गई लेकिन, आधुनिक सोच या यूँ कहें कि मशीनी सोच भी उससे काफी पीछे हैं. सनातन धर्म में जीवन जीने के कई नियम व कानून बनाये है जिसके पालन करने से रोग, दुःख और भय का नाश होता है. मशीनी युग के कई शोधार्थी आज उन सभी नियम कानूनों पर कई सालों से शोध कर रहें हैं कुछ के परिणाम उम्मीद से ज्यादा मिला है जिसका पालन मशीनी युग में कुछ लोग कर रहें है और उनका परिणाम पहले से बेहतर मिला है.

सनातन धर्म के विस्तार कई सालों के बाद, मानव अपने हिसाब से कुछ नियम कानूनों को छेड़-छाड़ कर अपने लिये नये-नये धर्म और संप्रदाय का निर्माण व अनुसरण कर जीवन यापन करने लगे. आज कई हजार सालों के बाद जब मानव आधुनिक या मशीनी युग में पहुँच गया है तब उसे अचानक याद आई है कि काश हम सभी भी सनातन धर्म और उसके सूत्रों का पालन करते…?

किसी भी धर्म में कट्टरता का कोई स्थान नहीं होता है लेकिन, वहीं आधुनिक युग में चंद ऐसे लोग है जो धर्म के नाम पर कट्टरता व उन्माद फैला कर विक्षिप्त सोच का परिचय दे रहें और अपने आप को भगवान् का दर्जा दे रहें हैं. भारतीय पौराणिक ग्रन्थों में कई कहानियाँ मौजूद हैं जिनमें विक्षिप्त सोच और परिणाम का वर्णन आया है.

वर्तमान समय में एक जीवाणु के डर से लोग अपने–अपने घरों में कैद होने को मजबूर है तो वहीं, सनातनी धर्म और उसके नियम का कड़ाई से पालन करने वाले अपने जीवन रूपी हवन कुंड को और अधिक तपा कर कांतिमय हो रहें हैं. वहीं कुछ ऐसे भी संप्रदाय है जो धर्म के नाम पर लोगों को डरा कर उनके जीवन को नष्ट करने पर तुले हुयें हैं.

धर्म किसी भी मानव को अच्छी बातें सिखाता है ना कि जीवन को नष्ट करना. पौराणीक धर्मग्रंथों में वर्णित कहानियाँ आज के जीवन का सार है. आज भी वर्तमान समय में मशीनी युग के लोग सूर्य को प्रत्यक्ष देवता के रूप में मानते है. सूर्य से निकलने वाली रश्मि जीवन को उर्जा देती है तो वहीं चन्द्रमा की किरण  शीतलता प्रदान करती है. सनातन धर्म के मानने वाले लोग प्रात: स्नान कर सूर्य को अर्घ्य व हवन कर अपनी दिनचर्या की शुरुआत करते हैं. वहीं, मशीनी युग में लोगों की दिनचर्या ही उलटी हो गई है जिसके परिणाम स्वरूप आज का मानव एक विषाणु के डर से घरों में छुपने को मजबूर हो गये हैं….

वर्तमान समय में कुछ ऐसे भी सम्प्रदाय के लोग है जो कुटिल चालों या यूँ कहें कि इंसानी फितरत और सोच को धर्म से जोड़ कर मानव बम बना रहें है. ये मानव बम अपने ही समुदाय को ही नष्ट करने पर पूरी तन्मयता के साथ जुटे हुये है. किसी भी धर्म में या धार्मिक किताबों में मानव जाति को नष्ट करने की बात नहीं लिखी गई है. धर्म से ही सम्प्रदाय का जन्म होता है चुकिं धर्म ही इस जगत का आधार है. फिर भी चंद ऐसे कुछ लोग है जो अपनी कुटिल चालों और सोच को धर्म से जोड़कर मानव समुदाय को खत्म करना चाहते है.

भारतीय पौराणिक ग्रंथों में ऐसे कई किस्से कहानियाँ मौजूद है जो वर्तमान समय से लाखों साल पहले ही लिखी गई है. वही, कहानियों को आधार मानकर आज विशेष समुदाय के लोग मानव का अस्तित्व समाप्त करने पर जुटे हुये हैं.