राज्यपाल ने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी पर केन्द्रित डॉ॰ किरण कुमारी की दो...

राज्यपाल ने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी पर केन्द्रित डॉ॰ किरण कुमारी की दो किताबों को विमोचित किया…

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चमड़े की चप्पल नहीं पहनने की सीख देते समय गाँधी प्रकारान्तर से ‘गोवध’ के ही खिलाफ वातावरण तैयार कर रहे थे. फोटो:-आईपीआरडी, पटना.

बुधवार को महामहिम राज्यपाल लाल जी टंडन ने राजभवन सभागार में बिहार पुराविद परिषद के तत्वावधान में आयोजित ‘पुस्तक लोकार्पण समारोह’ में डॉ॰ किरण कुमारी द्वारा लिखित दो पुस्तकों -1.‘गाँधी के पथ पर एवं 2.‘महात्मा गाँधी की जीवन-यात्रा को विमोचित किया. पुस्तक का प्रकाशन बी॰आर॰ पब्लिसिंग कॉरपोरेशन, नई दिल्ली द्वारा किया गया है. उक्त अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि महात्मा गाँधी का जीवन-दर्शन न केवल भारत, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए आज भी प्रासंगिक और प्रेरणादायी बना हुआ है. राज्यपाल ने कहा कि महात्मा गाँधी ने कहा था कि उनका जीवन ही उनका दर्शन है तथा सत्य के साथ उनके प्रयोग ही उनके संदेश हैं. राज्यपाल ने महान वैज्ञानिक आइंस्टीन को उद्धृत करते हुए कहा कि यह बिल्कुल सही है कि आनेवाली पीढ़ियाँ तो यह मुश्किल से ही विश्वास कर पायेंगी कि हाड़-मांस से बना हुआ कोई गाँधी जैसा महामानव भी धरती पर पैदा हुआ था.

पुस्तक लोकार्पित करने के बाद राज्यपाल टंडन ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति भी सत्य और अहिंसा को मनुष्यता के लिए परमावश्यक एवं हितकारी मानती है. गाँधी ने सत्य और अहिंसा के बल पर ‘स्वतंत्रता-संग्राम’ के दौरान अपने जो प्रयोग किये, वे पूरी तरह आत्मबल और नैतिकता पर आधारित थे. उन्होंने कहा कि गाँधी की अहिंसा किसी निर्बलता का प्रतीक नहीं है, बल्कि वह शक्ति के संयमित सकारात्मक संचयन की एक सार्थक दृष्टि है, जिससे आततायी स्वतः नियंत्रित हो जाता है. राज्यपाल ने कहा कि आज जब हम महात्मा गाँधी का ‘150वाँ जयंती-वर्ष’ मना रहे हैं, यह आवश्यक है कि हम गाँधी की ‘स्वदेशी’ की विचारधारा तथा सत्य और अहिंसा के बल पर समाज-सुधार के उनके प्रयासों को पूरी गंभीरता के साथ अपनायें.

राज्यपाल ने कहा कि महात्मा गाँधी की ‘आत्मकथा’ जो सत्य के प्रयोग के रूप में सबके सामने आई, को ‘श्रीमद्भागवद्गीता’ के समान सभी भारतीय और पूरी दुनियाँ के लोग काफी सम्मान के साथ देखते हैं. उन्होंने कहा कि ‘हिन्द स्वराज’ गाँधी के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक-चिन्तनों का सार-रूप है.

राज्यपाल टंडन ने कहा कि दक्षिण अफ्रिका से लौटने के बाद बिहार के चंपारण में मोहनदास करमचंद गाँधी ने किसानों के साथ मिलकर जिस ‘सत्याग्रह’ की शुरूआत की, उसी ने उन्हें ‘महात्मा गाँधी’ के रूप में पूरी दुनियाँ में ख्याति दिलायी। चम्पारण में कृषकों की दुर्दशा ने गाँधी को काफी गहरे तक व्यथित किया था और वे उसी समय इसके लिए दृढ़प्रतिज्ञ हो गए थे कि अंग्रेजों से स्वतंत्रता हासिल प्राप्त कर ही वे दम लेंगे. राज्यपाल ने कहा कि ‘हिन्दी स्वराज’ में गाँधी ने जिस भारत की कल्पना की है, जिस सामाजिक और आर्थिक दर्शन का प्रतिपादन किया है, वही आज पूरी दुनिया के लिए श्रेयस्कर है. राज्यपाल टंडन ने कहा कि चमड़े की चप्पल नहीं पहनने की सीख देते समय गाँधी प्रकारान्तर से ‘गोवध’ के ही खिलाफ वातावरण तैयार कर रहे थे. उन्होंने कहा कि गाँधी स्वदेशी वस्तुओं के बहिष्कार की जब बात कर रहे थे तो वह प्रकारान्तर से भारतीय लोगों के  माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था को ही मजबूती प्रदान करना चाह रहे थे.

राज्यपाल टंडन ने कहा कि ‘गाँधी के पथ पर’ नामक पुस्तक गाँधी-चिन्तन के कई अनछूये पहलुओं पर भी प्रकाश डालती है तथा ‘महात्मा गाँधी की जीवन-यात्रा’ नामक पुस्तक उनकी जीवन-यात्रा की सचित्र वर्णना है. राज्यपाल ने इन दोनों पुस्तकों की लेखिका डॉ॰ किरण कुमारी को बधाई और शुभकामनाएँ दी.

कार्यक्रम में बिहार पुरातत्व परिषद् के महासचिव डॉ॰ उमेशचन्द्र द्विवेदी, अध्यक्ष डॉ॰ चितरंजन प्रसाद सिन्हा ने भी अपने विचार व्यक्त किये. इस अवसर पर भा०प्र०से० के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ० सी० अशोकवर्द्धन, भा०पु०से० के सेवानिवृत्त अधिकारी उमेश कुमार सिंह, विद्या चौधरी, अतिया बेगम, अजित कुमार प्रसाद सहित राज्यपाल सचिवालय के भी कई अधिकारी उपस्थित थे.