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अटल जी ने सुशासन से देश को सुदृढ़ आधार प्रदान किया :- प्रभात

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अटल जी के सुशासन मॉडल से ही देश का विकास संभव है. वे चाहते थे कि सत्तारूढ़ दल निष्पक्ष और विकासोन्मुखी बने. छायाचित्र:- प्रभाकर मिश्रा.

अटल बिहारी बाजपेई जयंती के अवसर पर जिला मुख्यालय के अटल बिहारी चौक स्थित स्थानीय व्यवहार न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभात कुमार भगत के आवास पर संवाद कक्ष में अटल बिहारी बाजपेई और उनका सुशासन मॉडल विषय पर एक परिचर्चा को संबोधित करते हुए केकेएम कॉलेज के अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष एवं मुंगेर विश्वविद्यालय के वित्त परामर्शी डॉ. प्रो. गौरी शंकर पासवान ने कहा कि अटल बिहारी बाजपेई साहस के सुमेरु और संकल्प के गिरिराज थे. उनका व्यक्तित्व और कृतित्व बहुमुखी था.

प्रो. पासवान ने कहा कि भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेई सुशासन के प्रबल पैरोकार थे. वे 1996 से 2004 तक तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने. प्रधानमंत्री के रूप में अटल जी सुशासन के प्रति काफी मुखर रहे उनका पूरा ध्यान पारदर्शी और जिम्मेवार प्रशासन के निर्माण पर केंद्रित रहा, जिससे आम आदमी का कल्याण सुनिश्चित हो सके. उन्होंने कहा कि अटल जी के सुशासन मॉडल से ही देश का विकास संभव है. वे चाहते थे कि सत्तारूढ़ दल निष्पक्ष और विकासोन्मुखी बने. अटल जी के सुशासन मॉडल की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में उनकी सड़क परियोजनाओं को रेखांकित किया जा सकता है. स्वर्णिम चतुर्भुज और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के माध्यम से देश में क्रांति लाने में उनकी विशेष भूमिका रही है.

प्रो. पासवान ने कहा कि बाजपेई जी के सुशासन मॉडल का ही प्रभाव है कि 2014 में केंद्र सरकार ने उनके जन्मदिन को सुशासन दिवस मनाने की घोषणा की थी. उन्होंने अपनी आभा से भारत के गौरव को तो बढ़ाया ही अपितु सुशासन को धार देकर देश के प्रगति को गति और लय भी प्रदान की है. अंततः 16 अगस्त 2018 को तेजस्विता का प्रखर सूर्य अस्त हो गया. आज संपूर्ण देश और नागरिकों को उनके बताए मार्गो और विचारों पर चलने की आवश्यकता है.

अपने अध्यक्षीय संबोधन में अधिवक्ता प्रभात कुमार भगत ने कहा कि अटल बिहारी बाजपेई भारत की विभूति थे. वे ख्यातिप्राप्त प्रखर नेता और कुशल लेखक भी थे. उन्होंने अपने प्रधानमंत्रीत्व काल में भारत के आर्थिक विकास में अविस्मरणीय कार्य किया है. देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए अटल जी ने गुड गवर्नेंस को आवश्यक माना था. उन्होंने कहा कि भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने अपने सुशासन से देश को एक सुदृढ़ आधार प्रदान कर भारत के स्वर्णिम भविष्य की आधारशिला रखने का महत्वपूर्ण कार्य किया है. भगत ने कहा कि अटल जी कभी भी विघ्न बाधाओं से विचलित नहीं हुए तथा सबको साथ लेकर चले. वे 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के तहत जेल यात्रा भी की थी.  सन 1946 में स्वयंसेवक संघ के प्रचारक बने.

राष्ट्र धर्म और पांचजन्य के संपादक भी रहे. उन्होंने कहा कि सन 1999 में भारत पाकिस्तान के  कारगिल युद्ध में कारगिल विजय का श्रेय वाजपेई जी को ही जाता है. स्नातक शिक्षक दिनेश मंडल ने अटल बिहारी वाजपेई को 1999 के कारगिल विजय का महानायक बताया. उन्होंने कहा कि अटल जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को हुआ था. उन्हें 1962 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया तथा 1994 में सर्वश्रेष्ठ सांसद घोषित किया गया. साल 2015 में उन्हें भारत रत्न की उपाधि से नवाजा गया  l अटल जी सुशासन के पक्षधर रहे हैं.

अधिवक्ता रामचंद्र रवि ने कहा कि बाजपेई जी भारत के महान राजनीतिज्ञ थे. वे प्रखर वक्ता और अधिवक्ता थे उनके जिह्वा पर सरस्वती का वास था. उन्होंने कहा कि बाजपेई जी 1996 में 13 दिनों के लिए, 1998 में 13 महीनों के लिए तथा 1999 में 5 वर्षों के लिए प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा की  इसे भुलाया नहीं जा सकता है. उनके पदचिन्हों पर चलकर ही देश का विकास किया जा सकता है.

अंत में प्रबुद्ध लोगों  द्वारा अटल बिहारी बाजपेई जी के साथ महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी को भी याद किया गया. आज ही के दिन 25 दिसंबर 1861को मालवीय जी का भी जन्म इलाहाबाद के प्रयागराज में  हुआ था. काशी हिंदू विश्वविद्यालय महामना मालवीय जी की अक्षय कीर्ति है. “सिर जाय तो जाय प्रभु ! मेरो धर्म न जाय” महामना का जीवन व्रत था. महामना को भी मरणोपरांत 2015 में भारत रत्न से अलंकृत किया गया. प्रबुद्ध जनों ने दोनों विभूतियों को श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया. इस मौके पर श्याम सुंदर, मंटू पासवान, उत्तम कुमार भारतीय, आदि शिक्षक एवं छात्र उपस्थित थे.

प्रभाकर मिश्रा (जमुई).