शलजम…

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शलजम को बहुत कम कैलोरी वाले सब्जी के रूप में जाना जाता है. फोटो:-गूगल.

जाड़े के मौसम में आप सभी ने शलजम को देखा होगा. इसकी जड़ गांठनुमा या यूँ कहें कि, मोटी होती है, जिसे पकाकर या कच्चा भी खाया जाता है. शलजम को अंग्रेजी में Turnips कहते हैं और इसका वानस्पतिक नाम Brassica rapa (ब्रेसिका रापा) है और यह ‘क्रुसीफेरी‘ कुल का पौधा है. शलजम के बारे में कुछ लोग इसे रूस या उतरी यूरोप के पौधे मानते हैं लेकिन, वर्तमान समय में यह पृथ्वी के प्राय: समस्त भागों में उगाया जाता है. इसकी जड़ें लंबी, कुछ गोलाकार, कुछ चिपटी और कुछ प्याले के आकार की होती हैं जबकि, कुछ अन्य किस्मों के शलजम के गुद्दे सफेद और कुछ के पीले होते हैं.

आमतौर पर शलजम को बहुत कम कैलोरी वाले सब्जी के रूप में जाना जाता है. इसे एंटी-ऑक्‍सीडेंट, मिनरल और फाइबर का बहुत अच्‍छा स्रोत माना जाता है. वास्तव में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों का भंडार होता है शलजम. इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, कैरोटीनॉयड और ल्‍यूटीन का समृद्ध स्रोत होता है. इसके अलावा इसमें कैल्शियम, कॉपर, आयरन और मैंगनीज भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है. शलजम को खाने से शरीर के इम्‍यूनिटी को बढ़ाता है साथ ही हानिकारक फ्री रेडिकल्‍स, कैंसर और सूजन से शरीर की रक्षा करता है. शलजम की पत्तियों में विटामिन “के” प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिसका प्रयोग साग के रूप में किया जाता है.

शलजम को शीतकालीन पौधे के रूप में जाना जाता है. इसके पौधे अधिक गरमी को सहन नहीं कर सकते हैं. इसके पौधे लगभग 18 इंच ऊँचे और फलियाँ एक से डेढ़ इंच लंबी होती हैं. इसके फूल पीले या हलके नारंगी रंग के होते हैं. वर्ष में दो बार शलजम की खेती की जाती है. पहली बार इसे सावन में और दूसरी बार फरवरी से जून के आरम्भ में बोया जाता है. इसकी खेती के लिए खेतों की जुताई गहरी होती है और इसके बीज को आधे इंच की गहराई पर बोया जाता है. बरसात के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती होती है जबकि, अन्य मौसम में 08-10 दिनों में सिंचाई आवश्यक होती है. भारत में शलजम की पैदावार प्रति एकड़ 200 मन होती है.

शलजम के फायदे….

  • शलजम में एंटीऑक्सिडेंट, ग्लूकोसाइनोलेट्स और फाइटोकेमिकल्स प्रचुर मात्रा में पाए जाने के कारण यह कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करता है. यह स्तन कैंसर के साथ-साथ मलाशय और ट्यूमर को भी कम करने में मदद करता है.
  • शलगम को पानी में उबालकर उसके पानी को छानकर पीने से दमा, खांसी और गला बैठने का रोग ठीक हो जाता है.
  • अक्सर लोगों की एडियाँ फट जाती है और फटी एडियाँ बहुत ही परेशान करती है. इस समस्या को दूर करने के लिए आप शलगम को उबालकर इसके पानी से फटी हुई एड़ियों को धोकर उसके बाद उन पर शलगम रगड़े और फटी हुई एड़ियों पर साफ कपड़ा लपेटकर रात में सो जाएं. कुछ दिनों तक यह प्रयोग करने से आपकी एडियाँ ठीक होकर मुलायम हो जाती है.
  • कच्चे शलजम को सलाद के रूप में खाने से दस्त भी ठीक हो जाते हैं.
  • शलजम को खाने से हार्ट अटैक, हार्ट स्‍ट्रोक और हृदय रोगों को रोकने में मदद करता है.
  • अगर आप डायबिटीज की बीमारी से परेशान हैं तो आपको प्रतिदिन की डाईट में शलजम का प्रयोग करना चाहिए.
  • अक्सर लोगों को पेशाब रुक-रुककर होती है इस समस्या को दूर करने के लिए शलजम और कच्ची मुली को काटकर खाना चाहिए.
  • शलजम स्वस्थ हड्डियों के विकास और रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण होता हैं. इसके नियमित सेवन से हड्डियों के टूटने, ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे और रुमेटी गठिया की समस्‍याओं को रोका जा सकता है.
  • वर्तमान समय में सिगरेट का प्रयोग आमतोर पर लोग करते है जिसके कारण फेफड़े की समस्याएं हो जाती है. लेकिन शलजम के नियमित प्रयोग से फेफड़े को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है.