“शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य चरित्र-निर्माण है.”:-राज्यपाल चौहान

“शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य चरित्र-निर्माण है.”:-राज्यपाल चौहान

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उन्होंने अपनी प्रतिभा से पूरी दुनियां को चमत्कृत और आकर्षित करते हुए बिहार राज्य और पूरे देश का नाम गौरवान्वित किया. फोटो:-पीआरडी, पटना.

मंगलवार को दरभंगा स्थित नागेन्द्र झा स्टेडियम परिसर में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के ‘दशम दीक्षांत समारोह’ को संबोधित करते हुए बिहार के राज्यपाल-सह-कुलाधिपति फागू चौहान ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य है- चरित्र निर्माण. उन्होंने कहा कि मात्र भौतिक प्रगति से ही कोई देश खुशहाल और गौरवशाली राष्ट्र नहीं बन सकता. शिक्षा केवल नौकरी के लिए जरूरी नहीं है, अपितु इससे मनुष्य में संवेदनशीलता और नैतिकता का भी विकास होता है.

महामहिम राज्यपाल ने कहा कि समाज के वंचित, दलित और पिछड़े वर्ग को विकास की मुख्यधारा में लाना बहुत जरूरी है. विश्व में आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा है. कश्मीर पर साहसिक और राष्ट्रीय एकता को मजबूती प्रदान करने वाला आवश्यक निर्णय लेकर हमने उसका कड़ा जवाब दिया है. बिहार के समृद्ध अतीत नालंदा और विक्रमशिला की याद दिलाते हुए राज्यपाल चौहान ने शिक्षा के गुणात्मक विकास पर बल दिया. उन्होंने पर्यावरण-संरक्षण और युवाओं सामाजिक दायित्वों की भी चर्चा की. राज्यपाल ने शिक्षा के गुणात्मक विकास एवं तत्संबंधी विमर्शों के संदर्भ में विश्वविद्यालय के प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा की.

राज्यपाल चौहान ने कहा कि ‘‘आज के समय में देश की सीमाएँ टूट रही हैं. उन्होंने कहा कि, संचार माध्यमों में क्रांति आई है. पठन-पाठन की तकनीक बदल रही है. रोजगार का स्वरूप बदल रहा है।. सबके लिए देश से लेकर विदेश तक के दरवाजे खुले हुए हैं. हमें विश्व की प्रतिस्पर्द्धा में आना है पर भारत की अस्मिता का भी ख्याल रखना है. अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक वैभव को भी अमिट बनाये रखना है। हमारे लिए राष्ट्र सर्वोपरि है.’’

राज्यपाल चौहान ने कहा कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों का समाज से रिश्ता भी प्रगाढ़ होना चाहिए. हरेक कॉलेज एक-एक गाँव गोद लें. वहाँ शिक्षा और स्वच्छता के कार्यक्रम चलाये जायें. केवल किताबी ज्ञान ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि महात्मा गाँधी के 150वें जयंती-वर्ष में हमें शिक्षित और स्वच्छ भारत के निर्माण का दृढ़ संकल्प लेना चाहिए.

‘दीक्षांत समारोह’ में विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए राज्यपाल चौहान ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की पंक्तियाँ को भी उद्धृत किया-

‘‘सेनानी करो प्रयाण अभय, भावी इतिहास तुम्हारा है।

ये नखत अमां के बुझते हैं, सारा आकाश तुम्हारा है।।’’

उन्होंने डिग्री प्राप्त करनेवाले सभी विद्यार्थियों को विशेष रूप से शुभकामनाएँ दी. ‘दीक्षांत अभिभाषण’ देते हुए राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद के कार्यपालक अध्यक्ष पद्मश्री विरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली अब दुनिया में सबसे बड़ी और जटिल प्रणाली है. स्वतंत्रता प्राप्ति के समय केवल 20 विश्वविद्यालय और 200 कॉलेज थे. आज 960  विश्वविद्यालय और 40000 कॉलेज हैं जिनमें 3.5 करोड़ से अधिक छात्र / छात्राएँ पढ़ते हैं. बेशक आजादी के बाद भारत ने विकास किया है, लेकिन गरीबी, कुपोषण, प्रदूषण जैसी विकराल चुनौतियाँ सामने खड़ी हैं जिनका सामना करना है. राज्यपाल चौहान ने छात्र-छात्राओं को विडंबनाओं और विरोधाभासों से भरी दुनिया में विवेकानंद का स्मरण दिलाया, जिन्होंने एक मजबूत, न्यायपूर्ण, नैतिक मूल्यों से भरे हुए भारत का सपना देखा था.

विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कुलपति प्रो० सुरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि सभी सत्र नियमित हैं. स्नातक प्रथम खंड 2019-22 में नामांकन हेतु दो लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए.370 स्थायी और 540 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कर शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर कर दी गई है. प्रो० सिंह ने कहा कि ‘एम्प्लॉयबिलिटी लिंक्ड स्किलिंग प्रोग्राम्स’ के तहत जॉब ड्राइव चलाया जा रहा है. विश्वविद्यालय के 29 अंगीभूत, 05 संबद्ध तथा 03 बी०एड० कॉलेजों का ‘नैक’ से प्रत्यायन हो चुका है. कुलपति ने आगे कहा कि हम विश्वविद्यालय के हर परिसर को हरा परिसर बनाने में लगे हैं.1520 वृक्ष लगाए गये हैं और निकट भविष्य में 5000  वृक्ष लगाने की योजना है. सौर ऊर्जा संयंत्र हमारी उपलब्धियाँ हैं.2017-18 से ही छात्रसंघ का निर्वाचन हो रहा है जो छात्र केन्द्रित तंत्र विकसित करने की प्रतिबद्धता को इंगित करता है. कुलपति प्रो० सिंह ने शिकायत निवारण कोषांग, पेंशन अदालत एवं लोक सूचना कोषांग की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए छात्र-छात्राओं से देश के एक जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील की.