पशुधन का विकास भारत के आर्थिक सशक्तीकरण हेतु बेहद जरूरी है :-...

पशुधन का विकास भारत के आर्थिक सशक्तीकरण हेतु बेहद जरूरी है :- राज्यपाल

17
0
SHARE
स्वच्छता, सफाई एवं जल-संरक्षण के कार्यों को मूर्त रूप देने के लिए सभी विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. फोटो:-पीआरडी, पटना.

मंगलवार को महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति फागू चौहान ने पटना स्थित अधिवेशन भवन में आयोजित बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के ‘प्रथम दीक्षांत समारोह’ को अध्यक्षीय पद से संबोधित करते हुए कहा कि ‘‘भारत एक कृषि प्रधान देश है. पशुपालन भारतीय कृषि का अभिन्न अंग रहा है. पशुधन हमेशा  से भारत के आर्थिक-चिन्तन का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. पशुधन का विकास भारत के आर्थिक सशक्तीकरण हेतु बेहद जरूरी है. कृषि और पशुपालन को प्रोत्साहित कर हम ग्रामीण क्षेत्र के करोड़ों किसानों और पशुपालकों को रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़ सकते हैं. पशुपालन हो, मछली-पालन हो, मुर्गी-पालन हो या मधुमक्खी-पालन -इन पर किया गया निवेश ज्यादा लाभकारी होता है. पशु एवं मत्स्य विज्ञान में शिक्षा, शोध, प्रसार एवं प्रशिक्षण में गुणवत्तापूर्ण विकास के लिए ही बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना की स्थापना की गई है.’’

राज्यपाल चौहान ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस विश्वविद्यालय में विभिन्न विषयों में राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की शोध परियोजनाएँ चल रही हैं. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन शोध परियोजनाओं के सकारात्मक परिणामों से हमारे किसानों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान में सहायता मिलेगी.

राज्यपाल चौहान ने कहा कि देश एवं राज्य में देशी नस्ल की गायों के सम्वर्द्धन हेतु भ्रूण-प्रत्यारोपण तकनीक की एक परियोजना इस विश्वविद्यालय में चलायी जा रही है. फलतः बिहार राज्य में देसी नस्ल की गायों के संरक्षण में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि विश्व बैंक एवं आई०सी०ए०आर० के सहयोग से ‘राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना’ इस विश्वविद्यालय में चल रही है, जिससे यहाँ के शिक्षा और अनुसंधान के स्तर में वृद्धि होगी.

राज्यपाल चौहान ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों में ‘स्वच्छता-अभियान’ चलाने हेतु निर्देश दिये गये हैं. बड़ी संख्या में पौधारोपण कर ‘हर परिसर, हरा परिसर’ कार्यक्रम को सफल बनाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150वीं जयन्ती-वर्षगाँठ के सुअवसर पर संकल्प लिया गया है कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में ‘जलशक्ति कैम्पस’ और ‘स्वच्छ कैम्पस’ की अवधारणा को साकार किया जायेगा. उन्होंने कहा कि, विश्वविद्यालय को गाँवों को गोद लेकर ‘जलशक्ति ग्रामों’ के सपने को भी साकार करना है. स्वच्छता, सफाई एवं जल-संरक्षण के कार्यों को मूर्त रूप देने के लिए सभी विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. ‘जल-जीवन-हरियाली’ योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा जल-संरक्षण एवं हरित-आवरण बढ़ाने के प्रयासों की भी राज्यपाल ने प्रशंसा की.

राज्यपाल चौहान ने मत्स्य-उत्पादन में वृद्धि के जरिये अपनी खपत के अनुरूप आत्म-निर्भरता हासिल कर लेने के लिए भी बिहार सरकार को बधाई दी. उन्होंने भारतीय नस्ल के वैसे पशुधन के विकास को भी जरूरी बताया जो यहाँ की जलवायु के अनुरूप होते हैं तथा रोगों के संक्रमण से बचे रहने में भी ज्यादा सक्षम होते हैं.

राज्यपाल चौहान ने कहा कि आज का युग ज्ञान का युग है. विद्यार्थियों को अपनी जिज्ञासा को हमेशा  जागृत रखना चाहिए. विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ‘‘आपने जो शिक्षा प्राप्त की है, आप उसका पूरा सदुपयोग करेंगे. जो लक्ष्य चुना है, उसे पाने के लिए पूरी निष्ठा और एकाग्रता के साथ काम करें. आप अपने उज्ज्वल भविष्य का सपना लेकर आगे बढ़ें और अपनी सफलता की कहानी स्वयं लिखें, मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.’’

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार सरकार ‘तीसरे कृषि रोड मैप’ के कार्यान्वयन के माध्यम से राज्य में पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन का भी पूरा विकास कर रही है. उन्होंने जैविक खेती तथा गोवंश के विकास हेतु राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी. उन्होंने पशुपालकों को भी ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ के जरिये लाभान्वित किए जाने की बात बतायी.

कार्यक्रम में दीक्षांत-भाषण देते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक डॉ० मंगला राय ने कहा कि आज देश में अन्न-उत्पादन करीब छः गुना, दुग्ध-उत्पादन 10 गुना, मछली उत्पादन 15 गुना और अंडा-उत्पादन 50 गुना बढ़ गया है. डॉ० राय ने भी मत्स्य-उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बिहार की आर्थिक प्रगति के लिए लाभप्रद बताया. अपने विद्वतापूर्ण उद्बोधन में डॉ० राय ने कहा कि ‘अनुशासन’ स्वयं पर स्वयं के शासन से विकसित होता है. उन्होंने स्वाभिमान को जरूरी बताते हुए ज्ञान के अभिमान से बचने की सलाह विद्यार्थियों को दी. डॉ० राय ने कहा कि सत्य सृजन के द्वार खोलता है. अतः इंसान को बराबर सत्य और न्याय के पक्ष में भयहीन होकर खड़ा होना चाहिए.

कार्यक्रम में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ० रामेश्वर सिंह ने विश्वविद्यालय की प्रगति की रूपरेखा प्रस्तुत की.

कार्यक्रम में महामहिम राज्यपाल चौहान, कृषि तथा पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री प्रेम कुमार, कृषि वैज्ञानिक एवं आई०सी०ए०आर० के पूर्व महानिदेशक मंगला राय, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की सचिव एन॰ विजयलक्ष्मी सहित कई कृषि वैज्ञानिकों को अंगवस्त्रम् एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित भी किया गया.

महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति ने ‘दीक्षांत-समारोह’ के दौरान स्वर्णपदक प्राप्त करनेवाले तथा उपाधि प्राप्त करनेवाले विद्यार्थियों के बीच पदक एवं डिग्रियों को वितरित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की.