स्कूली बस्तों का बोझ कम करने का सर्कुलर जारी…

स्कूली बस्तों का बोझ कम करने का सर्कुलर जारी…

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कक्षा एक और दो के बच्चों को भाषा व गणित विषय से संबंधित केवल दो ही किताबें अनिवार्य होगी, फोटो:-गूगल.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्कूलों को सर्कुलर जारी कर निर्देश दिए नोटिस जारी किया है कि वे पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को होमवर्क से मुक्त करने के निर्देश दिए हैं साथ ही 10वीं कक्षा तक के स्कूली बच्चों को बस्ते का बोझ भी कम कर दिया गया है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों ओर केंद्र शासित राज्यों को इस संबंध में सर्कुलर जारी किया गया है.

जारी किए गये निर्देशानुसार, कक्षा एक और दो के बच्चों को अब होमवर्क नहीं दिया जाएगा साथ ही स्कूली बच्चों के बस्ते का बोझ अधिकतम 1.5 किलो ग्राम होगा. कक्षा एक और दो के बच्चों को भाषा व गणित विषय से संबंधित केवल दो ही किताबें अनिवार्य होगी, जबकि कक्षा तीसरी से पांचवीं तक भाषा, ईवीएस, गणित विषय की केवल एनसीईआरटी पाठयक्रम की पुस्तकें अनिवार्य की गई हैं. कक्षा एक और दो में पढ़ने वाले बच्चे 1.5 किलो ग्राम, कक्षा तीन, से पांच के बच्चों का 02-03 किलो ग्राम, कक्षा छह और सात के बच्चों का 04 किलो ग्राम, कक्षा आठ और नौ के बच्चों का 4.5 किलो ग्राम दसवीं कक्षा के बच्चों का 05 किलोग्राम स्कूली बच्चों के बस्ते का भार होना चाहिए.

बतातें चलें कि, सबसे पहले मशहूर शिक्षाविद व वैज्ञानिक प्रोफेसर यशपाल ने वर्ष 1992 में अपनी रिपोर्ट “बस्ते का बोझ” की बात उठाई थी तब से अब तक लोगों को बोलने का अधिकार मिल गया था. बच्चो के बस्ते का वजन अधिक होने के कारण स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के साथ-साथ मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है. यशपाल कमेटी की रिपोर्ट “बस्ते का बोझ” के अनुसार अंग्रेजी भाषा सीखने के दबाव के साथ-साथ निजी स्कूलों की मनमाने विषयों  पढाने की होड़ के कारण बस्ते का बोझ बढ़ जाता है जिसका फायदा निजी स्कूलों को होता है. इतना ही नहीं उसके बाद बच्चों को क्रिएटिविटी और खेल-कूद का भी दबाव होता है. बच्चों के उपर मानसिक व शारीरिक दवाब बनाया जाता है जिसके कारण बच्चे खतरनाक कदम उठाने को विवश हो जाते हैं.

नैशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) ने स्कूली बच्चों के बस्ते के बोझ कम करने के लिए 2005 में एक सर्कुलर जारी कर कुछ सुझाव दिए थे. जिसके बाद कुछ राज्यों ने अपने पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तिकाओं में बदलाव किया है. स्कूली बच्चों के बस्ते के बोझ को कम करने के सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंड्री एजुकेशन (सीबीएसई) ने भी दिशानिर्देश जारी किया है जिसके अनुसार, प्राइमरी कक्षा के बच्चों को जरूरत से ज्यादा किताबें लेने को नहीं कहा जाए साथ ही पाठ्यपुस्तकों की संख्या भी सीमित होनी चाहिए. एनसीईआरटी ने जो सीमा तय कर रखी है, उससे ज्यादा इसकी संख्या नहीं होनी चाहिए. कक्षा एक और दो के बच्चों के लिए बस्ता ना हो या बस्ता हो तो उसे स्कूल में छोड़ने की अनुमति हो. कक्षा एक और दो के बच्चों होमवर्क नहीं दिया जाए जबकि, कक्षा तीन और चार के बच्चों को होमवर्क की जगह कुछ और विकल्प दिया जाए.