अर्थशास्त्र से संबंधित(23)…

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Q: – What are the main things about the employment principle of Keynes?

The worldwide economic problems that occurred in the whole world during the 1929-33 failed to solve the prestigious economic principles. Prof. Keynes has given his thoughts to tackle this problem through his book “General Theory of Employment, Interest and Money”. He has shed light on the causes of unemployment and the measures to get rid of them through this book.

Explanation of the principle: –

  1. According to them employment depends on effective demand. Such as – Effective demand – Total production – Total employment.
  2. Effective demand is determined by total demand and total supply.
  3. Total supply is stable in the short term, so total demand has an effect on effective demand.
  4. The aggregate demand action depends on three things. A. Consumption expenditure, b. Appropriation expenditure, c. Government expenditure.
  5. Consumption expenditure depends on two things. A. Size of income; b. Consumption trend.
  6. Consumption trend depends on two things. A. Marginal Consumption Trend, b. Average Consumption Trend.
  7. Appropriation expenditure depends on two things. A. Marginal duty of capital, b. Rate of interest.
  8. The rate of interest depends on two things. A. Liquidity preferences, b. Supply of money.
  9. Liquidity preferences depend on three objectives. A. Transaction, b. Speculative, c. Vigilance.

Note:- According to Prof. Keynes, to increase employment it is necessary to increase consumption and appropriation.

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प्र0 :- कीन्स के रोजगार सिद्धान्त की मुख्य बातें क्या-क्या है?

विश्वव्यापी महामन्दी सन् 1929-33 के समय जो आर्थिक समस्याएँ पुरे विश्व के सामने हुई उसे प्रतिष्ठित आर्थिक सिद्धान्त सुलझाने में असफल रहे. प्रो० कीन्स ने इस समस्या से निपटने के लिए अपने विचार अपनी पुस्तक “General Theory of Employment, Interest and Money” के माध्यम से दिये है. उन्होंनें बेरोजगारी उत्पन्न होने के कारणों एवं उनसे छुटकारा पाने के उपायों पर इस पुस्तक के माध्यम से प्रकाश डाला है.

सिद्धान्त की व्याख्या:-

  1. उनके अनुसार रोजगार प्रभावपूर्ण माँग पर निर्भर करता है. जैसे- प्रभावपूर्ण माँग-कुल उत्पादन-कुल रोजगार.
  2. प्रभावपूर्ण माँग कुल माँग क्रिया तथा कुल पूर्ति क्रिया द्वारा निर्धारित होती है.
  3. कुल पूर्ति क्रिया अल्पकाल में स्थिर रहती है, अतः प्रभावपूर्ण माँग पर कुल माँग क्रिया का प्रभाव पड़ता है.
  4. कुल माँग क्रिया तीन बातों पर निर्भर करती है. क. उपभोग व्यय, ख. विनियोग व्यय, ग. सरकारी व्यय.
  5. उपभोग व्यय दो बातों पर निर्भर करती है. क. आय का आकार, ख. उपभोग प्रवृत्ति.
  6. उपभोग प्रवृत्ति दो बातों पर निर्भर करती है. क. सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति , ख. औसत उपभोग प्रवृत्ति.
  7. विनियोग व्यय दो बातों पर निर्भर करता है. क. पूंजी की सीमान्त दक्षिता, ख. ब्याज की दर.
  8. ब्याज की दर दो बातों पर निर्भर करता है. क. तरलता पसन्दगी, ख. द्रव्य की पूर्ति.
  9. तरलता पसन्दगी तीन उद्देश्य पर निर्भर करती है. क. लेन-देन, ख. सट्टा, ग. सतर्कता.

नोट :- प्रो0 कीन्स के अनुसार रोजगार में वृद्धि करने के लिए आवश्यक है कि उपभोग और विनियोग मे वृद्धि  की जाए.