पर्यावरण संरक्षण के लिए बिहार सरकार की अनूठी पहल है जल-जीवन-हरियाली :-...

पर्यावरण संरक्षण के लिए बिहार सरकार की अनूठी पहल है जल-जीवन-हरियाली :- जल संसाधन मंत्री

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विशेषज्ञों के अनुसार अगले साल तक देश के लगभग 20 शहरों से भूगर्भीय जल पूरी तरह से समाप्त हो जायेगा. फोटो:-पीआरडी, पटना.

मंगलवार को पटना के अधिवेशन भवन में जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार, आइआइएम अहमदाबाद तथा ऑस्ट्रेलियन सेंटर फॉर इंटरनेशनल एग्रीकल्चर रिसर्च एवं आसाम व तेलंगाना के जल संसाधन विभागों के संयुक्त तत्वावधान में “दक्षिण एशिया में उत्पादक एवं सतत कृषि : कुशल एवं सहभागी सिंचाई संस्थाओं की उपयोगिता” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया.

इस कार्यशाला का उद्घाटन जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने किया. इस मौके पर उपस्थित विशेषज्ञों द्वारा ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, बिहार, असम और अन्य जगहों पर विभिन्न सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों द्वारा आम लोगों में सिंचाई प्रणालियों के इस्तेमाल और उसके प्रभावों पर किए गए अध्ययनों के आधार पर आइआइएम (IIM) और एसीआईएआर (ACIAR) के शोधकर्ताओं द्वारा इससे जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा की गयी.

इस अवसर पर कार्यशाला को संबोधित करते हुए संजय कुमार झा ने जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों और उनसे निपटने के लिए बिहार सरकार की पहल जल-जीवन-हरियाली अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी दी. जल संसाधन मंत्री झा ने “जल संकट से विगत वर्षों में न केवल भू-जल का क्षय हुआ है, बल्कि सिंचाई के लिए पानी की कमी भी हुई है. विशेषज्ञों के अनुसार अगले साल तक देश के लगभग 20 शहरों से भूगर्भीय जल पूरी तरह से समाप्त हो जायेगा.”

एसीआईएआर (ACIAR) के विशेषज्ञ लीन क्रेस ने कहा कि मूल रूप से “ग्रामीण आबादी वाले बिहार सरीके क्षेत्रों में सहभागी सिंचाई की विशेष अहमियत है, तथा थाईलैंड जैसे देशों के अनुभव बताते हैं कि समुदाय के सहयोग से इसे अत्यंत प्रभावशाली बनाया जा सकता है.

विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में बताते हुए जल संसाधन मंत्री झा ने कहा कि बिहार में बाढ़ और सूखे की विषम परिस्तिथियों से निपटने के उद्देश्य से हम बिहार की कुछ प्रमुख नदियों को आपस में जोड़ने की दिशा में कार्यरत हैं. इसी क्रम में, नालंदा, गया और नवादा के क्षेत्रों में गंगा का पानी ले जाने की मुख्यमंत्री की परिकल्पना पर आधारित योजना पर जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, “इससे इन तीन इलाकों को साल भर गंगा का पानी पीने के लिए मिलेगा तथा साथ ही फल्गु नदी में भी हमेशा कम से कम दो फीट पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी.”

जल संसाधन मंत्री झा ने वर्षा जल के संचय पर शुरू की जा रही गंगा लिफ्ट पाइप लाइन योजना – जिससे दक्षिण बिहार के तीन जिलों में गंगा जल पहुँचाया जायेगा- को जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत अपने विभाग की विशेष योजना बताया. बिहार के जल संसाधन विभाग की इस अभियान में एक अहम भूमिका है.

इसके अलावा सिंचाई की समस्या से निजात पाने के लिए आम जनता की भागीदारी को आवश्यक बताते हुए जल संसाधन मंत्री झा ने इसके लिए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सरकार के प्रयासों से जोड़ने की बात कही. “सिंचाई को जीवंत बनाने के लिए जीविका की महिलाऐं एक सशक्त माध्यम हैं.” खुद मुख्यमंत्री भी कई मौकों पर इन महिलाओं की समझ, लगन और जुझारूपन की तारीफ़ करते रहे हैं. “इनकी कृषि और अर्थ दोनों के प्रबंधन की समझ शहरी लोगों से कहीं ज्यादा तीक्ष्ण है,” जल संसाधन मंत्री झा ने कहा.

आईआईएम् (IIM) अहमदाबाद के प्रोफ़ेसर वसंत गाँधी ने अपने वक्तव्य में इस तीन साल से चले आ रहे अंतर-देशीय अध्यन में जल संसाधन विभाग द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया. कार्यशाला में असम, तेलंगाना में भी सहभागी सिंचाई पर किये गए शोध कार्यों पर चर्चा हुई.