वनस्पति विज्ञान से संबंधित(05)…

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फोटो:-गूगल

पौधों के कितने भाग होते हैं? = पोधें के मुख्यतः पांच भाग होते हैं (जड़, तना,पत्तियां, फूल और फल.

मूलरोम किसे कहते हैं? = पेड़ों की जड़ों की सतह पर जो रोएँ से दिखाई देते है उन्हें मूलरोम    कहते हैं.

पादप समुदायों का वर्गीकरण? = मुख्य रूप से तीन प्रकार के वर्गीकरण करते हैं(पादपी (Floristic), रूपात्मक (Physiognomic) और गतिकी (Dynamic).

वृक्ष रेखा क्या होती है? = अल्पाइन अनुक्षेत्र में 3500 मीटर से अधिक ऊँचाई पर वृक्ष नहीं मिलते हैं अतः इसे वृक्ष-रेखा (timberline) कहते हैं.

पादप और उससे प्राप्त एल्कोलाईड्स के नाम? =

सिनकोना (Cinchona) = कुनैन, क्वीनीडीन, सिन्कोनीन, सिन्कोनीडीन, सिन्कोटीन, जावानीन, हाइड्रोक्वीनीन, कस्मोनीन, कस्केमीन, कस्केमीडीन, क्वीनिसीन, क्वीनामीन आदि.

सर्पगंधा (Sarpagandha) = रिसर्पिनीन, सर्पेन्टाइन, रेसिनेमिन, रिसर्पडिईन, रावाल्फिनिन, एजमेलन, एजमेलिसिन, एजमेलिनिन, आइसोएजमेलिन, योहिम्बीन आदि.

मरुभिद् किसे कहते है? = शुष्क आवासों या मरु प्रदेशों में पाये जाने वाले पेड़-पौधों को मरुभिद् कहते हैं. मरुदभिद् पौधों में जलाभाव या शुष्कता के प्रति सहिष्णुता या इसे सहन करने की अद्भुत क्षमता पाई जाती है. शिम्पर (Schimper 1898) के अनुसार व पादप जो कि जलाभाव (drought) की परिस्थितियों में अपनी वाष्पोत्सर्जन क्रिया को मंद करने की क्षमता रखते हैं, उनको मरुभिद् कहा जाता है जबकि, जेन्टेल (Gentel 1946) के अनुसार मरुभिद् शुष्क आवासों में उगने वाले पौधे होते हैं जो अपनी विशिष्ट आंतरिक संरचना एवं कार्यिकीय विशेषताओं के कारण मृदा एवं वायुमण्डल की शुष्क परिस्थितियों को सहन करने में सक्षम होते हैं.

मूल (Root) किसे कहते हैं? = मरुभिद् पौधे प्रायः शुष्क या जलाभाव वाले स्थानों में पाये जाते हैं. इसलिए इनका मूल तंत्र अधिकाधिक जल का अवशोषण करने के लिए अत्यधिक विकसित एवं गहरा होता है. जड़ें प्राय मूसला मूल (tap root) प्रकार की होती हैं, जो : जमीन में बहुत अधिक गहराई तक जाती है. जड़ों में मूल रोम एवं मूल गोप (root cap) सुविकसित होते हैं, जिससे जड़े अधिकाधिक मात्रा में जल का अवशोषण कर सकती है.

स्तंभ (Stem):- मरुदभिदी पौधों के तनों में अनेक प्रकार के अनुकुलन लक्षण पाये जाते हैं, क्योंकि पौधे का यह भाग वातावरण के सीधे सम्पर्क में होता है. अधिकांश मरुभिद पादप काष्ठीय होते हैं। ये बहुवर्षीय शाक, झाड़ियों अथवा वृक्षों के रूप में पाये जाते हैं. कुछ पौधे, जैसे – सिटुलस (Citrullus) एवं सेरिकोस्टोमा (Sericostoma) आदि के तने अत्यधिक शाखित होते हैं, लेकिन इनकी शाखाएं पास-पास सटी हुई होती हैं. कुछ मरुभिदों के तने भूमिगत (underground) होते हैं, जैसे- ऐलो (Aloe), अगेव (Agave) एवं सेकरम (Sacchrum) आदि. इनके तीनों पर बहुकोशीय रोम (trichomes) बहुतायत से पाये जाते हैं, जैसे- आरनेबिया (Arnebio) एवं केलोट्रोपिस (Calotropis) में। इसके अलावा कुछ पौधों जैसे केलोट्रोपिस में तने व पत्तियों की सतह पर एक मोमी आवरण (waxy coating) पाया जाता है. जबकि इनके तीनों पर बहुकोशीय रोम (trichomes) बहुतायत से पाये जाते हैं, जैसे- आरनेबिया (Arnebio) एवं केलोट्रोपिस (Calotropis) में। इसके अलावा कुछ पौधों जैसे केलोट्रोपिस में तने व पत्तियों की सतह पर एक मोमी आवरण (waxy coating) पाया जाता है.

