‘बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली’ के तहत उपस्थिति दर्ज कराने में अनियमितता बरतने वाले...

‘बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली’ के तहत उपस्थिति दर्ज कराने में अनियमितता बरतने वाले शिक्षक/शिक्षकेत्तर कर्मी दंडित होंगे…

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‘बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली’ के तहत विश्वविद्यालय/महाविद्यालय के शिक्षकां एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों को शत-प्रतिशत निबंधित कराते हुए उनके द्वारा इस प्रणाली के तहत नियमित तौर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना सुनिश्चित करने को कहा गया है. फोटो:-आईपीआरडी, पटना.

गुरुवार को महामहिम राज्यपाल लाल जी टंडन ने राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षण-व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से कक्षाओं में शिक्षकों की उपस्थिति तथा कार्यालयों में शिक्षकेत्तर कर्मियों की मौजूदगी को नियमित रूप से सुनिश्चित कराने के लिए सभी कुलपतियों को निदेशित किया है. राज्यपाल टंडन ने कहा है कि कॉलेजों विश्वविद्यालयीय विभागों एवं कार्यालयों में स्थापित ‘‘बायोमैट्रिक उपस्थिति उपकरण’’ शोभा के संयंत्र मात्र बनकर नहीं रह जाएँ -यह हर हालत में सुनिश्चित किया जाना चाहिए.

इस क्रम में राज्यपाल टंडन ने मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के अंतर्गत संस्थापित ‘बायोमैट्रिक उपस्थिति उपकरणों’ से प्राप्त आँकड़ों का सूक्ष्मतापूर्वक विश्लेषण करने का जो निदेश दिया था, उसके तहत कुछ निराशाजनक तथ्य भी सामने आए हैं. ‘बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली’ के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि 138 शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों ने मगध विश्वविद्यालय के अंतर्गत अपने कॉलेजों/कार्यालयों में नवम्बर 2018 से जनवरी 2019 के बीच तीन महीने की अवधि में एक दिन भी अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करायी है. ज्ञातव्य है कि विश्वविद्यालयीय परिनियमों एवं यू॰जी॰सी॰ के प्रावधानों के अनुरूप प्रत्येक कार्य-दिवस में शिक्षकों की 05 घंटे की उपस्थिति अपने शिक्षण-संस्थानों में आवश्यक है. राजभवन ने उक्त संदर्भ में मगध विश्वविद्यालय के कुलपति को भेजे अपने पत्र में कहा है कि बिना कार्य किए वेतन प्राप्त करना वित्तीय अनियमितता और अनुशासनहीनता का मामला बनता है. पत्र में कहा गया है कि गैरकानूनी ढंग से वेतन प्राप्त करने के इस मामले की सम्पूर्णता में जाँच किया जाना बेहद जरूरी है. राज्यपाल सचिवालय ने कुलपति को भेजे निदेश में कहा है कि वैसे शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों के वेतन-स्थगन पर गंभीरता से विचार करते हुए निर्णय लिया जाना चाहिये, जो इस मामले में संलिप्त रहे हैं.

जाँच के क्रम में यह भी पाया गया है कि इस विश्वविद्यालय में 10 शिक्षकों एवं 47 शिक्षकेत्तर कर्मियों ने ‘बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली’ के तहत अपना नाम भी उपकरण में निबंधित/दर्ज (Registered/Enrolled) नहीं कराया है.

महामहिम राज्यपाल के निदेशानुरूप मगध विश्वविद्यालय के कुलपति को संबंधित मामले में दोषियों के विरूद्ध जाँचोपरान्त सख्त अनुशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है. साथ ही कुलपति को ‘बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली’ के तहत विश्वविद्यालय/महाविद्यालय के शिक्षकां एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों को शत-प्रतिशत निबंधित कराते हुए उनके द्वारा इस प्रणाली के तहत नियमित तौर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना सुनिश्चित करने को कहा गया है. ऐसा करने में विफल रहनेवाले शिक्षकों/शिक्षकेत्तर कर्मियों का वेतन स्थगित कर देने का भी निदेश कुलपति को दिया गया है.

महामहिम राज्यपाल-सह-कुलाधिपति के निदेशानुरूप इस संदर्भ में आवश्यक कार्रवाई करते हुए तथ्यपूर्ण प्रतिवेदन अविलंब भेजने हेतु कुलपति को कहा गया है.