वासंती नवरात्रि…

वासंती नवरात्रि…

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इन्द्रियों में स्वच्छता और अनुशासन स्थापित करने के लिए ‘नौ’ द्वारों की शुद्धि का महापर्व ‘नौ’ दिनों तक मनाया जाता है.

   रक्ष रक्ष महादेवि दुर्गे दुर्गतिनाशिनि। मां भक्त मनुरक्तं शत्रुग्रस्तं कृपामयि॥

हिन्दू पंचांग के अनुसार, वर्ष का नया महीना चैत माना गया है. यह महीना बड़ा ही पावन और पवित्र माना गया है. ज्ञात है कि, चित्रा नक्षत्र के कारण इस महीने का नाम चैत पड़ा. चैत के इस महीने में वसंत ऋतु होती है.वसंत की शुरुआत और शरद की शुरुआत जलवायु और सूरज के प्रभावों का महत्वपूर्ण संगम माना जाता है. माँ भगवती की पूजा आराधना चैत और आश्विन महीने में बड़े धूमधाम से की जाती है. वसंत ऋतु होने के कारण चैत नवरात्र को वासंती नवरात्र भी कहते हैं. वासंती नवरात्र में देवी अंबा विद्युत का प्रतिनिधित्व करती है.

संस्कृत का शब्द है नवरात्रि जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’. नौ रात्रियों का वैदिक साहित्य में बड़ा ही सुंदर वर्णन किया गया है. नवरात्री का संधि होता है नव+रात्रि. जिसमे ‘नव’ का अर्थ होता है ‘नया’ और ‘रात्रि’ का अर्थ होता है ‘अंधकार’. नवरात्र को आसान शब्दों में कहें तो,जब दो ऋतुओं का मिलन होता है तो इस काल को संधि काल कहते हैं. इस संधि काल में ब्रह्मांड से असीम शक्तियाँ या यूँ कहें कि, ऊर्जा प्रथ्वी पर पहुंचती है जिससे शारीरिक बीमारियाँ बढती है और इन बीमारियों से बचाव हेतु या यूँ कहें कि, शरीर को शुद्ध रखने के लिए, स्वस्थ रहने के लिए और तन-मन को निर्मल बनाए रखने की प्रक्रिया को ही नवरात्र के नाम से जानते हैं.

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, मानव शरीर में नौ मुख्य द्वार होते हैं. इन द्वारों में मुख्य द्वार होता है ‘इन्द्रिय’. इन्द्रियों में स्वच्छता और अनुशासन स्थापित करने के लिए ‘नौ’ द्वारों की शुद्धि का महापर्व ‘नौ’ दिनों तक मनाया जाता है. इस दौरान व्रत पालन, सात्विक आहार, शरीर की शुद्धि, उत्तम विचार और उत्तम कर्मों से मन शुद्ध और निर्मल होता है.

नवरात्रि के नौ रातों में त्रिदेवियों (महालक्ष्मी, महासरस्वती,और दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है जिन्हें नवदुर्गा भी कहा जाता है. इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति या यूँ कहें कि, देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि के पहले तीन दिन देवी दुर्गा या यूँ कहें कि, ऊर्जा या शक्ति की आराधना की जाती है. जिसमें पहले दिन बालिका की पूजा, दुसरे दिन युवती की पूजा और तीसरे दिन वैसी महिला जो परिपक्वता के चरण में पहुंच गयी है उसकि पूजा की जाती है. नवरात्रि के चौथे से छठे दिन ‘लक्ष्मी- समृद्धि और शांति की देवी’ की आराधना की जाती है. सातवें दिन ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती की आराधना की जाती है. आठवें दिन एक यज्ञ किया जाता है और नवमें दिन जिस महानवमी के नाम से भी जाना जाता है इस दिन दिन कन्या पूजन होता है.

वासंती नवरात्र के नवमे दिन भगवान हनुमान की पूजा भी की जाती है और इस दिन को रामनवमी के नाम से भी जानते है. रामनवमी के दिन हनुमान की पूजा का रहस्य यह है कि, भगवान श्रीराम लंका पर चढाई और रावण के वध हेतु माँ चंडी की पूजा ‘ब्रह्माजी’ के बताए अनुसार चंडी पूजन और हवन हेतु दुर्लभ एक सौ आठ नीलकमल की व्यवस्था की गई. वहीं दूसरी ओर रावण ने भी अमरता के लोभ में विजय कामना से चंडी पाठ प्रारंभ किया. यह बात इंद्र देव ने पवन देव के माध्यम से श्रीराम के पास पहुँचाई और परामर्श दिया कि चंडी पाठ यथासभंव पूर्ण होने दिया जाए. इधर हवन सामग्री में पूजा स्थल से एक नीलकमल रावण की मायावी शक्ति से गायब हो गया और राम का संकल्प टूटता-सा नजर आने लगा.

तब भगवान राम को सहज ही स्मरण हुआ कि मुझे लोग ‘कमलनयन नवकंच लोचन’ कहते हैं, तो क्यों न संकल्प पूर्ति हेतु एक नेत्र अर्पित कर दिया जाए और प्रभु राम जैसे ही तूणीर से एक बाण निकालकर अपना नेत्र निकालने के लिए तैयार हुए, तब देवी ने प्रकट हो, हाथ पकड़कर कहा- राम मैं प्रसन्न हूँ और विजयश्री का आशीर्वाद दिया. वहीं रावण के चंडी पाठ में यज्ञ कर रहे ब्राह्मणों की सेवा में ब्राह्मण बालक का रूप धर कर हनुमानजी सेवा में जुट गए. निःस्वार्थ सेवा देखकर ब्राह्मणों ने हनुमानजी से वर माँगने को कहा. इस पर हनुमान ने विनम्रतापूर्वक कहा- प्रभु, आप प्रसन्न हैं तो जिस मंत्र से यज्ञ कर रहे हैं, उसका एक अक्षर मेरे कहने से बदल दीजिए. ब्राह्मण इस रहस्य को समझ नहीं सके और तथास्तु कह दिया. मंत्र में जयादेवी… भूर्तिहरिणी में ‘ह’ के स्थान पर ‘क’ उच्चारित करें, यही मेरी इच्छा है.

नवरात्री के आखरी दिन विजयोत्सव मनाते है चुकीं हम तीन गुणों के त्रिगुनातित अवस्था में पहुंच जाते हैं या यूँ कहें कि, काम, क्रोध, मोह और लोभ आदि जितने भी राक्षसी प्रवृतियाँ है उसका हनन कर विजयोत्सव मनाते हैं.

 

                                                                  अरविन्द कुमार शर्मा…