शिक्षक अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करेंगे तो समाज...

शिक्षक अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करेंगे तो समाज में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी :- मुख्यमंत्री

239
0
SHARE
बिहार ज्ञान की भूमि रही है और ज्ञान की इस भूमि पर यदि हमारे बच्चे पढ़ नहीं पाए तो यह हमारे लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा. फोटो:-पीआरडी, पटना.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित शिक्षक दिवस समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया. मुख्यमंत्री कुमार ने प्रथम उप राष्ट्रपति डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया. समारोह में छात्राओं ने मुख्यमंत्री को पौधा भेंटकर उनका अभिनंदन किया. मुख्यमंत्री कुमार ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के साथ ही वर्ष 2018 में शिक्षक कल्याण कोष में अधिकतम राशि जमा करने वाले नालंदा, पश्चिम चंपारण एवं पटना के जिला शिक्षा पदाधिकारी को सम्मानित किया. इस अवसर पर रिमोट के माध्यम से मुख्यमंत्री ने बिहार उन्नयन कार्यक्रम का भी शुभारंभ किया.

शिक्षक दिवस समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री कुमार ने कहा कि भारत के महान दार्शनिक, प्रसिद्ध शिक्षक और द्वितीय राष्ट्रपति डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस पर हर वर्ष शिक्षक दिवस का आयोजन किया जाता है. शिक्षक दिवस समारोह के इस अवसर पर मैं डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान व्यक्त करता हूँ. साथ ही शिक्षक-शिक्षिकाओं का भी हार्दिक अभिनंदन करते हुए गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करता हूँ. उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षकों की बहुत बड़ी भूमिका है इसलिए आज का दिन शिक्षकों के लिए सम्मान का दिन है.

शिक्षकों से अपील करते हुए मुख्यमंत्री कुमार ने कहा कि आप सबों की जब जो इच्छा हो मांग करते रहिये, इससे हमें कोई परेशानी नहीं है लेकिन बच्चों को पढ़ाना आपका मूल दायित्व है. उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बिहार में जो काम हुये हैं, उसे याद रखिये. उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ जितना नारा लगाना हो लगाइए, मुझे इससे कोई तकलीफ नहीं है क्योंकि लोकतंत्र में सबको आजादी है लेकिन यह याद रखिये कि जो लोग आज आपको बहकाने में लगे हैं, उन्हीं लोगों ने 2008 में एक पुस्तिका का प्रकाशन कर कहा था कि प्राथमिक शिक्षण संस्थानों में पिछले 03 वर्षों में अयोग्य शिक्षकों की बहाली कर शिक्षा व्यवस्था को चौपट कर दिया गया है. उस वक्त भी हमने कहा था कि कोई शिक्षक अयोग्य नहीं है, अगर आप चाहते हैं तो नॉर्मल टेस्ट ले सकते हैं लेकिन जो आपको अयोग्य करार दिया करते थे, वे ही आज तरह-तरह की बातें कर रहे हैं. शिक्षकों से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि पूरी निष्ठा के साथ और अच्छे ढंग से आप बच्चों को पढ़ाइये, जितना संभव होगा हम करते रहेंगे, आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. शिक्षक दिवस के अवसर पर हम इतना ही कहेंगे कि हमने आपका हमेशा ख्याल रखा है और आगे भी रखेंगे तथा समय आने पर जो कुछ संभव होगा, करेंगे. उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों को आज पुरस्कृत किया गया है उन्हें मैं बधाई देता हूँ.

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2005-06 में जिस बिहार का शिक्षा बजट 4,261 करोड़ रूपये हुआ करता था, वह वर्ष 2018-19 में बढ़कर 32,126 करोड़ रुपये हो गया है, इसे भूलना नहीं चाहिए. उन्होंने कहा कि शिक्षा की महता को हम भूल नहीं सकते और शिक्षा के साथ-साथ हमने हर क्षेत्र में काम किया है. वर्ष 2005 में जब बिहार की जनता ने हमे काम करने का मौका दिया तो हमने अध्ययन कराया, जिसमें यह बात सामने आयी कि 12.5 प्रतिशत बच्चे स्कूलों से बाहर हैं, इसके बाद बच्चों को स्कूलों तक पहुंचाने के लिए 21 हजार नये स्कूलों का निर्माण कराने के साथ ही पुराने विद्यालयों में नये क्लास रूम की व्यवस्था की गयी. इसके अलावा पंचायत एवं नगर निकायों को शिक्षकों के नियोजन का अधिकार दिया गया, जिसमें 4000 रूपये पर अप्रशिक्षित शिक्षक और 5000 रूपये पर प्रशिक्षित शिक्षकों का नियोजन किया गया. उसके बाद वर्ष 2015 में नियोजित शिक्षकों का वेतनमान निर्धारित करने के बाद वर्ष 2016-17 में सातवें वेतन की अनुशंसा कर सुविधाएं प्रदान की गयीं. आज स्कूलों से बाहर रहने वाले छात्रों की संख्या 01 प्रतिशत से भी कम रह गयी है. मिडिल स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों के लिए पोशाक योजना की शुरुआत की गयी, जिसके बाद लड़कियों की संख्या बढ़ गयी. उन्होंने कहा कि, नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली वाली लड़कियों की संख्या पहले 01 लाख 70 हजार थी, जिसको देखते हुए साइकिल योजना की शुरुआत की गयी. इससे न सिर्फ लड़कियों का मनोबल और उत्साहवर्द्धन हुआ बल्कि लोगों की सोच में भी परिवर्तन आया. आज मैट्रिक में लड़के और लड़कियों की संख्या बराबर हो गयी है. अब शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. यह बिहार ही नहीं पूरे देश के लिये जरूरी है.

