महामहिम राज्यपाल से भारतीय विदेश सेवा के अधिकारीयों ने मुलाकात की…

महामहिम राज्यपाल से भारतीय विदेश सेवा के अधिकारीयों ने मुलाकात की…

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बिहार-बँटवारे के बाद झारखंड राज्य में अधिकांश खनिज-संपदा चले जाने के बाद बिहार का आर्थिक विकास अब मूलतः कृषि पर ही आधारित हो गया है. फोटो:-पीआरडी, पटना.

शुक्रवार को महामहिम राज्यपाल फागू चौहान से आज पूर्वाह्न में बिहार के दौरे पर आये भारतीय विदेश सेवा के तीन अधिकारियों- आशीष कुमार सिन्हा, उप उच्चायुक्त, केन्या तथा मनुस्मृति एवं स्वधा रिजवी ने राजभवन में मुलाकात की.

महामहिम राज्यपाल चौहान ने भारतीय विदेश सेवा के तीनों अधिकारियों को बिहार आने पर शुभकामनाएँ और बधाई दी.

मुलाकात के दौरान बिहार की विरासत एवं यहाँ हो रहे विकास-कार्यां के बारे में जिज्ञासा व्यक्त किये जाने पर महामहिम राज्यपाल चौहान ने अधिकारियों को बताया कि बिहार की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत अत्यन्त समृद्ध रही है. उन्होंने बताया कि बोधगया, नालंदा, राजगीर, विक्रमशिला, वैशाली जैसे कई महत्वपूर्ण पर्यटकीय स्थल बिहार में हैं, जहाँ लाखों देशी-विदेशी पर्यटक प्रतिवर्ष भ्रमण के लिए आते हैं. राज्यपाल ने कहा कि बौद्ध धर्मावलम्बियों के लिए आकर्षण के प्रमुख केन्द्र बोधगया की अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति है. उन्होंने कहा कि अपने पूर्वजों के लिए श्रद्धास्वरूप पिंडदान और तर्पण करने ‘पितृपक्ष’ में लाखों श्रद्धालु गया आते हैं. राज्यपाल ने अधिकारियों को राजगीर, नालंदा, विक्रमशिला आदि की शैक्षिक दृष्टि से अन्तर्राष्ट्रीय महत्ता की भी जानकारी दी.

राज्यपाल ने कहा कि बिहार-बँटवारे के बाद झारखंड राज्य में अधिकांश खनिज-संपदा चले जाने के बाद बिहार का आर्थिक विकास अब मूलतः कृषि पर ही आधारित हो गया है. उन्होंने कहा कि खाद्य-प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना हेतु ‘नई औद्योगिक प्रोत्साहन-नीति’ के जरिये निवेशकों को आकर्षित करने के प्रयास हो रहे हैं. राज्यपाल ने ‘कृषि रोड मैप’ के माध्यम से राज्य में ‘समेकित कृषि’ (Integrated Farming) के विकास हेतु किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी.

राज्यपाल चौहान ने अधिकारियों को बताया कि बिहार एक ऐसा आपदा-प्रवण राज्य है, जिसका आधा हिस्सा सुखाड़ से तो आधा बाढ़ से तबाह हो जाता है. राज्यपाल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्व० अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में नदियों को आपस में जोड़ कर समुचित जल-प्रबंधन की नीति बनी थी, जिसपर सभी राज्यों से समुचित विमर्श कर ठोस कार्य करने की आवश्यकता है. राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में हो रहे जलवायु-परिवर्तन की दृष्टि से भी हमें अपनी तैयारियों को माकूल ढंग से समंजित करने की जरूरत है. राज्यपाल ने ‘जल-जीवन हरियाली’ के लिए प्रदूषण-नियंत्रण एवं काफी संख्या में वृक्षारोपण करते हुए हरित-आवरण बढ़ाये जाने की आवश्यकता को रेखांकित किया और इस दृष्टि से राज्य में हो रहे प्रयासों से, मिलने आए भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों को अवगत कराया.

राज्यपाल ने अधिकारियों को बताया कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता-विकास के प्रयासों को तेज करने के लिए उन्होंने सभी कुलपतियों को निदेशित किया है. उन्होंने कहा कि राज्य में सत्रों को नियमित करने हेतु अकादमिक एवं ‘परीक्षा-कैलेण्डर’ का अनुपालन करने को कहा गया है तथा विश्वविद्यालयीय क्रियाकलापों के ‘डिजिटीकरण’ हेतु ‘University Management Information System’ लागू कर दिया गया है.

राज्यपाल के साथ अधिकारियों ने विदेश सेवा में अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा तेजी से बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि केन्या जैसे कई देश भारत की समेकित प्रगति के साथ-साथ इसके विभिन्न राज्यों के विकास में भी अभिरूचि रखते हैं. उन्होंने कहा कि बिहार राज्य के पर्यटकीय स्थलों की महत्ता से विदेशियों को अवगत कराने की दिशा में सार्थक प्रयास किये जायेंगे.

राज्यपाल से भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों से मुलाकात के दौरान राज्यपाल के प्रधान सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा भी उपस्थित थे.