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भौतकी विज्ञान से संबंधित-09

  1. Gravitational force = The force with which two objects attract each other towards themselves due to their mass, that force is called gravitational force.
  2. The acceleration produced in the body due to the force of gravity acting on a body is called the acceleration due to gravity (g).
  3. The value of acceleration due to gravity is maximum at the poles and minimum at the equator.
  4. The universal law of gravitation was propounded by Newton.
  5. The value of g decreases when it comes below or above the earth plane.
  6. The value of the acceleration due to gravity does not depend on the form, size, mass, etc. of the object.
  7. The value of g decreases as the speed of rotation of the earth increases and the value of g increases as the speed of rotation decreases.
  8. Weight = The force by which the earth pulls an object towards its center, that force is called the weight of the object.
  9. Weight is a vector quantity and weight is measured with a spring balance.
  10. The weight of the object acts just below the center of gravity. Therefore, by applying an upward force equal to the weight of the object on the center of gravity, we can keep the object in balance.
  11. Increasing the force, the value of pressure increases and on increasing the area, the value of force decreases.
  12. The unit of pressure is Newton/m2 (Pascal), it is a scalar quantity.
  13. If the gravitational effect is considered to be negligible, then the pressure will be the same at every point inside the liquid in equilibrium.
  14. The boiling point of all liquids increases with increasing pressure.
  15. Buoyant force = The property of the liquid, due to which it exerts an upward force on the objects, is called ‘buoyant force’. This force acts on the center of gravity removed by the objects.
  16. According to Archimedes, if an object is partially or completely submerged in a still and still liquid, then there is a virtual decrease in its weight, which is equal to the weight of the liquid displaced by the object.
  17. According to the law of flotation, the weight of a floating object should be equal to the weight of the fluid displaced by it and the center of gravity of the object and the center of gravity of the fluid displaced by the object should be on the same vertical line.
  18. Surface Tension = That property of liquid due to which there is a tendency to attain least area and the free surface always remains in the state of tension, is called surface tension.
  19. Elasticity = The property of matter due to which the object regains its original shape and form after removing the external force acting on the object, is called elasticity.
  20. The measure of work is equal to the product of the force applied and the displacement of the object in the direction of the force (work = force x displacement).
  21. SI of work The unit is Newton-meter, which is called Joule.
  22. The ability of an object to do work is called energy of that object. Its SI The unit is joule.
  23. If the force and displacement are not in the same direction, but an angle is formed between the two directions, then W = Fs cos.
  24. Potential energy = The ability to do work due to the position or shape of an object is called potential energy.
  25. According to the principle of conservation of energy, energy can only be converted from one form to another, energy can neither be created nor destroyed.
  26. Einstein gave the theory that mass is also a form of energy. The mass energy equation is E = mc2. Where m = mass, c = speed of light.
  27. The inertia of an object depends on the mass of the object.
  28. There is a difference between mass and weight of a body, because mass remains constant, while weight is variable.
  29. Longitudinal wave = When the direction of wave motion is parallel to the direction of vibration of the particles of the medium, then such wave is called longitudinal wave.
  30. Transverse wave = When the direction of wave motion is perpendicular to the direction of vibration of the particles of the medium, then this type of wave is called a transverse wave.

