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भौतकी विज्ञान से संबंधित-12

…परमाणु संरचना…

वर्ष 1803 ई० में डाल्टन ने बताया कि प्रत्येक पदार्थ छोटे-छोटे कणों से बना होता है, जिन्हें परमाणु (Atom) कहते हैं. डाल्टन ने उस समय बताया कि परमाणु का किसी भी भौतिक अथवा रासायनिक विधि द्वारा विभाजन नहीं किया जा सकता लेकिन, आगे चलकर परमाणु का भी विभाजन हुआ और विभाजक कणों को पदार्थ का मौलिक कण कहा गया.

मौलिक कण (Fundamental Particles) :- भौतिकी में मूल कण वे कण हैं, जिनकी संरचना किन्हीं और कणों से नहीं हुई है और जिनका विभाजन नहीं किया जा सकता. बताते चलें कि, वर्ष 1932 ई० से पूर्व तक इलेक्ट्रॉन एवं प्रोटॉन को ही मूल कण माने जाते थे. वर्ष 1932 ई० में चैडविक द्वारा न्यूट्रॉन नामक आवेशरहित कण की खोज की गयी तब इसकी संख्या तीन हो गई. इसके बाद मूल कणों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई और वर्तमान समय तक मूल कणों की संख्या 30 से ऊपर पहुँच चुकी है.

इलेक्ट्रान (Electron) :- की खोज वर्ष 1897ई. में  जे०जे० थामसन ने की थी. उन्हें आधुनिक भौतिकी का जनक  भी कहा जाता है. इलेक्ट्रॉन एक ऋणावेशित मूल कण है तथा परमाणु के नाभिक के चारों ओर विभिन्न ऊर्जा स्तरों वाले कक्षाओं में चक्कर काटते रहते हैं. इस पर 1.6 × 10-19 कृलम्ब ऋण आवेश होता है. इसका द्रव्यमान 9.1 × 10-31 किग्रा होता है. यह एक स्थायी (stable) मूल कण है.

 प्रोटॉन (Proton) :- की खोज वर्ष 1896 ई० में गोल्डस्टीन ने की थी. यह एक धनात्मक मूल कण है, जो परमाणु के नाभिक में रहता है. यह एक स्थायी मूल कण है. इस पर 1.6 × 10-19  कूलम्ब धन आवेश होता है. इनका द्रव्यमान 1.67 × 10-27 किग्रा० होता है.

न्यूट्रॉन (Neutron) :- की खोज वर्ष 1932  ई० में चैडविक ने की थी. यह एक आवेश रहित मूल कण है, जो परमाणु के नाभिक में रहता है. इसका द्रव्यमान प्रोटान के द्रव्यमान के बराबर होता है. यह एक अस्थायी मूल कण है. न्यूट्रॉन का उपयोग जीव-विज्ञान एवं चिकित्सा विज्ञान में होता है. आवेश रहित होने के कारण इसका उपयोग नाभिकीय विखंडन में किया जाता है.

 पॉजीट्रॉन (Positron) :- की खोज वर्ष 1932  ई० में एण्डरसन ने की थी. यह एक धन आवेशित मूल कण है, जिसका द्रव्यमान व आवेश इलेक्ट्रॉन के बराबर होता है. इसीलिए इसे इलेक्ट्रॉन का एन्टि-कण(Anti-Particle of Electron) भी कहा जाता हैं.

न्यूट्रिनो (Neutrino) :- की खोज वर्ष 1930 ई० में पाउली ने की थी. यह द्रव्यमान व आवेश रहित मूल कण हैं. ये दो प्रकार के होते हैं, न्यूट्रिनो एवं एन्टिन्यूट्रिनो. इनके रोटेशन एक-दूसरे के विपरीत होता हैं.

 पाई-मेसॉन (π-meson) :- की खोज वर्ष 1935 ई० में एच० युकावा ने की थी. यह दो प्रकार की होती है- धनात्मक पाई मेसॉन एवं ऋणात्मक पाई मेसॉन. यह एक अस्थायी मूल कण होता है. इसका जीवनकाल 10-8 से० होता है. इसका द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान का 274 गुना होता है.

फोटॉन (Photon) :- यह ऊर्जा का पैकेट होता है, जो प्रकाश की चाल से चलते हैं. सभी विद्युत चुम्बकीय किरणों का निर्माण मूल कण से हुआ है. इनका विराम द्रव्यमान शून्य होता है.

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