पर्ण (Leaves) की विशेषता क्या है? = पौधों में प्रारम्भ में ही पत्तियाँ विलुप्त हो जाती हैं, बहुत थोड़े समय के लिए दिखाई देती हैं. इस प्रकार के मरुभिद पौधों को आशुपाती (caducous) कहा जाता है, जैसे लेप्टाडीनिया (Leptadenia pyrotechnica) कुछ पौधों, जैसे- कैर (Cappar is decidua) में पत्तियाँ पूर्णतः अनुपस्थित होती हैं.

  • कई मरूभिदों में पत्तियों का आकार छोटा होता है, व जिन पौधों की पत्तियाँ बड़े आकार की होती हैं, उनमें पत्तियों की सतह चमकीली व चिकनी होती है, जिससे तीव्र प्रकाश परावर्तित हो जाता है। इसके कारण पत्ती का तापमान कम हो जाने से वाष्पोत्सर्जन की दर में भी कमी आती है. कुछ पौधों जैसे टेमेरिक्स (Tamarix) की पत्तियाँ नुकीली व सूच्यकार होती है.
  • पौधों जैसे नागफनी (Opunita) में पत्तियाँ रूपान्तरित होकर कंटकों में बदल जाती हैं. उदाहरणों जैसे-रसकस (Ruscus), ऐस्पेरगस (Asparagus), केस्यूराइना (Casurina) एवं मुलेनबेकिया (Muehlenbeckia) में पत्तियाँ शल्कों (scales) में अपहृसित हो जाती हैं.
  • अनेक पौधों की पत्तियों पर मोम (Wax) व सिलिका (silica) का आवरण पाया जाता है, जैसे- केलोट्रोपिस (Calotropis). मरूभिद पौधों में सामान्यतया पर्ण फलक (lamina) का आकार छोटा हो जाता है, जैसे-खेजड़ी (Prosopis) एवं बबूल (Acacia) जबकि, पारकिन्सोनिया (Parkinsonia) के पर्णक अत्यधिक लघु आकृति के होते हैं, लेकिन इनका प्राक्ष (rachis) चपटा और मोटा होता है. यह पर्णकों को तेज धूप से सुरक्षित रखने का कार्य करता है.
  • शुष्क एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों में प्रायः तेज गति की हवाएं व आंधियां चलती रहती हैं. अतः ऐसे स्थानों पर पाये जाने वाले मरुभिदों जैसे आरनेबिया (Arnebia) में पत्तियों कर सतह पर बहुकोशीय रोम (trichomes) पाये जाते हैं. ये रोम बाह्यत्वचा एवं पर्णरंध्रों को आवरित कर वाष्पोत्सर्जन की दर को कम करते हैं. कुछ एकबीजपत्री मरुभिद पौधों व घासों. कुछ मरुभिद पौधों जैसे बेन्केसिया (Bankesia), एवं साइकस (cycas) की पत्तियां मोटी, कभी-कभी मांसल या चर्मिल हो जाती हैं.

फल तथा बीज (Fruits and Seeds)? =  मरुभिद् पौधों में पुष्पन तथा फलों का निर्माण अनुकूलन परिस्थितियों में अर्थात् जल की पर्याप्त मात्रा एवं वातावरण की उपयुक्त परिस्थितियों में होता है. इसके अतिरक्ति इन पौधों में बीजों का अंकुरण अधिक तापमान पर होता है, साथ ही बीज अधिक तापमानं के प्रति सहनशीलता भी प्रदर्शित करते हैं. प्रायः इन पौधों में फलों एवं बीजों के ऊपरी आवरण कठोर होते हैं जो बीज व भ्रूण को सुरक्षित रखते हैं, साथ ही ये जल के प्रति पारगम्य होते हैं. आंतरिक संरचना के अनुकूलन लक्षण (Anatomical adaptations) – आकारिकीय अनुकूलन लक्षणों के साथ-साथ मरुभिद् पौधों की आंतरिक संरचनाओं में भी विभिन्न प्रकार के विशिष्ट लक्षण पाये जाते हैं, जिनके कारण इन पौधों में जल के न्यूनतम व्यय को सुनिश्चित किया जाता है.