अर्थशास्त्र के महान पंडित थे डॉ.अंबेडकर :-प्रो. गौरी शंकर

अर्थशास्त्र के महान पंडित थे डॉ.अंबेडकर :-प्रो. गौरी शंकर

42
0
SHARE
भारत में लोग अंबेडकर साहब को दलितों का मसीहा कह कर उनके कद और व्यक्तित्व को छोटा कर देते हैं.

बुधवार को नगर परिषद स्थित आनंद विहार कॉलोनी सिरचंद नवादा में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 130 वीं जयंती पर बुद्धिजीवियों द्वारा श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया साथ ही वर्तमान परिप्रेक्ष्य में डॉ.बी.आर.अंबेडकर कितने प्रासंगिक विषय पर एक वर्चुअल परिचर्चा की गई. वर्चुअल परिचर्चा अध्यक्षता स्थानीय व्यवहार न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता रामचंद्र रैदास ने की. उन्होने  कहा कि कहा कि डॉ. अंबेडकर कुशल राजनीतिज्ञ एवं स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा भी थे. अंबेडकर के आर्थिक दर्शन से प्रभावित होकर ही नोबेल विजेता अमर्त्य सेन को कहना पड़ा कि अंबेडकर ही मेरे अर्थशास्त्र के जनक हैं.

रैदास ने कहा कि डॉ.अंबेडकर आरबीआई के प्रणेता थे. उनके प्रयास और सुझाव से ही वर्ष 1935 में हिल्टन यंग कमीशन की सिफारिश पर आरबीआई का गठन हुआ था. उन्होंने कहा कि अंबेडकर साहब के बताए त्रिसूत्री सिद्धांत- “शिक्षित बनो, संगठित हो और संघर्ष करो” पर चल कर ही भारत को एक समृद्ध ,समरस और विकसित राष्ट्र बनाया जा सकता है.

मुख्य वक्ता डॉ. गौरी शंकर पासवान(के.के.एम. कॉलेज के अर्थशास्त्र  विभागाध्यक्ष एवं एनएसएस के पूर्व प्रोग्राम ऑफिसर) ने कहा कि भारत रत्न डॉ.अंबेडकर विश्व स्तरीय राजनीतिज्ञ और विधिज्ञ के साथ-साथ अर्थशास्त्र के महान पंडित भी थे. कोलंबिया विश्वविद्यालय में अध्ययन करते समय बाबा साहब के पास 29 विषय ऐसे थे, जिनका सीधा संबंध अर्थशास्त्र से था. वे लगभग 64 विषयों के  मास्टर थे. उन्होंने कहा कि कोलंबिया विश्वविद्यालय के सर्वेक्षण 2004 के अनुसार डॉ. बी.आर. अंबेडकर विश्व के सबसे प्रतिभाशाली इंसान थे. कैंब्रिज विश्वविद्यालय के एक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2011 के अनुसार डॉ. बी. आर. अंबेडकर विश्व इतिहास के पहले सबसे टैलेंटेड पर्सन हैं.

प्रो.पासवान ने कहा कि वर्ष 2012 के एक सर्वे के अनुसार  महात्मा गांधी  के बाद डॉ. अंबेडकर भारत के सबसे महान पुरुष हैं. अंबेडकर के आर्थिक विचार आज भी सत्य, प्रासंगिक और उपादेय हैं. उन्होंने कहा कि डॉ अंबेडकर जैसे नररत्न और विश्वरत्न पर भला किस देश को गर्व नहीं होगा. भारत में लोग अंबेडकर साहब को दलितों का मसीहा कह कर उनके कद और व्यक्तित्व को छोटा कर देते हैं.

प्रो.पासवान ने कहा कि दुनिया के देश डॉ. अंबेडकर को सिंबल ऑफ नॉलेज मानते हैं. संविधान निर्माता डॉ अंबेडकर इस बात के उदाहरण हैं कि व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी क्या नहीं कर सकता है? उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों को अनुकूल बना लेना ही अंबेडकर के जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा है. आज की पीढ़ी को अंबेडकर साहब के जीवन चरित्र को पढ़ना चाहिए और सीख लेनी चाहिए.

व्यवहार न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभात कुमार भगत ने कहा कि डॉक्टर अंबेडकर कानूनविद और प्रगतिशील विचारक भी थे. उनके प्रगतिशील विचारों का सबसे प्रत्यक्ष उदाहरण भारतीय संविधान है. उन्होंने कहा कि संविधान में देश के हर जाति, वर्ग  और धर्म के लोगों को अधिकार और कर्तव्य प्रदान किए हैं. संविधान हम वकीलों के लिए स्वर्ग जैसा है. राष्ट्र निर्माण में अंबेडकर साहब की महती भूमिका को विस्मृत नहीं किया जा सकता है.

वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज कुमार ने कहा कि डॉ.अंबेडकर विश्व विभूति हैं. ऐसे महापुरुष पर  हम भारतीयों को गर्व है भारतीय संविधान निर्माता के रूप में डॉ.अंबेडकर अमर हैं. उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता कायम करने तथा भेदभाव रहित समाज की स्थापना में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है. उन्हें सामाजिक क्रांति का अग्रदूत कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. वे वर्ष 1923 में विदेश से पढ़ाई समाप्त कर भारत वापस लौटे थे. तब से मृत्युपर्यंत अछूतोंद्धार और राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर संघर्ष किया. उन्होंने कहा कि जनता दल की सरकार ने भारत रत्न का सर्वोच्च सम्मान देकर अंबेडकर के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता जो प्रकट किया है ,वह अविस्मरणीय है.

इस मौके पर प्रो. डी. के. गोयल, प्रो. सरदार राम, प्रो. सत्यार्थ प्रकाश, मंटू पासवान ,श्याम जी, आदि ने अंबेडकर को आधुनिक भारत का निर्माता कहा है.

प्रभाकर मिश्रा(जमुई).