रूप की रानी दुनिया छोड़ गई…

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उस दौर में श्रीदेवी का दीवाना हर कोई था...खासकर युवाओं की पहली पसंद भी श्रीदेवी ही होती थी. फोटो:-गूगल

दक्षिन भारत की कई अभिनेत्रियाँ का जलवा वालीवुड में रहा है. उसमें भी एक ऐसा कलाकार जिसने अपने कैरियर की शुरुआत बचपन से की हो और अपने अभिनय के दम पर कई हिंदी फिल्म को सुपरहिट करवाया…. वो कलाकार आज हमारे बीच नहीं है. शनिवार की देर रात को दिल का दौरा पड़ने के कारण उनकी निधन हो गई. बताते चलें कि, बालीवुड की अभिनेत्री श्रीदेवी के निधन से फिल्म जगत सहित पुरे  देश में शोक की लहर दौड़ पड़ी है.

श्रीदेवी का जन्म तामिलनाडू के शिवकाशी में 13 अगस्त 1963 को हुआ था. श्रीदेवी के माता-पिता ने उनका नाम श्री अम्मा आयंगर अय्यपन रखा था. श्रीदेवी के माता का नाम राजेश्वरी और पिता का नाम अय्यपन था और उनके पिता एक वकील थे. बताते चलें कि, श्रीदेवी की एक बहन और दो सौतले भाई भी हैं. श्रीदेवी ने अपने कैरियर की शुरुआत बाल-कलाकार के रूप में तमिल,तेलगु और मलयालम सिनेमा से शुरू किया था.

एक वो जमाना था जब टेक्नोलोजी का विकास वर्तमान समय के ऐसा नही था और शहरों में ही सिनेमा हाल हुआ करता था और उस जमाने में लोग सिनेमा देखने के लिए वीसीआर लगवाते थे और पूरा परिवार सिनेमा का आनन्द लेता था. उस दौर में श्रीदेवी का दीवाना हर कोई था…खासकर युवाओं की पहली पसंद भी श्रीदेवी ही होती थी.

सत्तर के दशक में कमल हासन और रजनीकांत के साथ श्रीदेवी ने कई यादगार फिल्मे की और इन सभी फिल्मों में श्रीदेवी ने काफी इंटेंस किरदार भी निभाये. श्रीदेवी को हिंदी सिनेमा भले ही ग्लैमरस अभिनेत्री के रूप में याद करता हो लेकिन, उन्होंने अपने कैरियर के दौरान कुछ ऐसे किरदार निभाये जो उनकी असीमित अभिनय क्षमता को दिखाते हैं.

श्रीदेवी ने अबतक ‘जैसे को तैसा’, ‘जूली’, ‘सोलहवां साल’, ‘हिम्मतवाला’, ‘जस्टिस चौधरी’, ‘जानी दोस्त’, ‘कलाकार’, ‘सदमा’, ‘अक्लमंद’, ‘इन्कलाब’, ‘जाग उठा इंसान’, ‘नया कदम’, ‘मकसद’ ‘तोहफा’, ‘बलिदान’, ‘मास्टर जी’, ‘सरफरोश’,’आखिरी रास्ता’, ‘भगवान दादा’, ‘धर्म अधिकारी’, ‘घर संसार’, ‘नगीना’, ‘कर्मा’, ‘सुहागन’, ‘सल्तनत’, ‘औलाद’, ‘हिम्मत और मेहनत’, ‘नजराना’, ‘जवाब हम देंगे’, ‘मिस्टर इंडिया’, ‘शेरनी’, ‘सोने पे सुहागा’, ‘चांदनी’, ‘गुरु’, ‘निगाहें’, ‘बंजारन’, ‘फरिश्ते’, ‘पत्थर के इंसान’, ‘लम्हे’, ‘खुदा गवाह’, ‘हीर रांझा’, ‘चंद्रमुखी’, ‘गुमराह’, ‘रूप की रानी चोरों का राजा’, ‘चांद का टुकड़ा’, ‘लाडला’, ‘आर्मी’, ‘मि. बेचारा’, ‘कौन सच्चा कौन झूठा’, ‘जुदाई’, ‘मिस्टर इंडिया 2’ जैसी फिल्मों में काम किया.

इसके अलावा उन्होंने हिंदी की 63, तेलुगु की 62, तमिल की 58, मलयालम की 21 फिल्मों के अलावा कुछ कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया. श्रीदेवी ने बॉलीवुड व दक्षिण भारत की फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ी. साल 2013  में श्रीदेवी को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, इसके अलावा श्रीदेवी को 5 फ़िल्म फेयर अवॉर्ड भी मिल चुके हैं. साल 2017 में श्रीदेवी की आखिरी फ़िल्म ‘मोम’ आई. इसी साल उन्होंने फिल्मी जगत में उन्होंने अपने करियर के 50 साल भी पूरे किए थे.