शरीफा या सीताफल….

शरीफा या सीताफल….

23
0
SHARE
इसके फल देखने में दिल आकार के होते हैं और इस फल का नाम है सीताफल या शरीफा. फोटो:-गूगल.

एक ऐसे फल के बारे में बात कर रहें है जो आयुर्वेदिक ग्रन्थों के अनुसार, यह फल एक औषधि है और यह कई बीमारियों को ठीक करने की क्षमता रखता है. इसके फल देखने में दिल आकार के होते हैं और इस फल का नाम है सीताफल या शरीफा. जिसे अंग्रेजी में शुगर एप्पल या कस्टर्ड एप्पल के नाम से जानते हैं. सीताफल या शरीफा का वानस्पतिक नाम एनोना रेटिकुलता (Annona reticulate). बताते चलें कि, इसकी एक और किस्म होती है, जिसे रामफल कहते हैं साथ ही इसकी तीसरी प्रजाति का नाम लक्ष्मणफल है.

आयुर्वेदिक ग्रन्थों के अनुसार, सीताफल शीतल, पित्तशामक, कफ एवं वीर्यवर्धक, तृषाशामक, पौष्टिक, तृप्तिकर्ता, मांस एवं रक्तवर्धक, उलटी बंद करने वाला, बलवर्धक, वातदोषशामक एवं हृदय के लिए लाभकारी होता है. विज्ञान के अनुसार, सीताफल में कैल्शियम, लौह तत्त्व, फासफोरस, विटामिन – थायमीन, राईबोफ्लेविन एवं विटामिन सी, कैल्शियम, कॉपर, जिंक, पोटाशियम, फास्फोरस, मैंग्निज, मैग्नीशियम, लौह, फलोराइड सोडीयम और सेलेनियम पाए जाते हैं.

इसका फल गोलाकार, छोटी-छोटी गोल कृतिवाली, बाहर से उभरी हुई पेशियों के कारण मनोहर कलाकृति के समान लगता है. फलों के ऊपर हरे छिलके होते हैं जो अत्यन्त ही ठंडा होता है और इसके फल में अनेक बीज काले और चिकने होते हैं. इसकी पत्तियां गहरे हरे रंग की होती है. जिसमें एक विशेष महक होने की वजह से कोई जानवर इसे नहीं खाते हैं. सीताफल के पेड़ को लगाने के बाद विशेष देखभाल की जरूरत नहीं होती है सबसे ख़ास बात यह है कि, इसके पौधों पर हानिकारक कीड़े एवं बीमारियाँ भी नही लगते हैं.

शरीफा या सीताफल के पौधे लगभग सभी प्रकार के भूमि में पनप जाते हैं परन्तु अच्छी जल निकास वाली दोमट मिट्टी इसकी बढ़वार एवं पैदावार के लिये उपयुक्त होती है. कमजोर एवं पथरीली भूमि में भी इसकी पैदावार अच्छी होती है. शरीफा के पौधे के लिये गर्म और शुष्क जलवायु वाले क्षेत्र जहाँ पाला नहीं पड़ता है, अधिक उपयुक्त होता है. बताते चलें कि, भारत में सबसे ज्यादा शरीफा की उपज झारखंड और मध्यप्रदेश में होती है. शरीफा की किस्में स्थान, फलों के आकार, रंग, बीज की मात्रा के आधार पर वर्गीकृत किये गये है. बीज द्वारा प्रसारित होने के कारण अभी तक शरीफा की प्रमाणिक किस्मों का अभाव है.

शरीफा या सीताफल के पौधे को लगाने का सबसे उपयुक्त महीना जुलाई का होता है. बताते चलें कि, शरीफा का बीज जमने में काफी समय लगता है अत: बोने से पहले बीजों को 3-4 दिनों तक पानी में भिगा देने पर जल्दी अंकुरण हो जाता है. इसके बाद ही पौधे को लगाएं. शरीफा के पेड़ में प्रत्येक वर्ष फलन होती है अत: अच्छी पैदावार के लिये उचित मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद एवं रासायनिक उर्वरक देनी चाहिये. पौधा लगाने के बाद से पौधे की नियमित रूप से देखभाल की जानी चाहिये. पौधों में जुलाई-अगस्त में खाद एवं उर्वरक प्रयोग तथा आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहना चाहिये.

