विचार…

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21वीं सदी है और विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली है पर... सुकून, शान्ति और आपसी प्रेम हमसभी से दूर हो गये हैं. फोटो:-गूगल

देश के बुजुर्ग देश के युवाओं-बच्चों को किस दिशा में ले जा रहें हैं, इस बात का अंदाज वो भी नहीं लगा सकते. जिस देश में सभ्यता-संस्कृति की बातें तो की जाती हैं पर उसे अमल में नहीं लाया जाता है. पुस्तक या ग्रन्थ की बातें……… पुस्तक या ग्रन्थ में ही शोभा होती है निजी व समाजिक जीवन में इसका उपयोग ना के बराबर होता है. हम सभी सिर्फ बातें ही करते हैं पर काम करने कि बात आये तो टाल देते हैं, मुंह फेर लेते हैं….. करते हैं तो सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें….?

पुरातन धर्म ग्रन्थों के अनुसार भारत देश का इतिहास जितना पुराना और अलौकिक है कि आज तक हमसभी उन रहस्यों को जान नहीं पायें हैं? अगर कुछ रहस्यों के बारे जानकारी है भी तो पूर्ण नहीं है. इन रहस्यों को जानने के लिए कई देशों के वैज्ञानिक आजतक रिसर्च कर रहें हैं. बतातें चलें कि, 19वीं सदी तक प्राय: इस देश में लोग संयुक्त परिवार में रहते थे और सुख-दुःख के साथी भी हुआ करते थे. आज 21वीं सदी है और विज्ञान ने काफी तरक्की कर ली है पर… सुकून, शान्ति और आपसी प्रेम हमसभी से दूर हो गये हैं.

21वीं सदी में लालच, झूठ और भ्रष्टाचार का बोलबाला है, अपने-अपने नहीं पराये होते हैं या यूँ कहें कि स्वार्थ से वशीभूत होकर अपने बनने की कोशिस करते हैं. धर्म ग्रन्थों के अनुसार, जीवन की चार अवस्थाये होती है लेकिन, 21वीं सदी में बुजुर्गों को युवाओं की संज्ञा दी जाती है और हमारे युवा-बुजुर्ग घूम-घूमकर, जोर-जोर से हल्ला कर गाली-गलौज, मार-पिट या ओल्ह्न्ना देते फिरते हैं….. ये है 21वीं सदी का भारत….. जिसके इतिहास का कभी डंका बजा करता था? एक वो समय था…. एक समय ये भी है, जिसमे अपने पराये हो गये और पराये अपने…?

इस देश की संस्कृति और इतिहास को वर्तमान समय में लोग आधुनिकता के आलम में भूल गये या भूलने की कोशिस करते हैं. एक वो समय था जब इस देश में साक्षरता दर 100 प्रतिशत थी और शिक्षा के लिए बच्चे-युवा माता-पिता से दूर रहकर पढाई करते थे लेकिन वर्तमान समय में शिक्षा पाकेट में आ गई है और शिक्षित कि संख्या नगण्य है…… पढ़े-लिखे घर में और अशिक्षित धंधे पर …? क्या देश के बुजुर्ग ये बता सकते हैं कि युवाओं और बच्चों की दिशा क्या होगी?