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वनस्पति विज्ञान से संबंधित(15)…

बीजाण्ड की रचना (Structure of ovule)

Ovule:- It is usually elliptical. It is connected to the spore by a funiculus. The place where the spore is inhabited by the spontaneous vein is called Hilum. The spore circle goes ahead and makes a place called the spore, which is called Raphe. The main part of the spore is called nucellus, which is covered by two veils – Outer integument and Inner integument. (Micropyle). The opposite side of the spindle gate is called Chalaza. Embryosac occurs within the spore. A female gametes (ovum) are present within this embryo and the embryo matures and is ready for fertilization.

  • The flowers in which the four chakras of the flower (external dalunj, dalunj, pusang and jayang) are present are called complete flowers.
  • Flowers in which one or more chakras are absent are called incomplete flowers.
  • The external pulp and dal is called the accessory organ of the flower and the pumang and jayang are called essential organ.
  • The main function of the flower is to produce fruit and seeds inside it by sexual reproduction.

Pollination:- The action of reaching the stigma of the Gynoecium of the same plant by freeing it from the anther of pollengrains is called pollination. Pollination is of two types …

Self Pollination:- When the pollen of a flower reaches the stigma of the same flower or the stigma of another flower located on the same plant, it is called self-pollen.

Cross pollination:- When a flower’s pollen reaches the stigma of a flower located on another plant of the same species, it is called pollination. Pollination occurs through several means. Pollination requires some medium. It is quite useful for plants.

Fertilization:- The process of fertilization starts after pollination. The pollen tube enters the ovule and reaches the endosperm that penetrates the spores and leaves the pollen. Thereafter, a male gametes combines with a scrotum called fertilization. Fertilized egg is called zygote. This is the first unit of zygote spore. After fertilization, seeds are produced from the spores, embryos from the zygote and fruits from the ovaries. In Angiospermic plants, fertilization is also called triple fusion. After fertilization, the following types of changes are seen in the flower. …

  • Calyx external:- It often falls off and falls.
  • Corolla:- It falls off and falls.
  • Stamen:- It fades and falls.
  • Stigma:- It withers away.
  • Style:- It withers away.
  • Ovary:- It is converted into fruit.
  • Ovary wall:- It is converted into Pericarp.
  • Triple fused nucleus:- It is converted into endosperm.
  • Egg cells:- It gets converted into embryo.
  • Nucellus:- It is converted into Perisperm.
  • Ovule:- It is converted into seed.

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बीजाण्ड :-  साधारणतः  यह अण्डाकार होता है. यह एक बीजाण्ड वृन्त (Funiculus) द्वारा बीजाण्डसन से सम्बद्ध रहता है. जिस स्थान पर बीजाण्ड बीजाण्ड-वृन्त द्वारा लगा रहता है उस हिस्से को हाइलम (Hilum) कहते हैं. बीजाण्ड वृन्त आगे बढ़कर बीजाण्ड से मिलकर एक स्थान बनाता है, जिसे रैफे (Raphe) कहते हैं. बीजाण्ड के मुख्य भाग का बीजीण्डकाय (nucellus) कहते हैं, जो दो आवरणों से ढका रहता है- बाहरी अध्यावरण (Outer integument) एवं भीतरी अध्यावरण (Inner integument)l बीजाण्ड का जो भाग अध्यावरण से ढका नहीं रहता है, उस स्थान को बीजाण्ड द्वार (Micropyle) कहते हैं. बीजाण्ड द्वार के ठीक विपरीत हिस्से को कैलाजा (Chalaza) कहते हैं. बीजाण्ड के भीतर भ्रूणकोष (Embryosac) होता है. इस भ्रूणकोष के भीतर मादा युग्मक (अंडाणु) उपस्थित होता है और  भ्रूणकोष परिपक्व होकर निषेचन (Fertilization) के लिए तैयार होता है.

