विश्व मलेरिया दिवस…

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मलेरिया एक प्रकार के परजीवी प्लाजमोडियम से फैलने वाला रोग है, जिसका वाहक मादा एनाफिलीज मच्छर होता है.फोटो:-गूगल.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाता है. विश्व मलेरिया दिवस की स्थापना मई 2007 में 60वें विश्व स्वास्थय सभा के सत्र के दौरान की गई थी. विश्व मलेरिया दिवस की स्थापना से पूर्व 25 अप्रैल 2001 से मनाये जाने वाले अफ्रिका मलेरिया दिवस के 01 वर्ष पश्चात अबुजा में घोषणा की गई थी. पूरी दुनिया में लगभग 106 देश हैं और इन देशों की आबादी करीब 07.52 अरब है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, 2017 में पूरी दुनिया मलेरिया के कुल मामलों में से 80 प्रतिशत मामले भारत और 15 प्रतिशत सहारा (अफ्रीकी) देशों से थे जबकि 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मलेरिया के मामलें में 24 प्रतिशत की गिरावट आई है लेकिन, ओड़िसा, महारष्ट्र समेत कुछ अन्य राज्यों में अभी सफलता के बड़े प्रयासों की जरूरत है.

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 1.25 अरब लोग इस मच्छर जनित बीमारी की चपेट में आने की कगार पर खड़े थे. पूरी दुनिया में मलेरिया के करीब आधे मामले पांच देशों से सामने आए जिनमें नाइजीरिया (25 प्रतिशत), कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (11 प्रतिशत), मोजाम्बिक (05  प्रतिशत) और भारत एवं युगांडा से चार-चार प्रतिशत मामले देखे गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, मलेरिया से हर साल लगभग 660,000 लोगों की जान चली जाती है.

मलेरिया एक ऐसी बीमारी है जो मलेरिया मच्छरों से फैलती है. मलेरिया मच्छर जब मानव के शरीर के सम्पर्क में आते हैं तो मानव को बहुत तेज बूखार (पसीना, ठंड और कँपकँपी, सिरदर्द, माँसपेशियों में दर्द, थकान, जी मचलना, उल्टी, दस्त) आने लगता है.

मलेरिया एक प्रकार के परजीवी प्लाजमोडियम से फैलने वाला रोग है, जिसका वाहक मादा एनाफिलीज मच्छर होता है. जब संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर किसी व्यक्ति को काटती है तो उसके खून की नली में मलेरिया के रोगाणु फैल जाते हैं. संक्रमण फैलने से उसमें मलेरिया के लक्षण दिखाई देने लगते हैं.

यह रोगाणु मानव के लीवर की कोशिकाओं में पहुंच कर लाल रक्‍त कोशिकाओं पर हमला करती है जिसके कारण कोशिका टूटने लगती है. दूसरी तरफ लीवर में रोगाणुओं की संख्या लगातार बढती रहती है.

बताते चलें कि, मादा मच्छर ही इंसान को काटती है जबकि नर मच्छर कभी नहीं काटता, मादा मच्छर को अंडे पैदा करने के लिए प्रोटीन की जरुरत होती है इसलिए खून चूसती है. मादा मच्छर एक बार खून चूसने के बाद लगभग 02 दिनों तक आराम करते हैं. मादा मच्छर एक बार में करीब 300 से ज्यादा अंडे देती है, अंडे से निकलने के बाद मच्छर अपने शुरुआती 10 दिन पानी में ही बिताते हैं.

मलेरिया से बचाब कैसे करें…

  • घर के अंदर व बाहर मच्छर मारने वाली दवाई छिड़कें.
  • पानी इकठ्ठा नहीं होने दें. पानी इकठ्ठा होने से मच्छर के पनपने का खतरा होता है.
  • जहां झाडियां हो वहां नहीं जाना चाहिए चुकिं, वहां बहुत मच्छर होते हैं.
  • हल्के रंग के पुरे कपड़े पहनना चाहिए.
  • घर के दरवाजों और खिड़कियों पर जाली लगवाएं.
  •  सोने के समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए.
  • अगर आपको मलेरिया हो जाय तो तुरंत ही चिकित्सक से मिलना चाहिए.