स्वर्णपदक प्राप्त करने में छात्राओं का वर्चस्व नारी-सशक्तीकरण के प्रयासों की सफलता...

स्वर्णपदक प्राप्त करने में छात्राओं का वर्चस्व नारी-सशक्तीकरण के प्रयासों की सफलता का परिचायक है :- राज्यपाल

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अपना लक्ष्य सदैव महान् रखिए, अपनी ऊर्जा पर विश्वास रखिए और हार मत मानिए, सफलता आपको अवश्य मिलेगी. फोटो:-पीआरडी, पटना.

बुधवार को महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति  फागू चौहान ने पटना स्थित बापू सभागार में नालंदा खुला विश्वविद्यालय के ’14वें दीक्षांत समारोह’  के अध्यक्षीय पद से संबोधित करते हुए कहा कि, “नालंदा खुला विश्वविद्यालय के आज के ‘दीक्षांत समारोह’ में कुल 27 स्वर्ण-पदक विजेताओं में छात्राओं की संख्या 19 है. सर्वोच्च स्तर का प्रदर्शन करने में बेटियों के बढ़ते वर्चस्व को मैं अच्छे सामाजिक बदलाव के साथ ही नारी सशक्तीकरण के प्रयासों की सफलता के रूप में भी देखता हूँ. यह बदलाव ही हमारे देश और समाज को सही अर्थों में विकसित देश और समुन्नत समाज के रूप में प्रतिष्ठा दिला सकता है.’’

राज्यपाल चौहान ने कहा कि ‘दीक्षांत’ वास्तव में पढ़ाई का अंत नहीं है बल्कि यह जीवन की लम्बी यात्रा का एक पड़ाव है.  उन्होंने बिहार की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासतों का उल्लेख करते हुए कहा कि नालन्दा एवं विक्रमशिला के प्राचीन विश्वविद्यालय इसी बिहार राज्य में पल्लवित एवं पुष्पित हुये. प्राचीन धर्म, दर्शन एवं साहित्य के क्षेत्र में भी इस राज्य ने विश्व को भरपूर प्रभावित किया. उन्होंने कहा कि विश्व का प्रथम एवं प्राचीनतम वैशाली का लिच्छवी गणराज्य इसी बिहार राज्य में सुविकसित हुआ था. ‘स्वतंत्रता-संग्राम’ के दौरान भी गाँधीजी ने बिहार के चम्पारण से ही अपनी कर्म-यात्रा का श्रीगणेश किया था.

राज्यपाल चौहान ने डिग्री एवं पदक प्राप्त करनेवाले विद्यार्थियां को बधाई और शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ‘‘अपना लक्ष्य सदैव महान् रखिए, अपनी ऊर्जा पर विश्वास रखिए और हार मत मानिए, सफलता आपको अवश्य मिलेगी. संघर्ष ही सफलता की कुंजी है.’’ उन्होंने कहा कि, ‘‘हम सबको भारतीय संस्कृति के आदर्श मानवीय मूल्यों को आत्मसात करना चाहिए. आत्म-संयम चरित्र-निर्माण का मेरूदंड है. नैतिक मूल्यों और मर्यादाओं की रक्षा से ही सामाजिक बुराइयों पर अंकुश लग सकता है. स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ विचार, जीवन और जगत को भयमुक्त बनाते हैं.’’

राज्यपाल चौहान ने कहा कि ‘‘हम सबको भारतीय संस्कृति के आदर्श मानवीय मूल्यों को आत्मसात करना चाहिए. आत्म-संयम चरित्र-निर्माण का मेरूदंड है. नैतिक मूल्यों और मर्यादाओं की रक्षा से ही सामाजिक बुराइयों पर अंकुश लग सकता है. स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ विचार, जीवन और जगत को भयमुक्त बनाते हैं.’’

राज्यपाल चौहान ने नालंदा खुला विश्वविद्यालय की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस विश्वविद्यालय में आज एक सौ से अधिक पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं. लगभग दो हजार से बढ़कर विद्यार्थियों की संख्या अब 01 लाख 25 हजार से भी अधिक है. यह विश्वविद्यालय सामाजिक दायित्व-निर्वहन में भी सदैव तत्पर रहता है. जेल में कैदियों को निःशुल्क शिक्षा, स्त्रियों के लिए 25 प्रतिशत की आर्थिक छूट और विकलांगों को विशेष सहायता विश्वविद्यालय द्वारा दी जा रही है.

राज्यपाल चौहान ने कहा कि सरकार का यह संकल्प है कि बिहार राज्य में उच्च शिक्षा में ‘सकल-नामांकन-अनुपात’ में वृद्धि की जाय. इस व्यापक लक्ष्य को हासिल करने में दूरस्थ शिक्षा महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. उन्होंने कहा कि यह प्रशंसा योग्य है कि उच्च शिक्षा को पिछड़े ग्रामीण स्तर तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रखण्ड स्तर पर भी नालंदा खुला विश्वविद्यालय के अध्ययन-केन्द्र खोले गये हैं.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्ण नन्दन प्रसाद वर्मा ने कहा कि शहर से लेकर गाँवों तक शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए सरकार की कतिपय महत्वाकांक्षी योजनाएँ संचालित हो रही हैं. उन्होंने कहा कि महामहिम राज्यपाल के मार्गदर्शन एवं माननीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उच्च शिक्षा क्षेत्र में भी तेजी से गुणात्मक सुधार हो रहे हैं. उन्होंने नियमित रूप से दीक्षांत समारोहों के आयोजन तथा ससमय शैक्षणिक-सत्रों के संचालन के लिए हो रहे सार्थक प्रयासों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि संसाधनों की कोई कमी नहीं है और तेजी से शैक्षणिक विकास हो रहा है. उन्होंने शिक्षा के विकास के लिए राज्य में पर्याप्त बजटीय प्रावधान किए जाने का भी उल्लेख करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उच्च शिक्षा क्षेत्र में तेजी से विकास होगा.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो० आर० के०  भटनागर ने कहा कि ‘‘राष्ट्र के निर्माण की कुंजी राष्ट्र के युवा हैं जो राष्ट्र एवं समाज के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाते हैं.’’ उन्होंने कहा कि 21वीं सदी शोध एवं अनुसंधान की सदी है. ऐसे में शिक्षा को शोधपरक बनाया जाना जरूरी है. कार्यक्रम में नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० गुलाब चन्द राम जायसवाल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी दी.

समारोह में विद्यार्थियों को स्वर्णपदकों एवं उपाधियों का वितरण महामहिम राज्यपाल एवं माननीय शिक्षा मंत्री द्वारा किया गया. समारोह में 7836 उपस्थित / अनुपस्थित उत्तीर्ण विद्यार्थियों को उक्त समारोह के माध्यम से उपाधि दिये जाने की घोषणा हुई. समारोह में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा सहित कई विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक अधिकारी एवं शिक्षकगण भी उपस्थित थे.

समारोह का संचालन कुलसचिव विंग कमांडर एस० के० शर्मा ने किया जबकि धन्यवाद-ज्ञापन प्रतिकुलपति डॉ० कृतेश्वर प्रसाद ने किया.