  • जिन पुष्पों में पुष्प के चारों चक्र (बाह्य दलपुंज, दलपुंज, पुसंग एवं जायांग) उपस्थित होते हैं उन्हें पूर्णपुष्प (Complete flower) कहा जाता है.
  • जिन पुष्पों में पुष्प के एक या अधिक चक्र अनुपस्थित होते हैं उन्हें अपूर्ण पुष्प (Incomplete flower) कहा जाता है.
  • बाह्य दलपुंज एवं दलपुंज को पुष्प का सहायक अंग (Accessary organ) तथा पुमंग एवं जायांग को आवश्यक अंग (Essential organ) कहा जाता है.
  • पुष्प का मुख्य कार्य लिंगीय प्रजनन द्वारा फल तथा उसके अन्दर बीज का निर्माण करना.

परागण (Pollination):- परागकणों (Pollengrains) के परागकोष (Anther) से मुक्त होकर उसी जाति के पौधे के जायांग (Gynoecium) के वर्तिकाग्र (stigma) तक पहुँचने की क्रिया को परागण कहा जाता है. परागण दो प्रकार के होते हैं…

स्वपरागण (self Pollination) :-  जब कोई पुष्प के परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर या उसी पौधे पर स्थित किसी अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचता है, तो इसे स्वपरागण कहा जाता है.

पर-परागण (Cross pollination) :-  जब कोई पुष्प का परागकण उसी जाति के दूसरे पौधे पर स्थित पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँचता है, तो उसे पर-परागण कहते हैं. पर-परागण कई माध्यमों से होता है. पर-परागण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता होती है. यह पौधों के लिए उपयोगी काफी होता है.

निषेचन (Fertilization) :-  परागण के पश्चात निषेचन की क्रिया प्रारम्भ होती है. परागनली (Pollen tube) बीजाण्ड (ovule) में प्रवेश करके बीजाण्डासन को भेदती हुई भ्रूणपोष (Endosperm) तक पहुँचती है और परागकणों को वहीं छोड़ देती है. इसके पश्चात् एक नर युग्मक एक अण्डकोशिका से संयोजन करता है जिसे निषेचन कहा जाता है. निषेचित अण्ड (Fertilized egg) युग्मनज (zygote) कहलाता है. यह युग्मनज बीजाणुभिद की प्रथम इकाई है. निषेचन के पश्चात बीजाण्ड से बीज, युग्मनज से भ्रूण (embryo) तथा अण्डाशय से फल का निर्माण होता है. आवृत्तबीजी पौधों (Angiospermic plants) में निषेचन को त्रिक संलयन (Triple fusion) भी कहा जाता है. निषेचन के पश्चात् पुष्प में निम्नलिखित प्रकार के परिवर्तन देखने को मिलता है. …

बाह्य दलपुंज (Calyx) :-  यह प्रायः मुरझाकर गिर जाता है.

दलपुंज (Corolla) :-  यह मुरझाकर गिर जाता है.

पुंकेसर (stamen) :-  यह मुरझाकर झड़ जाता है.

वर्तिकाग्र (stigma) :-  यह मुरझा जाती है.

वर्तिका (style) :-  यह मुरझा जाती है.

अण्डाशय (Ovary) :-  यह फल में परिवर्तित हो जाती है.

अण्डाशय भित्ति (Ovary wall) :-  यह फलाभित्ति (Pericarp) में परिवर्तित हो जाती है.

त्रिसंयोजक केन्द्रक (Triple fused nucleus) :- यह भ्रूणपोष (Endosperm) में परिवर्तित हो जाती है.

अण्डकोशिका (Egg cells) :-  यह भ्रूण (embryo) में परिवर्तित हो जाता है.

बीजाण्डसन (Nucellus) :-  यह पेरीस्पर्म (Perisperm) में परिवर्तित हो जाती है.

बीजाण्ड (Ovule) :-  यह बीज (seed) में परिवर्तित हो जाती है.

 

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