मुझे पूरा भरोसा है कि डॉ० राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय भी टॉप...

मुझे पूरा भरोसा है कि डॉ० राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय भी टॉप टेन केंद्रीय यूनिवर्सिटी में शुमार होगा :- मुख्यमंत्री

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दुनिया के किसी भी इलाके में कुदरत के साथ छेड़छाड़ होती है तो उसका दुष्प्रभाव दूसरी जगहों पर पड़ता है. फोटो:-आईपीआरडी, पटना.

गुरुवार को डॉ० राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, समस्तीपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्यपाल लालजी टंडन एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए.

गुरुवार को केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, समस्तीपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्यपाल लालजी टंडन एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए. इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री कुमार ने कहा कि राष्ट्रपति जी का हृदय से अभिनंदन करता हूँ साथ ही उन्होंने कहा कि आदरणीय रामनाथ कोविंद जी बिहार के महामहिम राज्यपाल से सीधे राष्ट्रपति बने, यह हमारे लिए गौरव की बात है और इससे हमलोगों को संतोष की अनुभूति होती है. उन्होंने कहा कि यह केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय देश का पहला एग्रीकल्चर रिसर्च केंद्र के रूप में स्थापित हुआ था जो पहले फिलिप्स ऑफ यू०एस०ए० के नाम पर था. भयंकर भूकंप के बाद यह संस्था दिल्ली चली गयी और 1970 में यहाँ कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना राज्य सरकार ने की. इसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी में परिणत करने के लिए हमलोग कोशिस करते रहें और सभी शर्तों को पूरा करने के बाद 2016 में यह केंद्रीय विश्वविद्यालय बना.

मुख्यमंत्री कुमार ने कहा कि, 1908 में भागलपुर में स्थापित सबौर कृषि महाविद्यालय को वर्ष 2010 में हमलोगों ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय के रूप में कन्वर्ट किया. उन्होंने कहा कि, कि झारखंड के अलग होने के बाद बिहार में यह एकमात्र कृषि विश्वविद्यालय था. उन्होंने एक वाकया को याद करते हुए कहा कि, जब केंद्र में जब यू०पी०ए० की सरकार थी और डॉ० मनमोहन सिंह जी प्रधानमंत्री थे तब उन्होंने कृषि के मसले पर सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मीटिंग बुलाई थी. उस मीटिंग में एक एक्सपर्ट ने मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुराकर कहा कि देश के अंदर बिहार में उत्पादन और उत्पादकता अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है तब हमने उस मीटिंग में कहा था कि बिहार में उत्पादन और उत्पादकता दोनों जल्द ही बढ़ेंगे. उसके बाद ही हमने वर्ष 2008-12 के लिए पहला कृषि रोड मैप तैयार करवाया.

मुख्यमंत्री कुमार ने कहा कि, इसके बाद बीज विस्थापन दर के मामले में धान में 11 फीसदी से 42 फीसदी, गेहूं में 10 फीसदी से बढ़कर 36 फीसदी और मक्का में 60 से बढ़कर 86 फीसदी की बढोत्तरी हुई. उन्होंने कहा कि, दूसरे कृषि रोड मैप की लॉन्चिंग तात्कालीन राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने वर्ष 2012-17 की थी और अब तीसरा कृषि रोड मैप भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के द्वारा लांच किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि, मीटिंग में जब एक्सपर्ट बोल रहे थे, उस समय धान की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 12.05 क्विंटल थी जो बढ़कर 25.25 पर पहुंच गयी, गेहूं की उत्पादकता 14 से बढ़कर 28.5 जबकि मक्का की उत्पादकता 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 40 क्विंटल पर पहुंच गयी. उन्होंने कहा कि, बिहार को वर्ष 2012 में चावल के लिए, वर्ष 2013 में गेहूं के लिए और वर्ष 2016 में मक्का उत्पादन के लिए कृषि कर्मण पुरस्कार भी मिला.

मुख्यमंत्री कुमार ने कहा कि, जलवायु परिवर्तन पर कहा कि, पहले बिहार में 1200 से 1500  मिलीमीटर रेनफॉल हुआ करता था, जो अब घटकर 800 मिलीमीटर से भी कम पर पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि, इस वर्ष बिहार के 23 जिलों के 275 प्रखंडों को सूखा घोषित किया गया है. उन्होंने कहा कि दुनिया भर में प्रकृति के साथ जो छेड़छाड़ हो रही है, उसके कारण ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज की समस्याएं उपजी हैं, इसके लिए बिहार के लोग कसूरवार नहीं है लेकिन बिहार के लोगों को इसका शिकार होना पड़ रहा है क्योंकि दुनिया के किसी भी इलाके में कुदरत के साथ छेड़छाड़ होती है तो उसका दुष्प्रभाव दूसरी जगहों पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, सबौर कृषि विश्वविद्यालय और बोरलॉग इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशिया की जो यहां शाखा खुली है, इन सबको मिलकर लोगों को अल्टरनेटिव सुझाव देना होगा ताकि जलवायु परिवर्तन को देखते हुए क्रॉप साइकिल का कॉन्सेप्ट डेवेलप किया जा सके.

मुख्यमंत्री कुमार ने कहा कि, इसके लिए सिर्फ पूसा और सबौर में ही नहीं बल्कि कृषि विज्ञान केंद्र में भी एक्सपेरिमेंट होना चाहिए, जरूरत पड़ने पर जमीन उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि, आज से अगर एसेस नहीं किया गया तो बहुत बड़ा संकट उत्पन्न हो सकता है क्योंकि, आज भी बिहार में 76 प्रतिशत लोग आजीविका के लिए कृषि पर ही निर्भर हैं. उन्होंने कहा कि, हर घर को बिजली कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा हो गया है और अगले साल से अलग एग्रीकल्चर फीडर के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. उन्होंने कहा कि, कृषि की पढ़ाई करने के लिए अधिकांश विद्यार्थी एडमिशन लेते थे लेकिन पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते थे, जिसे देखते हुए राज्य सरकार की तरफ से ऐसे विद्यार्थियों को किताब खरीदने के लिए 6 हजार रुपये के साथ ही प्रतिमाह 2 हजार रुपये देने का प्रबंध किया गया है.

मुख्यमंत्री कुमार ने कहा कि, हमलोग चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग एग्रीकल्चर की पढ़ाई पर ध्यान दें. उन्होंने कहा कि, मुझे पूरा भरोसा है कि राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूरी मजबूती के साथ काम करेगा और टॉप टेन केंद्रीय यूनिवर्सिटी में राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय भी शुमार होगा. मुझे उम्मीद है कि केंद्र सरकार इसमें भरपूर सहयोग करेगी. उन्होंने कहा कि मैं दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक एवं उपाधि हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देता हूँ.

दीक्षांत समारोह को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह, राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति श्री रमेश चन्द्र श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया. इस अवसर पर देश की प्रथम लेडी सविता कोविंद, कृषि मंत्री प्रेम कुमार, भवन निर्माण मंत्री महेश्वर हजारी, पर्यटन मंत्री, प्रमोद कुमार, नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा, सांसद रामनाथ ठाकुर, सांसद अजय निषाद, राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ० प्रफुल्ल कुमार मिश्र, कुलसचिव डॉ० रवि नंदन, विश्वविद्यालय प्रबंधन बोर्ड एवं विद्वतजन के सदस्यगण, मुख्य सचिव दीपक कुमार, पुलिस महानिदेशक के०एस०द्विवेदी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं मौजूद थे.