Dhram Sansar

सत्संग…

सत्संग –वार्ता के दौरान एक भक्त ने महाराजजी से पूछा कि महाराजजी वर्तमान समय के दौर में इस जगत पर रहने वाले हर जीव परेशान है खासकर मानव. आखिर वर्तमान समय में मानव के परेशान होने का कारण क्या है…?

उत्तर देते हुए वाल्व्यास सुमनजी महाराज कहते हैं कि वर्तमान समय के दौर में मानव कि सबसे बड़ी परेशानी का कारण है अज्ञानता. वर्तमान समय के दौर में हर मानव पढ़ा-लिखा व बड़ी-बड़ी डिग्रियों वाला है लेकिन, अज्ञानता के दौर में अंधे कूप की ओर दौड़ लगा रहा है. आज के मानव पास डिग्री तो है लेकिन, शब्दों के अर्थ क्या है और उसका अपने जीवन में क्या प्रयोग है ये पता नहीं  है. महाराजजी ने कहा कि, किसी पुस्तक को पढ़ना या उसे समझ कर पढ़ना…. दोनों में कौन उचित है.

महाराजजी बताते है कि, पुरातन काल से लेकर अब तक जितनी भी तरक्की मानव ने की है उसका वर्णन हमारे धर्म ग्रंथों में सैकडो वर्ष पूर्व से लिखित है. हम सभी किसी भी पुस्तक को पढते हैं लेकिन, उसमें लिखी गई बातों को समझने की कोशिस ही नहीं करते हैं. वर्तमान समय के दौड़ में मानव इसी अज्ञानता के दौड़ से गुजर रहा है. उन्होंने आगे बताया कि हम सभी अपने घरों में चालीसा या किसी भी पुराण का पाठ करते है उसके बाद भी घर के सदस्य परेशानी के विकट दौड़ में घिरे होते हैं आखिर ऐसा होने का कारण क्या है कभी सोचा है?

महाराजजी बताते है कि, हम सभी अपने घरों में होने वाली दैनिक क्रिया-कलापों को करते हैं ! आखिर किस रूप में करते है ! कुछ लोग यहाँ तक कहते हैं कि, धार्मिक ग्रंथों में लिखा है कि, भगवान को किसी भी समय में याद कर लेना भगवान की पूजा है. भगवान कृष्ण ने कहा था कि, कर्म करो यही सबसे बड़ी पूजा है. महाराजजी कहते हैं कि पुस्तकों व धार्मिक ग्रंथों में और भी बाते लिखी गई है भक्त इसका पालन भी करते हैं लेकिन परेशान भी रहते हैं.

महाराजजी बताते है कि, हम सभी किसी भी पुस्तक को पढ़ने से पहले उस पुस्तक की बंदना करते हैं उसके बाद ही उस पुस्तक को आदर सहित ईष्ट को याद कर पढते हैं लेकिन, वर्तमान समय के दौड़ में जबरदस्ती थोपे गए नियम को पालने करने की विवशता में उस पुस्तक को पढते है या यूँ कहे कि हम सभी जो भी कर्म करते हैं वो हमारी मज़बूरी है या जबरस्ती थोपा गया है जिसका अनुपालन करते हैं.

महाराजजी बताते है कि, मज़बूरी में किये गये कर्म से किसी को कोई फायदा (लाभ) नहीं होता है बल्कि समय और धन भी बर्बाद होता है. उन्होंने आगे कहा कि किसी भी कर्म को करने से पहले अपने चंचल मन को एकाग्र कर अपने ईष्ट को याद करे उसके बाद ही कोई भी कर्म करे. भगवान आपको अवश्य ही  सफलता प्रदान करेंगें.

महाराजजी बताते है कि, हम सभी चालीसा का पाठ प्रतिदिन करते है लेकिन, उनके अर्थों को नहों जानते हैं या जाने की कोशिस नहीं करते हैं. आमतौर पर ब्रहामण हनुमान चलीसा के पाठ करने का सुझाव देते हैं. हनुमान चलीसा के हर दोहे अपने आप में अद्वितीय है और उन दोहों को समझकर पढ़ने से समय रूपी कालचक्र के भंवर से निकलने में सहायक होती है.

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि।

बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायक फल चारि॥

महाराजजी बताते है कि, गुरु महाराज के चरणों की धूलि से अपने चंचल मन को पवित्र और एकाग्र कर  श्रीरघुवीर के निर्मल यश को गाता हूँ,  जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है.

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार।

बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि, हे पवन कुमार हम आपको याद करते हुए फरीयाद करते हैं कि मेरा शरीर और बुद्धि दोनों ही निर्बल है कमजोर है अत: हे पवन कुमार आप मुझे शारीरिक बल, बुद्धि और ज्ञान देकर मेरे दुखों व दोषों को दूर करने की कृपा करें.

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि, हनुमानजी आपका ज्ञान और गुण अथाह है आपकी जय हो. हे कपीश्वर आपकी कीर्ति तीनों लोकों (भू-लोक, देवलोक व पातळ लोक) में अजर हो.

राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवन सुत नामा॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि, हे पवन कुमार आप देवी अंजना के नंदन है लाडले है साथ ही आप पवन जिस तरह से चलती है उसी तरह आप उड़ते है इसीलिए आप पवनसुत कहे जाते है. हे अंजनी नन्दन आप भगवान श्रीरामचन्द्र के दूत हैं साथ ही अतुलित बल के स्वामी है आपकी जय हो.

महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी॥

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते है कि, हे पवन कुमार आपके सामन दूसरा कोई बलशाली नहीं है आप महावीर हैं साथ ही आप विशेष पराक्रम वाले पराक्रमी हैं. हे महावीर आप अच्छी बुद्धि वालो के साथी व सहायक हैं.

शेष अगले अंक में… 

 वालव्याससुमनजीमहाराज, महात्मा भवन,

श्री रामजानकी मंदिर, राम कोट, अयोध्या. 8544241710.

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