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  1. गुरूत्वाकर्षण बल = अपने द्रव्यामान के कारण दो वस्तुएं एक-दूसरे को जिस बल से अपनी ओर आकर्षित करती हैं, उस बल को गुरूत्वाकर्षण बल कहते हैं.
  2. किसी पिंड पर आरोपित गुरूत्व बल के कारण पिंड में जो त्वरण उत्पन्न होता है, उसे गुरूत्वीय त्वरण (g) कहते हैं.
  3. गुरूत्वीय त्वरण का मान ध्रुवों पर अधिकतम एवं भूमध्य रेखा पर न्यूनतम होता है.
  4. गुरूत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का प्रतिपादन न्यूटन ने किया था.
  5. पृथ्वी तल से नीचे या ऊपर आने पर g का मान घटता है.
  6. गुरूत्वीय त्वरण g का मान वस्तु के रूप, आकार, द्रव्यमान आदि पर निर्भर नहीं करता है.
  7. पृथ्वी की घूर्णन गति बढ़ने पर g का मान कम हो जाता है तथा घूर्णन गति घटने पर g का मान बढ़ जाता है.
  8. भार = जिस बल द्वारा पृथ्वी किसी वस्तु को अपने केंद्र की ओर खींचती है, उस बल को वस्तु का भार कहते हैं.
  9. भार एक सदिश राशि है और भार को कमानीदार तुला से मापा जाता है.
  10. वस्तु का भार गुरूत्व-केंद्र से ठीक नीचे की ओर कार्य करता है. अत: गुरूत्व-केंद्र पर वस्तु के भार के बराबर उपरिमुखी बल लगाकर हम वस्तु को संतुलित रख सकते हैं.
  11. बल बढ़ाने पर दाब का मान बढ़ जाता है तथा क्षेत्रफल बढ़ाने पर बल का मान कम हो जाता है.
  12. दाब का मात्रक न्यूटन/मी2 (पास्कल) होता है यह एक अदिश राशि है.
  13. यदि गुरूत्वीय प्रभाव को नगण्य माना जाय, तो संतुलन की अवस्था में द्रव के भीतर प्रत्येक बिंदु पर दबाव समान होगा.
  14. सभी द्रवों का क्वथनांक दाब बढ़ाने से बढ़ जाता है.
  15. उत्प्लावक बल = द्रव का वह गुण, जिसके कारण वह वस्तुओं पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है, ‘उत्प्लावक बल’ कहते हैं.यह बल वस्तुओं द्वारा हटाये गये गुरूत्व-केंद्र पर कार्य करता है.
  16. आर्किमीडिज के अनुसार अगर कोई वस्तु किसी शांत और स्थिर तरल में अंशत: या पूर्णत: डूबती है, तो इसके भार में आभासी कमी आती है, जो कमी वस्तु के द्वारा विस्थापित तरल के भार के बराबर होती है.
  17. प्लवन के नियमानुसार तैरने वाली वस्तु का वजन इसके द्वारा विस्थापित द्रव के वजन के बराबर होना चाहिए तथा वस्तु का गुरूत्व केंद्र और वस्तु के द्वारा विस्थापित द्रव का गुरूत्व केंद्र एक ही उदग्र रेखा पर होना चाहिए.
  18. पृष्ठ तनाव = द्रव का वह गुण जिसके कारण कम से कम क्षेत्रफल प्राप्त करने की प्रवृत्ति होती है तथा स्वतंत्र पृष्ठ सदैव तनाव की स्थिति में रहता है, को पृष्ठ तनाव कहते हैं.
  19. प्रत्यास्थता = पदार्थ का वह गुण जिसके कारण वस्तु पर लगने वाले बाह्य बल को हटा लेने पर वस्तु पुन: अपना मूल आकार और रूप प्राप्त कर लेता है, प्रत्यास्थता कहलाता है.
  20. कार्य की माप, लगाये गये बल तथा बल की दिशा में वस्तु के विस्थापन के ग़ुणनफल के बराबर होता है (कार्य = बल x विस्थापन).
  21. कार्य का एस.आई. मात्रक न्यूटन-मीटर होता है, जिसे जूल कहते हैं.
  22. किसी वस्तु की कार्य करने की क्षमता को उस वस्तु की ऊर्जा कहते हैं. इसका एस.आई. मात्रक जूल होता है.
  23. यदि बल और विस्थापन एक ही दिशा में नहीं है, बल्कि दोनों की दिशाओं के मध्य कोण बनता है, तो W = Fs cos.
  24. स्थितिज ऊर्जा = किसी वस्तु की स्थिति या आकार के कारण जो कार्य करने की क्षमता आ जाती है, उसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं.
  25. ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत के अनुसार, ऊर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में केवल परिवर्तन ही किया जा सकता है, ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है न तो नष्ट की जा सकती है.
  26. आइंसटीन ने यह सिद्धांत दिया कि द्रव्यमान भी ऊर्जा का ही एक रूप है. द्रव्यमान ऊर्जा समीकरण E = mc2 है. जहाँ m= द्रव्यमान, c= प्रकाश का वेग.
  27. किसी वस्तु का जड़त्व वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर करता है.
  28. किसी पिंड के द्रव्यमान व भार में अंतर होता है, क्योंकि द्रव्यमान स्थिर रहता है, जबकि भार परिवर्तनीय होता है.
  29. अनुदैर्ध्य तरंग = जब तरंग गति की दिशा माध्यम के कणों के कम्पन करने की दिशा के अनुदिश (समांतर) होती है, तो ऐसी तरंग को अनुदैर्ध्य तरंग कहते हैं.
  30. अनुप्रस्थ तरंग = जब तरंग गति की दिशा माध्यम के कणों के कम्पन करने की दिशा के लम्बवत् होती है, तो इस प्रकार की तरंगों को अनुप्रस्थ तरंग कहते हैं.

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