भारत को मिली कुटनीतिक कामयाबी, मसूद अजहर वैश्विक आतंकी घोषित…

भारत को मिली कुटनीतिक कामयाबी, मसूद अजहर वैश्विक आतंकी घोषित…

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संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि मसूद अजहर का नाम संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में जुड़ गया है.फोटो:-गूगल.

बुधवार को संयुक्त राष्ट्र संघ की 1267वीं बैठक में आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के सरगना  मसूद अजहर वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि मसूद अजहर का नाम संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में जुड़ गया है.

मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित किया जाना भारत सरकार की बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है. ज्ञात है कि, 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद से ही भारत इसके लिए लगातार जोर दे रहा था वहीं, चीन लगातार अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर राह में रोड़ा अटका रहा था. बतातें चलें कि, पिछले महीने 13 मार्च को भी वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन ने वीटो पॉवर का इस्तेमाल किया था. उसके बाद से से ही विश्व के कई देश चीन के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया और आलोचना कर रहे थे.

मसूद अजहर वैश्विक आतंकी घोषित करने पर संयुक्त राष्ट्र की समीति ने कहा कि,  ‘सुरक्षा परिषद समिति 1267 (1999), 1989 (2011) और 2253 (2015) आईएसआईएल, अल-कायदा, और संबंधित व्यक्तियों, समूहों, उपक्रमों और संस्थाओं से संबंधित प्रस्तावों के अनुसार, प्रतिबंधित करने की मंजूरी देती है.’   

फ्रांस सरकार ने मसूद को UNSC 1267 प्रतिबंध समिति के द्वारा आतंकवादी घोषित किए जाने के फैसले का स्वागत किया है. एक बयान में फ्रांस ने कहा है कि, फरवरी में पुलवामा हमले के बाद ‘फ्रेंच कूटनीति लगातार अजहर को प्रतिबंधित करने के प्रयास कर रही थी. फ्रांस ने 15 मार्च को मसूद अजहर के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिबंध लगाया था.’  

फ्रांस सरकार ने मसूद को UNSC 1267 प्रतिबंध समीति के दवारा आतंकवादी घोषित किये जाने के फैसले क अस्वाग्त किया है. एक ब्यान में फ्रांस ने कहा है कि, फरवरी में पुलवामा हमले के बाद से ही ‘फ्रेंच कूटनीति लगातार अजहर को प्रतिबंधित करने का प्रयास कर रही थी. फ्रांस ने 15 मार्च को मसूद अजहर के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर प्रतिबंध भी लगाया था. वहीं, ब्रिटिश उच्चायुक्त ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि, हम यह देखने के लिए इंतजार कर रहे हैं कि क्या चीन जो इसका विरोध कर रहा है, वो अब इस मुद्दे पर क्या रूख अपनाता है.