राज्यपाल की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा के विकास-प्रयासों की समीक्षा हेतु उच्चस्तरीय...

राज्यपाल की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा के विकास-प्रयासों की समीक्षा हेतु उच्चस्तरीय बैठक हुई….

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बायोमैट्रिक हाजिरी के उपकरण केवल शोभा की वस्तु नहीं होने चाहिए. फोटो:-आईपीआरडी, पटना.

सोमवार को राज्यपाल लाल जी टंडन की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा के विकास-प्रयासों  को गति प्रदान करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई, जिसमें राज्य के मुख्य सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त सुभाष शर्मा, अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग आर०के० महाजन, राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग एवं मंत्रिमंडल सचिवालय व समन्वय विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के प्रधान सचिव रवि मनुभाई परमार, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव अनुपम कुमार, पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय एवं नालंदा खुला विश्वविद्यालय, पटना के कुलपतियों सहित उच्च शिक्षा विभाग, ब्रेडा, भवन निर्माण विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग, राज्यपाल सचिवालय आदि के कई वरीय अधिकारीगण उपस्थित थे.

बैठक को संबोधित करते हुए राज्यपाल टंडन ने कहा कि, राज्य में उच्च शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे सुधार-प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर भी लोग महसूस करने लगे हैं, परन्तु यह आवश्यक है कि हम उच्च शिक्षा के विकास-प्रयासों को और अधिक तेज करें. उन्होंने कहा कि बैठकों में जो निर्णय लिए जाते हैं, जो नीतियाँ निर्धारित होती हैं, उनपर पूरी तरह अमल होना और इसकी सतत् मोनिटरिंग के लिए तंत्र विकसित किया जाना बेहद जरूरी है. राज्यपाल टंडन ने कहा कि, यह संतोष की बात है कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में दो को छोड़कर सभी विश्वविद्यालयों के ‘दीक्षांत समारोह’ आयोजित करते हुए डिग्रियाँ वितरित कर दी गई हैं. उन्होंने कहा कि, यह मौजूदा सुधार-प्रयासों का ही नतीजा है. राज्यपाल टंडन ने कहा कि, शेष दो विश्वविद्यालयों में भी शीघ्र ही ‘दीक्षांत समारोह’ आयोजित होंगे.

राज्यपाल टंडन ने कहा कि, वे अनुशासनहीनता और भ्रष्ट आचरण को हरगिज बर्दाश्त नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि प्रमाण-पत्रों के वितरण में अनियमितता की शिकायत मिलते ही अविलंब कार्रवाई की गई है और 08 मई 2019 तक सभी विश्वविद्यालयों को पारदर्शितापूर्वक प्रमाण-पत्रों का वितरण सुनिश्चित करने को कहा गया है. साथ ही, भविष्य में प्रमाण-पत्रों हेतु ऑनलाईन आवेदन की प्रक्रिया मई से ही प्रारंभ करायी जा रही है, ताकि पारदर्शितापूर्वक सभी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र शीघ्र मिल जायें.

राज्यपाल टंडन ने कहा कि, शोध-कार्यों में गुणवत्ता लाना जरूरी है तथा विश्वविद्यालय की तमाम गतिविधियों का डिजिटलीकरण जरूरी है. राज्यपाल टंडन ने कुलपतियों को निदेशित किया कि UMIS(University Management Information System) के लिए प्रारंभिक तौर पर राज्य सरकार से प्राप्त 10 लाख रूपये की राशि का सदुपयोग करते हुए उपयोगिता प्रमाण-पत्र के साथ वे आवश्यक अतिरिक्त आबंटन की माँग शिक्षा विभाग से करें.

राज्यपाल टंडन ने कहा कि, बायोमैट्रिक हाजिरी के उपकरण केवल शोभा की वस्तु नहीं होने चाहिए. बायोमैट्रिक-उपकरणों से रिपोर्टें लेकर उनका विश्लेषण करते हुए अनुपस्थित शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि प्रावधानों के अनुरूप कार्य-दिवसों में शिक्षक कम-से-कम 05 घंटे की उपस्थिति अपने शिक्षण संस्थानों में सुनिश्चित कर सकें.

राज्यपाल टंडन ने कहा कि, चिकित्सा शिक्षा तथा तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा में भी आधारभूत संरचना विकास तथा सतत् अनुश्रवण की व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए.

बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कहा कि उच्च शिक्षा के विकास हेतु सभी कुलपतियों को अपने शिक्षण संस्थानों में अध्ययन-अध्यापन के अनुकूल वातावरण विकसित करते हुए नियमित शिक्षण की गतिविधियाँ सुनिश्चित करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ट्यूटोरियल क्लासेज, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं आदि पर पूरा ध्यान दिया जाना चाहिए. मुख्य सचिव कुमार ने कहा कि, उच्च शिक्षा के सभी घटकों-शिक्षक, विद्यार्थी, शिक्षकेत्तरकर्मी, सरकारी विभाग, आदि -सबको अपने दायित्वों के प्रति तत्पर और अपनी जिम्मेवारियों के प्रति पूर्ण सजग रहना होगा.

