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राज्यपाल ने राज्य के विश्वविद्यालयों में डिजिटल शिक्षण के विभिन्न पाठ्यक्रमों के कार्यान्वयन की मंजूरी दी…

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‘स्वयं’ एवं ‘स्वयं प्रभा’ के पाठ्यक्रमों का यह कार्यान्वयन विभिन्न विषयों में राज्य में शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों को उबारते हुए उन्हें संबंधित विषयों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सकेगा. फोटो:-आईपीआरडी, पटना.

शुक्रवार को  महामहिम राज्यपाल लाल जी टंडन ने विगत 11 एवं 12 अप्रैल 2019 को राज्य के विश्वविद्यालयां में ‘डिजिटल शिक्षण प्रणाली’ के कार्यान्वयन से संबंधित केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं राजभवन के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न ‘दो दिवसीय कार्यशाला’ में विभिन्न तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त सुझावों के आलोक में राज्य में ‘डिजिटल शिक्षण व्यवस्था’ की विभिन्न विधियों में कार्यान्वयन को अपनी मंजूरी दे दी है.

राज्यपाल टंडन द्वारा डिजिटल शिक्षण व्यवस्था के तहत तत्काल -‘स्वयं’(SWAYAM), ‘ ‘स्वयंप्रभा’ (SWAYAM-PRABHA), अर्पित,(ARPIT) ‘National Digital Library’, ‘Virtual Labs’, ‘e-Yantra’ आदि के राज्य में कार्यान्वयन को सैद्धान्तिक रूप से स्वीकृति प्रदान कर दी गई है. इस संबंध में ओ॰एस॰डी॰ (न्यायिक) एवं ओ॰एस॰डी॰ (विश्वविद्यालय) को इन शिक्षण-विधियों के Adoption से संबंधित ‘मार्ग-दर्शिका’ तैयार कर उसके लिए बजटीय प्रावधान आदि की व्यवस्था के संदर्भ में आवश्यक कार्रवाई हेतु संबंधित विभागों से सम्पर्क करने को कहा गया है.

ज्ञातव्य है कि ‘SWAYAM’- एक ऐसी डिजिटल शिक्षण विधि है, जिसके तहत शैक्षणिक पाठ्यक्रम ऑनलाइन उपलब्ध कराये जाते हैं और डिजिटल कक्षाओं के माध्यम से इन्हें छात्रों तक पहुँचाया जाता है. इसमें देश का कोई भी व्यक्ति पंजीकरण कराते हुए शिक्षा ग्रहण कर सकता है. यदि कोई विद्यार्थी स्वयं की पहल के जरिये प्रमाणीकरण चाहता है तो मामूली शुल्क अदा कर प्रमाण-पत्र प्राप्त कर सकता है. इस पहल के माध्यम से सभी अध्ययन-सामग्री और कक्षा में हुए परीक्षण के वीडियो को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है.

राज्यपाल सचिवालय सभी विश्वविद्यालयों को ‘स्वयं’ के पाठ्यक्रमों को अपनी-अपनी एकेडमिक कॉन्सिल / सिंडिकेट/ सीनेट आदि से आगामी जून 2019 तक अनुमोदित करा लेने के लिए कहा है. विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा अनुशंसित कुल 48 अंगीभूत महाविद्यालयों को इस क्रम में जून 2019 तक ‘लोकल चैप्टर’ गठित कर लेने के लिए निदेशित किया जा रहा है. वर्तमान मई महीने के उत्तरार्द्ध में सभी विश्वविद्यालयों को अपने-अपने यहाँ ‘स्वयं’ पाठ्यक्रमोंसे संबंधित कार्यशालाएँ आयोजित करने के लिए भी कहा गया है, ताकि स्टेट नोडल पदाधिकारीगण इनमें जाकर ‘स्वयं’ पाठ्यक्रमों के बारे में संबंधित महाविद्यालय के प्रभारी अधिकारियों एवं विद्यार्थियों को सविस्तार जानकारी दे सकें.

इसी तरह ‘स्वयं प्रभा’ चैनल को भी सभी विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों को संस्थापित (Install) कर लेने के लिए भी निदेशित किया जा रहा है. इस संदर्भ में आधारभूत संरचना, यथा- डी॰टी॰एच॰/टी॰वी॰ आदि लगाने हेतु शिक्षा विभाग से आर्थिक सहयोग प्रदान करने के लिए भी अनुरोध किया जा रहा है.‘स्वयं प्रभा’ क्लासेज से लाभान्वित होने के लिए साप्ताहिक क्लास रूटीन जून 2019 तक तैयार कर लेने के लिए विश्वविद्यालय/कॉलेजों को कहा जा रहा है. ‘स्वयं’ एवं ‘स्वयं प्रभा’ के पाठ्यक्रमों का यह कार्यान्वयन विभिन्न विषयों में राज्य में शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों को उबारते हुए उन्हें संबंधित विषयों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सकेगा.

Annual Refresher Programme in Teaching (ARPIT)’ को शिक्षकों के ‘Career  Advancement’ से जोड़ते हुए इसके कार्यान्वयन हेतु भी विश्वविद्यालयों को आवश्यक कार्रवाइयाँ करने के निदेश दिये जा रहे हैं. इसके लिए जून की समाप्ति तक कार्यशालाएँ आयोजित करने हेतु भी सभी विश्वविद्यालयों को कहा गया है.

राज्यपाल सचिवालय ने ‘Virtual Labs’, एवं ‘e-Yantra’ शिक्षण-विधियों के कार्यान्वयन हेतु आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करने के लिए भी आवश्यक वित्तीय सहयोग के लिए शिक्षा विभाग से अनुरोध करने का निर्णय लिया है. इस संबंध में भी जुलाई 2019 तक सभी विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों में कार्यशालाएँ आयोजित करायी जानी हैं.

महामहिम राज्यपाल टंडन ने राज्य के विश्वविद्यालय में उपर्युक्त डिजिटल शिक्षण विधियों के कार्यान्वयन की तैयारियों की सतत् समीक्षा करते रहने के लिए भी सभी कुलपतियों को कहा है.