भौतकी विज्ञान से संबंधित-02…

भौतकी विज्ञान से संबंधित-02…

244
0
SHARE
फोटो :- गूगल.
  1. त्वरण:- किसी वस्तु के वेग परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं. इसका मात्रक, मीटर प्रति सेकण्ड होता है तथा यह एक सदिश राशि है.
  2. ध्वनिकी:- ध्वनिकी भौतिकी की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत ध्वनि तरंगों के प्रयोग व उनके गुणों का अध्ययन किया जाता है.
  3. अल्फा-कण:- अल्फा कण मुख्यतः हीलियम-नाभिक में होते हैं. इसकी संरचना दो प्रोटानों व दो न्यूट्रॉनों के द्वारा होती है. इन पर धनावेश होता है और ये गैसों का आयनीकरण करते हैं.
  4. प्रत्यावर्ती धारा:- प्रत्यावर्ती धारा वह धारा है जो कि विद्युत परिपथ में अपनी दिशा लगातार बदलती रहती है. घरों में प्रयुक्त प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति 50 हर्ज़ होती है.
  5. एन्टीमैटर या प्रतिकण:- उस पदार्थ को कहते हैं जिसके परमाणु में नाभिक, एन्टी-प्रोटॉन्स और एन्टी-न्यूट्रॉन्स का बना होता है तथा नाभिक के चारों ओर पोजीट्रॉन्स घूमते रहते हैं.
  6. आर्किमिडीज का सिद्धान्त:- किसी वस्तु को द्रव में डुबोने पर उसके भार में कमी, उसके द्वारा हटाये गये द्रव के भार के बराबर होती है.
  7. एटोमिक एनर्जी:- परमाणु विखण्डन द्वारा प्राप्त ऊर्जा को एटॉमिक एनर्जी कहते हैं और इसे एकत्रित कर शान्तिपूर्ण उद्देश्यों में उसका उपयोग किया जाता है. जैसे-कृषि, उद्योग, चिकित्सा, विद्युत आदि.
  8. एटोमिक फ्यूजन:- परमाणु के नाभिक में धन-आवेश वाले प्रोट्रॉन और न्यूट्रॉन के विकर्षण की गति बढ़ाकर समाप्त कर देने से दोनों आपस में मिल जाते हैं, इसे एटोमिक फ्यूजन कहते हैं. इस क्रिया से अपार ऊर्जा लगातार उत्पन्न होती रहती है.
  9. परमाणु संख्या:- परमाणु संख्या, किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटानों की संख्या को व्यक्त करती है. इसे प्राय: Z से प्रदर्शित करते हैं.
  10. बार:- दाब मापने की इकाई होती है. एक बार 105 पास्कल के बराबर होता है.
  11. बेकरल किरण:- यूरेनियम यौगिकों से उत्सर्जित होने वाली अल्फा, बीटा व गामा किरणें, बेकरल किरणे कहलाती हैं.
  12. बीटा-कण:- बीटा-कण ऋणावेशित होते हैं, जो कि रेडियो सक्रियता के दौरान परमाणु के नाभिक से उत्सर्जित होते हैं.
  13. बीटाट्रॉन:- बीटाट्रॉन एक त्वरक मशीन होती है, जिसके द्वारा इलेक्ट्रॉनों को अत्यधिक वेग पर त्वरित किया जाता है.
  14. क्वथनांक:- क्वथनांक किसी द्रव का वह ताप है जिस पर द्रव का संतृप्त वाष्प दाब, बाह्य दाब के बराबर हो जाता है. इस ताप पर द्रव उबलने लगता है.
  15. ब्राउनियन गति:- पदार्थ के अणुओं में होने वाली अनियमित गति को ब्राउनियन गति कहते हैं. जैसे-धुएँ के कणों आदि.
  16. केन्डिला:- केन्डिला ज्योति-तीव्रता का मात्रक है.
  17. केशिकत्व(Capillarity):- पृष्ठ-तनाव के कारण किसी बारीक नली में द्रव के ऊपर चढ़ने या नीचे उतरने की घटना को कोशिकत्व कहते हैं.
  18. अपकेन्द्रीय बल:- वृत्ताकार मार्ग में घूमती हुई वस्तु पर केन्द्र के बाहर की ओर लगने वाले बल को अपकेन्द्रीय बल कहते हैं.
  19. अभिकेन्द्रीय बल:- किसी वृत्ताकार पथ पर घूमती हुई वस्तु पर वृत्त के केन्द्र की ओर लगने वाले बल को अभिकेन्द्रीय बल कहते हैं. इस बल के अभाव में वस्तु वृत्ताकार पथ पर नहीं घूम सकती.
  20. चालक(Conductor):- चालक वे पदार्थ हैं जिनसे होकर विद्युत धारा सरलता से प्रवाहित होती है.
  21. संवेग-संरक्षण:- यदि किसी निकाय पर कोई बाह्य बल कार्य न कर रहा हो तो, निकाय का कुल संवेग नियत रहता है.
  22. क्यूरी(Curie):- क्यूरी रेडियो ऐक्टिव पदार्थ के सक्रियता की इकाई है. किसी रेडियो पदार्थ में 3.7×1010 विघटन प्रति सेकण्ड होता हैं तो उस पदार्थ की सक्रियता एक (01) क्यूरी कहलाती है.
  23. विसरण:- दो या दो से अधिक पदार्थों का स्वत: एक-दूसरे में मिलकर समाँग मिश्रण बनाने की क्रिया को विसरण कहते हैं.
  24. विवर्तन(Diffusion):- जब प्रकाश या ध्वनि तरंगें किसी अवरोध से टकराती हैं, तो वे अवरोध के किनारों पर मुड़ जाती है.तरंगों के इस प्रकार मुड़ने की घटना को विवर्तन कहते हैं.
  25. डायोड:- एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक युक्ति है जिसमें केवल दो इलेक्ट्रोड, कैथोड व प्लेट होते हैं. इसके द्वारा इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन करके धारा प्रवाहित की जाती है.
  26. डॉप्लर-प्रभाव:- जब किसी ध्वनि स्रोत व श्रोता के बीच आपेक्षिक गति होता है तो श्रोता को ध्वनि की आवृत्ति, स्वाभाविक आवृत्ति से बदली हुई प्रतीत होती है. इसी को डाप्लर-प्रभाव कहा जाता हैं.
  27. प्रत्यास्थता (Elasticity):- किसी वस्तु के पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण वस्तु किसी विरूपक बल के द्वारा हुये परिवर्तन का विरोध करती है व विरूपक बल हटा लेने पर अपनी पूर्व अवस्था को प्राप्त कर लेती है.