सीताफल में भरपूर मात्र में विटामिन सी पाया जाता है, इसके अलावा इसमे विटामिन ए भी पाया जाता है जो त्वचा और बालों के लिए उपयोगी होता है. इसमे मैग्नीशियम भी पाया जाता है जो हृदय रोगों से रक्षा करता है साथ ही मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद करता है. इसमें भरपूर मातर में विटामिन बी6 और पोटेशियम भी पाया जाता है. इसके फल में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो पेट के रोगियों के लिए उत्तम होती है. सीताफल शीतलक, उत्तेजक और एक्षपेक्टोरांटस के रूप में काम करता हैं इसका फल एनीमिया के रोगियों के लिए बहुत ही उपयोगी होता है. सीताफल के पेड़ कि छाल मे जो स्तंभक और टैनिन होता है वह दवाओं को बनाने में प्रयोग किया जाता है. इसके पेड़ के पत्तों को कैंसर और ट्यूमर जैसी बीमारी के उपचार के लिए अच्छा माना जाता हैं. इसकी छाल मसूडो और दातो के दर्द को कम कर करने मे इस्तेमाल की जा सकती हैं.

सीताफल खाने से वजन बढ़ता है. गर्भ में पल रहे भ्रूण के मस्तिष्क, स्नायुओं की प्रणाली और प्रतिरोधक प्रणाली के विकास में मदद करता है. गर्भावस्था के दौरान सीताफल का रोज़ाना सेवन करने से गर्भपात की सम्भावना काफी कम होती है. इसमें विटामिन बी -6 भी पाया जाता है जिससे ब्रोन्कियल सूजन और दमा के रोगियों को बहुत ही फायदा करता है. सीताफल मे मैग्नीशियम भी पाया जाता है जो हृदय का दौरा पड़ने पर दिल की रक्षा करता है और मांसपेशियों को आराम दिलाता हैं साथ ही विटामिन बी-6 दिल की बीमारियों के जोखिम को कम करने के लिए मदद करता है. इसके फल खाने से ब्लड प्रेशर के रोगियों का ब्लड प्रेशर समान्य रखने में मदद करता है. इसके फल में कॉपर भी होता है जो आपके शरीर में हेमोग्लोबिन के उत्पादन में सहायक होता है.

सीताफल में मैग्नीशियम भी पाया जाता है जो, गठिया और जोड़ों के दर्द के आराम देता है. यह शरीर में पानी की मात्रा को नियंत्रित करता है और जोड़ों से विषैले पदार्थ निकालता है। यह मांसपेशियों की कमज़ोरी को भी दूर करने में सक्षम होता है. इसके फल खाने से मस्तिष्क को ठंडा रखता है और तनाव, चिंता तथा चिड़चिड़ेपन को दूर करता है सीताफल में मौजूद डाइटरी फाइबर की वजह से शरीर के चीनी सोखने की क्षमता घट जाती है. जिससे मधुमेह का ख़तरा टल जाता है.

सीताफल के बीज को बकरी के दूध के साथ पीसकर लेप करने से सिर के उड़े हुए बाल शीघ्र ही उग आते हैं और मस्तिष्क में ठंढक पहुंचती है. सीताफल के बीजों को महीन चूर्ण बनाकर पानी से लेप तैयार कर रात को सिर में लगाएं एवं सबेरे धो लें. 02-03 दिन ऐसा करने से जुएं समाप्त हो जाती हैं.

नोट:- सीताफल के बीज से निकलने वाला तेल विषला होता है, इसलिए बालों में इसका लेप लगाते समय आंख को बचाकर रखना चाहिये. सीताफल गुण में अत्यधिक ठंडा होने के कारण ज्यादा खाने से सर्दी होती है. जिनकी कफ-सर्दी की तासीर हो वे सीताफल का सेवन न करें.

इसके अलावा यह केशवर्द्धक भी होता है और कई बीमारियों में इसके फल का प्रयोग किया जाता है. सीताफल का प्रयोग मिल्कशेक और आइसक्रीम बनाने में इस्तेमाल किया जाता है जबकि, इसके बीजों कला उपयोग साबुन और पेंट बनाने में प्रयोग होता है.