मुख्यमंत्री कुमार ने कहा कि लोगों की सेवा करने के प्रति हमारा समर्पण है और यही हमारा धर्म है. वर्ष 2003 में जब हम सांसद थे तो मोकामा विधानसभा क्षेत्र के टाल इलाके में क्षेत्र भ्रमण के दौरान एक बच्चे ने हमसे कहा कि हम पढ़ेंगे नहीं, उस बच्चे की बात को हम आज तक नहीं भूले हैं. उन्होंने कहा कि प्रजनन दर को घटाने के लिए बिहार की सभी पंचायतों में उच्च माध्यमिक विद्यालय खोलने का निर्णय लिया गया है ताकि लड़कियां कम से कम 12वीं तक शिक्षा हासिल कर सके. अप्रैल 2020 तक सभी पंचायतों में 9वीं कक्षा की पढ़ाई शुरू हो जायेगी. प्रजनन दर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक अध्ययन में यह पाया गया कि अगर पत्नी मैट्रिक पास है तो देश का औसत प्रजनन दर 02 है और बिहार में भी 02 है और यदि पत्नी 12वीं पास है तो देश का औसत प्रजनन दर 1.7 है और बिहार में औसत प्रजनन दर 1.6 है. इसी कारण से हमने यह तय किया कि प्रत्येक पंचायतों में प्लस टू स्कूलों की स्थापना की जायेगी. उन्होंने कहा कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की पहले क्या स्थिति थी, यह जगजाहिर है लेकिन अब नई तकनीक और नया कानून बन जाने के बाद विगत दो वर्ष से रिजल्ट में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने नहीं आयी है.

मुख्यमंत्री कुमार ने कहा कि बांका जिलाधिकारी ने गणित और विज्ञान में उन्नयन कार्यक्रम शुरू किया था, जो काफी कारगर एवं प्रभावी साबित हुआ. जब हमने देखा तो कहा कि यह सिस्टम सभी विषयों में लागू करिये. बिहार उन्नयन कार्यक्रम शुरू होने के बाद क्लास में बच्चे काफी इम्प्रूव करेंगे लेकिन क्लास के माध्यम से पढ़ाने की परंपरा ज्यों की त्यों चलती रहेगी. उन्नयन कार्यक्रम को केंद्र ने भी पुरस्कृत किया है. बांका कॉलेज में भी इसे शुरू कर दिया गया है. गरीब परिवारों के छात्र भी उच्च शिक्षा हासिल कर सकें, इसके लिए हमलोगों ने 04 लाख रूपये के स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की भी व्यवस्था की है, इसके लिए अच्छी खासी संख्या में लोग इच्छा प्रकट करने लगे हैं. इसके अलावा युवाओं के लिए कुशल युवा कार्यक्रम, स्वयं सहायता भत्ता के साथ ही पांच नये मेडिकल कॉलेज, हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज, पारा मेडिकल संस्थान, महिला आई०टी०आई०, हर सब डिविजन में आई०टी०आई० और ए०एन०एम० संस्थान स्थापित किये जा रहे हैं. आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, चाणक्य विधि विश्वविद्यालय और चन्द्रगुप्त प्रबंधन संस्थान के बाद पूर्णिया, मुंगेर और पाटलिपुत्र तीन नये विश्वविद्यालय बनाये गये. उन्होंने कहा कि आर्यभट्ट ज्ञान यूनिवर्सिटी कोई नॉर्मल यूनिवर्सिटी नहीं है बल्कि यह नॉलेज यूनिवर्सिटी है. इस विश्वविद्यालय का नाम आर्यभट्ट के नाम पर है इसलिए अब इसमें एस्ट्रोनॉमी पर रिसर्च होगा ताकि नाम बेकार न जाए. उन्होंने कहा कि जो भी हमारा गौरवशाली इतिहास है, उन एक-एक चीज पर हमारा ध्यान है. बिहार ज्ञान की भूमि रही है और ज्ञान की इस भूमि पर यदि हमारे बच्चे पढ़ नहीं पाए तो यह हमारे लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा.

बच्चों से अपील करते हुए मुख्यमंत्री कुमार ने कहा कि खूब पढ़ें, आगे बढ़ें और अपने बुजुर्गों का सम्मान करें. पढ़-लिखकर बड़े होने के बाद माता-पिता का हमेशा ख्याल रखियेगा क्योंकि अब कानून भी बन गया है और जो अपने बुजुर्गों का सम्मान नहीं करेगा, उसे दंडित होना पड़ेगा. शिक्षकों से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि आप अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करते रहेंगे तो समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और नई पीढ़ी आगे बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि समाज में प्रेम, भाईचारा और सद्भाव का माहौल कायम रखेंगे तो बिहार के गौरवशाली इतिहास को हम पुनः प्राप्त करने में कामयाब हो सकेंगे.

समारोह को शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, मुख्य सचिव दीपक कुमार एवं शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री आर०के० महाजन ने भी संबोधित किया.

इस अवसर पर पटना के प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, विशेष सचिव शिक्षा विभाग सतीश चन्द्र झा, बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक संजय सिंह, निदेशक माध्यमिक शिक्षा  गिरिवर दयाल सिंह सहित अन्य पदाधिकारीगण, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं.