समस्याएँ अपनी अपनी…

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सालों से दीयरवासियों की समस्याएँ तो कई हैं लेकिन आजतक कोई कारवाई नहीं की गई.वर्तमान समय में भी दीयर के कई गावों में ना तो अस्पताल है और ना ही कोई डॉक्टर.

बारिश का मौसम आते ही जहां किसानों के चेहरे खिल जातें हैं वहीं,  दीयरवासियों के पुराने जख्म हरे हो जातें हैं साथ ही उन्हें हर क्षण डर के साथ जानमाल का भय भी बना रहता है.

बताते चलें कि, गंगा का पानी जब कम होता है तो आने-जाने के लिए हर साल पीपा पल बनाया जाता है लेकिन, गंगा में पानी बढ्ने के साथ ही पीपा पुल खोल दिया जाता है। जिसके बाद दीयर के गावों से आने-जाने का एकमात्र सहारा सिर्फ और सिर्फ नाव ही होता है.

स्थानीय लोगों से बातचीत करने के बाद लोगों ने कहा कि नाव का सफर जानलेवा होता है.  नाव के सफर के दौरान कई मौतें होती रहती है लेकिन, सरकार को इस तरफ कोई ध्यान नहीं होता है.

गंगा किनारे के घाटों पर कई लोग जीवन-यापन के लिए दुकाने लगते हैं लेकिन, पानी बढ्ने के बाद हर साल लाखों रुपए का नुकसान होता रहता है परंतु सरकार की तरफ से किसी प्रकार की कोई सुविधा भी नहीं मिलती है.

 

संकलन :- भास्कर और अशोक सिन्हा.