“लहसुन” का ओषधिये गुण

“लहसुन” का ओषधिये गुण

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एक भारतीय होने के कारन आपकी निश्चित रूप से आयुर्वेद में पक्की आस्था होगी. कोई धार्मिक कारण आपको आयुर्वेद से दूर ले जाये, पर आपकी रसोई में चलने वाली कड़ाही की मसालेदार गंध से दूर नहीं ले जा सकता है. इन सब में लहसुन की महत्ता सामने आती है.

लहसुन एक मल्टीबैनिफिसिअल चीज़ है. रसोई की पाक कला से लेकर कई रोगों की उपचार कला तक इसका उपयोग होता है. भारत में वैसे भी चीन के बाद दुनिया में सबसे ज़्यादा मात्रा में इसका उत्पादन किया जाता है. इसमें प्रोटीन, वसा, कार्बोज़, खनिज़ पदार्थ, चूना और आइरन पाया जाता है.

इसके अलावा भी विटामिन ए, बी, सी और सल्फ्यूरिक एसिड भी पाया जाता है. इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत तो इसमें पाया जाने वाला तत्व एलीसिन है. एलीसिन को एक अच्छा एंटी-बैक्टीरिअल, एंटी-फंगल और एंटी-ओक्सिडेंट के रूप में जाना जाता है.

इतने सारे पोषक तत्व होने की वजह से यह काफ़ी गुणवान बन जाता है. ख़ासतौर पर यह लीवर से होने वाली बीमारियों से हमारी रक्षा करता है. इसके साथ ही यह गंजेपन को रोकने, धमनियों को साफ रख कर खून को साफ रखने, सर्दी-जुखाम से दूर रखने और रेस्पीरेटरी प्रॉब्लम दूर करने में भी मदद करता है.

कच्चे लहसुन के छोटे-छोटे टुकड़े खाना काफ़ी फायदेमंद रहता है. इसके फायदों को देखते हुए मिस्त्र के पिरामिड बनाने वाले कारीगर और मजदूर तो इसे जेब में लेकर ही घूमते थे.

दुनिया के कई क्षेत्रों में लहसुन की कली को रात को सोते समय अपने तकिये के नीचे रखा जाता है. इस चीज़ के पीछे तथ्य है कि ऐसा करने से रात को नींद अच्छी आती है. इसके साथ ही आपका भाग्य भी अच्छा-खासा निखर जाता है.

इसके साथ ही सोते समय इसे साथ रखने से यह हमें नेगेटिव एनर्जी से भी बचाता है. अब आप भी जिन-जिन लोगों से प्यार करते हैं आज से ही उनके तकिये के नीचे लहसुन की एक कली रखना शुरू कर दीजिए.

 

 डॉ० बिमलेश कुमार(खगौल)पटना.