मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्टेट हाईवे-95 एवं इंडो-नेपाल बॉडर का हवाई सर्वेक्षण...

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्टेट हाईवे-95 एवं इंडो-नेपाल बॉडर का हवाई सर्वेक्षण किया…

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इस पर्व की अपनी अलग महत्ता एवं विशेषता है. यह पर्व हमारी संस्कृति को और मजबूत बनाता है. फोटो:-आईपीआरडी, पटना.

गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्टेट हाईवे-95 एवं इंडो-नेपाल बॉडर का हवाई सर्वेक्षण किया साथ ही अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए.

स्टेट हाईवे-95 का निर्माण :- मानसी (एन०एच०-31)-सहरसा-हरदी चौघड़ा पथ (राज्य उच्च पथ संख्या-95), खगड़िया जिला के एन०एच०- 31 के मानसी से प्रारंभ होकर सहरसा एवं मधेपुरा जिला होते हुये सुपौल जिलान्तर्गत एस०एच०- 66 पर हरदी-चौघड़ा में मिलती है इस पथ की कुल लम्बाई 75.02 किलोमीटर होगी.  मानसी से लगभग 7.5 किलोमीटर (बदलाघाट) तक सिंगल लेन पथ है, जिस पर यातायात चालू है. बदलाघाट से लगभग किलोमीटर फनगो हॉल्ट तक वर्तमान में पथ का कोई एलाइनमेंट नहीं है. यह एक मिसिंग लिंक है और इस मार्ग में चार नदियाँ बागमती, कात्यायनी (कमला), मृत कोसी एवं कोसी बहती है. इन नदियों पर वर्तमान में कोई सड़क पुल नहीं है. बताते चलें कि, इन चारों नदियों पर पूर्व में मीटर गेज रेल ब्रिज से रेल परिचालन किया जाता था, जो अब परित्यक्त अवस्था में है. वर्तमान में चारो नदियों पर रेलवे के द्वारा नवनिर्मित ब्रॉड गेज रेल पुल का निर्माण कर रेल परिचालन किया जा रहा है. इस पथ की योजना में इन चारो नदियों पर उच्चस्तरीय पुल प्रस्तावित है और इन पुलों के निर्माण से मिसिंग लिंक खत्म हो जायेगा एवं आवागमन भी सुगम हो जायेगा.

इस सड़क के बन जाने से सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया आदि जिले के नागरिकों को राजधानी पटना आने में सहूलियत होगी. पर्यटन के दृष्टिकोण से कात्यायनी मंदिर पर आवागमन सुगम हो जायेगा, जो कि वर्तमान में नाव द्वारा पहुँचा जाता है. खगड़िया एवं सहरसा के सबसे दुर्गम क्षेत्र में आवागमन कायम हो पायेगा. इस कार्य का डी०पी०आर० तैयार कर लिया गया है जिसके अनुसार अनुमानित लागत लगभग 14000 करोड़ रूपये है. मुख्यमंत्री कुमार ने एलाइनमेंट के निरीक्षण के उपरान्त इसका अनुमोदन प्रदान किया है और निर्माण कार्य शुरू करने का भी निर्देश दिया.

इंडो-नेपाल बॉडर रोड- पश्चिम चम्पारण के मदनपुर से प्रारंभ होकर इंडो- नेपाल बॉडर के साथ-साथ किशनगंज के गलगलिया तक जाता है और इस पथ की कुल लम्बाई 552.293 किलोमीटर प्रस्तावित है. यह पथ राज्य के सात जिलों- पश्चिम चम्पारण पूर्वी चम्पारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया एवं किशनगंज से गुजरती है. इन सात जिलों के कुल 365 गॉवों में कुल 2894   एकड़ भूमि का अधिग्रहण होना है. राज्य सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार ने इस योजना को पूर्ण करने की अवधि मार्च 2022 संशोधित कर निर्धारित की है साथ ही पुराने प्राक्कलनों को पुनरीक्षित करने की भी सहमति प्रदान की है. अब तक 93 किलोमीटर का कार्य पूर्ण हो चुका है. इस परियोजना के निर्माण की लागत 1702 करोड़ रूपये का भारत सरकार द्वारा वहन हो रहा है. राज्य सरकार द्वारा भू-अर्जन में 2233.193 करोड़ रूपये तथा पुल निर्माण में 983.81 करोड़ रूपये यानि कुल 3216  करोड़ रूपये व्यय किया जायेगा.

इस योजना के सुपौल जिले में पड़ने वाले हिस्से भपटियाही से वीरपुर का एरियल सर्वे मुख्यमंत्री कुमार द्वारा किया गया. जहॉ दो लेन का उत्कृष्ट पथ बन गया है. मुख्यमंत्री कुमार ने अन्य जिलों के काम में तेजी लाने का भी निर्देश दिया है. हवाई सर्वेक्षण के क्रम में पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव, मुख्य सचिव दीपक कुमार, प्रधान सचिव पथ निर्माण अमृत लाल मीणा एवं मुख्यमंत्री के विषेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह उपस्थित थे.