विश्व जल दिवस…

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दुनिया के कई देशों में आज भी 80 प्रतिशत पानी को यूँ ही बर्बाद हो जाता है केवल 20 प्रतिशत पानी का प्रयोग किया जाता है.फोटो:-गूगल.

आज पुरे विश्व में ‘विश्व जल मनाया जा रहा है. दुनिया के कई देशों में पानी की कमी से सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है. यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल इथोपिया में 09 मिलियन लोगों को पेय जल नहीं मिला. दूसरी तरफ दुनिया के कई देशों में आज भी 80 प्रतिशत पानी को यूँ ही बर्बाद हो जाता है केवल 20 प्रतिशत पानी का प्रयोग किया जाता है.

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2050 तक पानी की बेहद कमी हो जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2001 में प्रति व्यक्ति 1,820 क्यूबिक मीटर पानी था जो घटकर 2011 में 1,545 क्यूबिक मीटर हो गया है. आने वाले समय में इसका औसत और कम ही हो जाएगा. उम्मीद की जारही है कि, वर्ष 2050 तक यह घटकर 1,140 क्यूबिक मीटर हो जाएगा.

बताते चलें कि, विश्व जल दिवस के अवसर पर यूनिसेफ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित कर कहा है कि, दो दशक के भीतर ही दुनिया के 600 मिलियन बच्चे ऐसे क्षेत्रों से होंगें जहां पानी की बेहद ही कमी होगी. संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी देते हुए कहा है कि, वर्ष 2040 तक पूरी दुनिया में जल  की कमी इतनी ज्यादा हो जाएगी कि, 04 में से एक बच्चे को पानी नहीं मिलेगा.

एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर भारत में पहले से जल संकट बना हुआ है इसका मुख्य कारण है भूजल की बेहद कमी का होना. कई ऐसे राज्य हैं जहाँ जल की स्थिति बेहद ही खतरनाक और गंभीर बनी हुई है. दूसरी तरफ मध्य और दक्षिन भारत में आने वाले समय में जल का संकट और ज्यादा ही हो सकता है. वहीं दूसरी तरफ, नदियों में गंदे व प्रदूषित जल बढ़ जाएगी.

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसन्धान परिषद (CSIR) के निदेशक ने कहा है कि, प्रदूषण की समस्या न केवल सतह जल संसाधनों में है बल्कि भूजल में भी है. निदेशक के अनुसार, जल के खराब होने का कारण है जल में धातु के प्रदूषित पदार्थ का शामिल होना. दूसरा बड़ा कारण है कि, खुले जमीन पर कूड़ा या खराब पदार्थों की डंपिंग करना साथ ही खुले में शौच करना करना. तीसरा बड़ा कारण है कि, कल- कारखानों से निकलने वाला अपशिष्ट पदार्थ को नदी-नालों में बहा देना या खुले जमीन पर डंप करना. इन्ही कारणों से भूजल ज्यादा प्रदूषित होता है.

बताते चलें कि, दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी भारत में है और विश्व का 04 प्रतिशत साफ  पानी ही इस देश में है.

  • देश के करीब 01 करोड़ लोगों तक अब तक साफ़ पानी नहीं पहुंच पाया है.
  • 2011 के जनसंख्या आकंड़ों के अनुसार, भारत में 20 प्रतिशत घर ऐसे हैं जिन्हें पीने योग्य पानी के लिए आधा से एक किलोमीटर जाना होता है.
  • सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के कई शहरों में जल प्रबन्धन के कोई नियम-कानून नहीं है. पाइप लीकेज की समस्या के कारण जलापूर्ति का एक-तिहाई से ज्यादा हिस्सा यूँ ही व्यर्थ हो जाता है.