वायरल फीवर…

वायरल फीवर…

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जब भी मौसम बदलता है और तापमान में उतार-चढ़ाव होने के कारण शरीर का इम्यूनटी सिस्टम कम हो जाता है जिससे शरीर जल्दी ही वायरस से संक्रमित हो जाता है.

मौसम के बदलने के साथ ही जिन लोगों का इम्यूनटी सिस्टम कमजोर होता है उन लोगों को वायरल फीवर होता है, या यूँ कहें कि,जब भी मौसम बदलता है और तापमान में उतार-चढ़ाव होने के कारण शरीर का इम्यूनटी सिस्टम  कम हो जाता है जिससे शरीर जल्दी ही वायरस से संक्रमित हो जाता है. देखा जाय तो, वायरल फीवर के लक्षण अन्य आम बुखार के तरह ही होते हैं, मगर इसको नजर अंदाज करने पर स्थिति गंभीर हो जाती है. डॉ० बिमलेश कुमार कहते हैं कि बुखार होने की अवस्था में गले में दर्द, थकान व खाँसी होता है. डॉ० कुमार कहते हैं कि, वायरल फीवर अपने ख़ास लक्ष्णों के कारण पहचान में आता है जैसे कमजोरी, मांसपेशियो और बदन में दर्द, तेज बुखार, खांसी, जोड़ो में दर्द, दस्त, त्वचा के ऊपर रैशज़, सर्दी, गले में दर्द, सर दर्द और आंखों में लाली और जलन का अनुभव…

उपचार:-
सूखे अदरक का मिश्रण:-  सूखा अदरक, एक छोटा चम्मच हल्दी और एक छोटा चम्मच काली मिर्च का पावडर और थोड़ा-सा चीनी एक कप पानी में डालकर तब तक उबालें, जब तक की सुखकर आधा न हो जाये. दिन में चार बार इस काढ़े को पीने से बुखार में राहत मिलता है.

तुलसी:-  बीस ताजा तुलसी के पत्तों को एक लीटर पानी में एक चम्मच लौंग पावडर डालकर तब तक उबालें जब तक कि वह सुख कर आधा न हो जाये, इसके बाद मिक्ष्रन को छानकर हल्का ठंडा कर लें. दो- दो घंटे के अंतराल पर इसे पीयें.

मेथी का जल:-  एक कप पानी में एक बड़ा चम्मच मेथी के दाने रात भर भिगोकर रखें. अगले दिन सुबह इसको छानकर निश्चित अंतराल में इसका सेवन करें. सुबह मेथी के दाने, नींबू का रस और शहद के मिश्रण का सेवन करने से भी कुछ हद तक बुखार से राहत मिलता है.

धनिया की चाय:- एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच धनिया के दाने डालें और उसको थोड़ा उबाल लें, उसके बाद कप में छानकर स्वाद के अनुसार थोड़ा-सा दूध और चीनी मिलाकर पीने से बुखार में राहत मिलता है.

सोआ का काढ़ा:-  एक कप पानी में एक बड़ा चम्मच सोआ के दाने, एक छोटा चम्मच काली मिर्च और एक छोटा चम्मच कलौंजी डालकर दस मिनट तक उबालें, उबालने के बाद एक कप में छान लें और उसमें एक चुटकी दालचीनी का पावडर डालकर अच्छी तरह से मिला लें. इस काढ़ा को धीरे-धीरे पियें, बुखार से राहत मिलेगी.

राइस स्टार्च:- उपचार का यह तरीका बहुत ही पुराना है, यह शरीर से विषाक्त पदार्थ को निकालने में मदद करता है. जिससे प्रतिरक्षी तंत्र को वायरस से लड़ने में मदद मिलती है. राइस स्टार्च पौष्टिकता से भरपूर होता है, इसलिए इसके सेवन से रोगी को शक्ति मिलती है.

 

डॉ० बिमलेश कुमार (खगौल)…