‘सामाजिक समरसता संगोष्ठी’ को राज्यपाल ने संबोधित किया…

‘सामाजिक समरसता संगोष्ठी’ को राज्यपाल ने संबोधित किया…

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कोई भी कौम अपनी विरासतों और गौरव-गाथाओं को भूलकर जिन्दा नहीं रह सकती. फोटो:-आईपीआरडी, पटना.

मंगलवार को महामहिम राज्यपाल फागू चैहान ने ‘नोनिया-बिन्द-बेलदार महासंघ, बिहार प्रदेश’ के तत्वावधान में स्थानीय बापू सभागार में आयोजित ‘सामाजिक समरसता संगोष्ठी एवं अभिनन्दन समारोह’ को संबोधित करते हुए कहा कि, “भारत की आजादी की लड़ाई में समाज के अभिवंचित, अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़े-अतिपिछड़े, गरीबों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग आदि का भी अत्यन्त महत्वपूर्ण योगदान रहा है. आधुनिक इतिहासकार अब इस बात को स्वीकारने लगे हैं”.

राज्यपाल चैहान ने कहा कि, अतिपिछड़े-पिछड़े, अनुसूचित जाति/जनजाति तथा गरीब-अभिवंचित वर्ग के सदस्यों में शिक्षा की कमी है. उन्होंने कहा कि सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए शिक्षा सबसे जरूरी जरिया है. राज्यपाल चैहान ने कहा कि, कमजोर, अभिवंचित तथा पिछड़े-अतिपिछड़े वर्गों के लोग नशा-सेवन, बाल विवाह, दहेजप्रथा आदि सामाजिक समस्याओं से निजात पाकर तथा पारस्परिक एकजुटता बनाये रखकर अपना तेजी से सामाजिक-आर्थिक विकास कर सकते हैं.

राज्यपाल चैहान ने पश्चिम चंपारण जिलावासी महान स्वतंत्रता सेनानी स्व० मुकुटधारी प्रसाद चैहान, स्व० हरिहर महतो तथा बेगूसराय निवासी स्व० बुद्धू नोनिया आदि का स्मरण करते हुए कहा कि 1917 ई० के ‘चम्पारण सत्याग्रह आन्दोलन’ के दौरान जब मोहनदास करमचन्द गाँधी बेतिया आए थे, तब भितिहरवा में अपनी जमीन देकर अमर स्वतंत्रता-सेनानी स्व० मुकुटधारी प्रसाद चैहान ने ही ‘भितिहरवा आश्रम’ की स्थापना करायी थी और पं० राजकुमार शुक्ल के साथ मिलकर उन्हें ‘महात्मा’ कहकर संबोधित किया था. उन्होंने कहा कि, इसी नाम को बाद में विश्वव्यापी ख्याति मिल गई और मोहनदास करमचन्द गाँधी ‘महात्मा गाँधी’ के नाम से विख्यात हो गये.

राज्यपाल चैहान ने कहा कि कोई भी कौम अपनी विरासतों और गौरव-गाथाओं को भूलकर जिन्दा नहीं रह सकती. उन्होंने कहा कि समाज के अभिवंचित वर्ग के लोगों को, खासकर नयी पीढ़ी को भी अपने पुरखों की शहादत, त्याग, तपस्या और संघर्ष से प्रेरणा ग्रहण करनी चाहिए.

राज्यपाल चैहान पूर्व राष्ट्रपति डा० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम को उद्धृत करते हुए कहा कि “सपने दो तरह के होते हैं. एक वो जो सोये में हम देखते हैं और दूसरे वो जो हमें सोने ही नहीं देते”.उन्होंने कहा कि, युवाओं को बराबर ऐसे सपने देखने चाहिए, जो उनमें बेचैनी पैदा करते हों, उन्हें ऊर्जान्वित करते हों. राज्यपाल ने कहा कि वे एक गरीब परिवार से राजनीति में आए थे और उन्हें कोई पैतृक विरासत या परम्परा हासिल नहीं थी. संघर्ष और परिश्रम के बल पर उन्होंने सबकुछ हासिल किया. उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अपने नये पद-दायित्वों का भी वे गरिमापूर्वक निर्वहन करेंगे. राज्यपाल चैहान ने कहा कि, आज उनका एक ही धर्म है -‘राष्ट्रधर्म’ और एक ही धर्मग्रन्थ है -‘भारतीय संविधान’. भारतीय संविधान को महान ‘मर्यादा-ग्रंथ’ बताते हुए उन्होंने इसके पूर्ण परिपालन के लिए अपील की.

राज्यपाल चैहान ने कहा कि, देश के तेजस्वी और ओजस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सफल नेतृत्व में भारत का आज नवनिर्माण हो रहा है. उन्होंने कहा कि ‘कश्मीर से कन्याकुमारी तक आज भारत केवल भावनात्मक रूप से नहीं वरन संवैधानिक रूप से भी पूर्णतः एक है. आज पूरे भारत का ‘एक संविधान और एक राष्ट्रीय ध्वज’ है. यह अत्यन्त गौरव की बात है. राज्यपाल ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों, विशेषकर अभिवंचितों, अतिपिछड़ों-पिछड़ों, गरीबों-पीड़ितों आदि के समग्र विकास हेतु तेजी से प्रयास कर रही हैं.

राज्यपाल चौहान ने ‘सामाजिक समरसता संगोष्ठी’ के अवसर पर हुए अपने अभिनन्दन के लिए आयोजक-संस्था व समाज तथा सभी बिहारवासियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मौजूदा केन्द्र सरकार ने सात महिलाओं तथा नौ पिछड़े-अतिपिछड़े एवं अभिवंचित वर्ग के सदस्यों को राज्यपाल बनाकर एक ऐतिहासिक कार्य किया है. उप मुख्यमंत्री मोदी ने इसके लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया. राज्य के कृषि तथा पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री प्रेम कुमार ने पिछड़े-अतिपिछड़े वर्ग को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके विकास हेतु किए जा रहे सरकारी प्रयासों की जानकारी दी. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने कहा कि एक कुशल संगठनकर्ता, प्रशासक एवं जननेता के रूप में महामहिम राज्यपाल की ख्याति रही है और उनके मार्ग-दर्शन में बिहार निश्चय ही प्रगति-पथ पर तेजी से आगे बढ़ेगा. खान एवं भूतत्व मंत्री ब्रज किशोर बिन्द ने कहा कि समाज के कमजोर-पिछड़े-अतिपिछड़े वर्ग के लोग एकता और संघर्ष के बल-बूते ही तरक्की कर सकते हैं.

कार्यक्रम में महामहिम राज्यपाल चौहान को भूटान, नेपाल, सिक्किम, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, झारखंड आदि विभिन्न राज्यों तथा बिहार के सभी जिलों से आये ‘नोनिया-बिन्द-बेलदार महासंघ’ के हजारों पदाधिकारियों-प्रतिनिधियों, सदस्यों आदि ने पुष्प-गुच्छ, स्मृति-चिह्न एवं अंगवस्त्रम समर्पित कर उनका अभिवादन किया.

कार्यक्रम में पूर्व मंत्री रेणु देवी, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की अध्यक्ष डा० भारती मेहता,  गणेश भारती, संत पुरूषोत्मानंद जी, जयनाथ चैहान, ओमप्रकाश चैहान, अरूण बिन्द, संतोष महतो, जी० के० गिरिश सहित संस्था के अनेक पदाधिकारियों-प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार व्यक्त किये. कार्यक्रम में विधायक संजीव चैरसिया सहित कई जन-प्रतिनिधि, विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारी-प्रतिनिधि आदि भी उपस्थित थे.