मुख्य सचिव कुमार ने बैठक में निदेशित किया कि सभी विश्वविद्यालय/महाविद्यालय परिसरों में किसी भी प्रकार के संचालित निर्माण-कार्यों में कार्यकारी एजेन्सियों को तब तक भुगतान नहीं होना चाहिए, जबतक संबंधित संस्थान के प्रधान का अभिप्रमाणन प्राप्त नहीं हो जाता. मुख्य सचिव कुमार ने शिक्षा विभाग को इस संबंध में शीध्र आदेश निर्गत करने को कहा. बैठक में पटना विश्वविद्यालय के कुलपति ने विश्वविद्यालय परिसर में बने दो छात्रावासों के निर्माण-कार्य, उपस्कर-व्यवस्था तथा प्राचीन इतिहास विभाग में हुए निर्माण कार्यों के प्रति असंतोष व्यक्त किया था, जिसपर ध्यान देते हुए मुख्य सचिव ने उपर्युक्त निदेश प्रदान किया.

बैठक को संबोधित करते हुए विकास आयुक्त सुभाष शर्मा ने विश्वविद्यालयों में शोध-कार्यों में गुणवत्ता-विकास के लिए पुस्तकालयों में नये-नये जरनल, नयी किताबें आदि मँगाने पर जोर दिया.

बैठक में विश्वविद्यालयों से शीघ्र सहायक प्राध्यापकों की रोस्टर सहित रिक्तियाँ माँगने का भी निर्णय लिया गया ताकि नवगठित ‘बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग’ के माध्यम से नियुक्ति-प्रक्रिया यथासमय प्रारंभ करायी जा सके. बैठक में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में आई॰टी॰ मैजेजर एवं डाटा इन्ट्री ऑपरेटरों के पद-सृजन पर भी गंभीरता से विचार किया गया. साथ ही, नियमित प्राचार्यों की नियुक्ति, विश्वविद्यालय शिक्षकों की प्रोन्नति आदि पर भी गंभीरता से विमर्श हुआ.

बैठक में निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालयों में आऊटडोर स्टेडियम, इंडोर स्टेडियम, ऑडोटोरियम एवं स्वीमिंग पुल आदि बनवाने के लिए भी शिक्षा विभाग एवं कला, संस्कृति एवं युवा विभाग आवश्यक कार्रवाई करेंगे.

बैठक में ‘विश्वविद्यालय प्रशासनिक सेवा’ एवं ‘विश्वविद्यालय वित्त सेवा’ गठित करने पर भी चर्चा हुई, ताकि कुलसचिव, वित्त पदाधिकारी एवं वित्त परामर्शी आदि पदों पर नियमित नियुक्तियाँ हो सकें.

बैठक में अपर मुख्य सचिव, शिक्षा ने बताया कि लगभग 35 महाविद्यालयों के मान्यता से संबंधित प्रस्तावों को उन्होंने अनुकूल नहीं पाते हुए इनपर आवश्यक जानकारियाँ हासिल करने को कहा है. उन्होंने बताया कि शीघ्र ही इनपर निर्णय ले लिया जायेगा. राज्यपाल ने कहा कि जिन कॉलेजों को राज्य सरकार से मान्यता नहीं मिलती है, उनमें किसी भी परिस्थिति में नामांकन नहीं हो – ऐसा सभी विश्वविद्यालय सुनिश्चित करेंगे.

बैठक में पटना विश्वविद्यालय को कहा गया कि वह “National Institutional Ranking Framework – NIFR” के लिए अपना प्रस्ताव तैयार करे. बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य के कुछ प्रमुख महाविद्यालयों को ‘Center of Excellence’ के रूप में इस प्रकार विकसित किया जायेगा ताकि वे देश के शीर्षस्थ 100 कॉलेजों में अपना स्थान बना सकें.

बैठक में नवस्थापित विश्वविद्यालयों में आधारभूत संरचना-विकास, विश्वविद्यालयों में वित्तीय प्रबंधन हेतु कुशल तंत्र विकसित करने, पूर्व की भाँति विश्वविद्यालयों को ‘तरंग’ एवं ‘एकलव्य’ प्रतियोगिताओं के आयोजन हेतु वित्तीय सहायता करने, विश्वविद्यालय-महाविद्यालयों में ‘हर परिसर हरा परिसर’ कार्यक्रम को वन विभाग के साथ समन्वय बनाकर सफलतापूर्वक संचालित करने, सभी विश्वविद्यालयों एवं बडे़ कॉलेजों में सोलर पावर प्लांट संस्थापित करने आदि विषयों पर भी व्यापक चर्चा हुई तथा संबंधित विभागों को इनके लिए आवश्यक कार्रवाई के निदेश दिये गये. राजभवन स्थित राजेन्द्र मंडप, दरबार हॉल आदि के सुदृढ़ीकरण एवं सौन्दर्यीकरण का भी निर्णय लिया गया.