महामहिम राज्यपाल ने ‘अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस’ समारोह का उद्घाटन किया…

महामहिम राज्यपाल ने ‘अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस’ समारोह का उद्घाटन किया…

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जैन-साहित्य सत्य, अहिंसा, करूणा, प्रेम आदि का संदेश देने के साथ-साथ प्रकृति के साथ मनुष्य की अंतरंगता को महत्वपूर्ण मानते हुए पर्यावरण-संतुलन कायम रखने की प्रेरणा देता है. फोटो:-आईपीआरडी, पटना.

शुक्रवार को महामहिम राज्यपाल लाल जी टंडन ने पाटलिपुत्र खेल परिसर में राज्य के स्वास्थ्य विभाग एवं कला-संस्कृति व युवा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘पाँचवें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के उपलक्ष्य में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह का दीप-प्रज्वलन कर उद्घाटन करते हुए कहा कि, ‘‘भारत अपनी समृद्ध ज्ञान-परम्परा, कला और सांस्कृतिक समृद्धि के कारण ही ‘विश्वगुरू’ कहलाता था. भारत की योग-विद्या पहले भी पूरे विश्व में काफी सम्मान के साथ देखी जाती थी, किन्तु आज इसका पुनरूत्थान हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ में अपने एक संबोधन के दौरान किए गये प्रस्ताव के आलोक में ‘योग’ को मात्र 90 दिनों के भीतर अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिल गई और प्रत्येक वर्ष 21 जून को वर्ष 2015 से ‘अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस’ पूरी दुनियाँ में मनाया जाने लगा”.

राज्यपाल ने कहा कि योग पूरी दुनियाँ को भारत का अमूल्य उपहार है. यह मन और मस्तिष्क की एकात्मकता का प्रतीक है. यह मनुष्य और प्रकृति के बीच सुन्दर सामंजस्य एवं समन्वय का भी प्रतीक है. शरीर के स्वास्थ्य-संवर्द्धन के साथ-साथ यह आत्म-संयम, आत्मानुशासन और वैचारिक संतुलन बनाये रखने का भी एक प्रमुख माध्यम है.

राज्यपाल ने कहा कि पश्चिमी देशों की एक पूरी पीढ़ी जो ‘हिप्पी जेनेरेशन’ के नाम से जानी जाती थी, जब भौतिकतावाद, तनाव एवं नशे आदि की चपेट में आकर बर्बाद होने लगी, तब भारत की योग-विद्या ने ही उन्हें बचाया. आज स्थिति यह है कि विश्व के 177 से भी अधिक देश योग को अंगीकार कर अपने नागरिकों के स्वास्थ्य की न केवल रक्षा कर रहे हैं, बल्कि तनावमुक्त और सुखी सम्पन्न जीवन-बसर की भी उन्हें सुविधा प्रदान कर रहे हैं.

समारोह में राज्यपाल टंडन ने कहा कि ‘योग’ का अर्थ होता है-‘जोड़ना’. वस्तुतः ‘योग’ मन, मस्तिष्क, शरीर एवं आत्मा इन सबको एक दूसरे से जोड़ते हुए मनुष्य को स्वयं खुशहाल रखने एवं एक स्वस्थ और सम्पन्न समाज विकसित करने का सुअवसर प्रदान करनेवाला यह एक अत्यन्त सशक्त माध्यम है. योग’ वस्तुतः कुशल जीवन-यापन की अदभुत शैली है जो सभी धर्मानुयायियों एवं मतावलंबियों के बीच लोकप्रिय है.

‘अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस’ मनाने का वास्तविक उद्देश्य विभिन्न जाति, भाषा, धर्म एवं पृष्ठभूमि के लोगों के बीच भेदभाव को खत्म कर, उन्हें एक मंच पर लाकर ‘विश्व शांति’ कायम करना है. योग’ की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करना, ‘योग’ से होने वाले फायदों के बारे में बताना तथा लोगों को प्रकृति से जोड़ना आदि ‘योग दिवस’ के मुख्य उद्देश्य हैं.

राज्यपाल ने कहा कि आज पूरी दुनियाँ में पानी की बेहद कमी होती जा रही है. मौसम का मिजाज निरंतर बदल रहा है. प्राकृतिक विभीषिका से भी मानव-समुदाय त्रस्त हो रहा है. ऐसी परिस्थिति से हमें उबारने में ‘योग’ अत्यन्त सहायक है. राज्यपाल ने कहा कि आज ‘योग’ को जन-जन तक पहुँचाने की जरूरत है.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि विश्व का पहला विश्वविद्यालय बिहार के तक्षशिला में था, विश्व में सर्जरी के जनक बिहार के सुश्रुत रहे हैं, ‘पतंजलि योग संहिता’ एवं बिहार योग विद्यालय, मुंगेर विश्व-समुदाय को बिहार की अनूठी देन हैं. उन्होंने विश्व में ‘योग’ को लोकप्रिय बनाने में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल की सराहना की.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि नयी पीढ़ी को योग को उत्साहपूर्वक अपनाना चाहिए. इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग समाज के हर तबके के लोगों तक ‘योग’ को पहुँचाने हेतु प्रतिबद्ध है. कार्यक्रम में स्वागत-भाषण कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री प्रमोद कुमार ने किया. कार्यक्रम में राज्य के कई माननीय मंत्रिगण, विधायकगण, विधान पार्षदगण, सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधिगण, जन प्रतिनिधिगण सहित हजारों की संख्या में योगाभ्यासी मौजूद थे. कार्यक्रम में ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के योग-प्रशिक्षक स्वामी ब्रह्मचित्त जी द्वारा विभिन्न प्रकार के आसन, ध्यान, प्राणायाम आदि के अभ्यास कराये गए. कार्यक्रम में ‘योग’ का संकल्प भी दिलाया गया.