पत्रकार संगठनों का संयुक्त धरना प्रदर्शन…

पत्रकार संगठनों का संयुक्त धरना प्रदर्शन…

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विभिन्न पत्रकार संगठनों ने अपनी 05 सूत्री मांगों को लेकर संयुक्त धरना / प्रदर्शन किया.

शनिवार को पटना के गांधी मैदान स्थित कागिल चौक पर विभिन्न पत्रकार संगठनों ने अपनी 05 सूत्री मांगों को लेकर संयुक्त धरना / प्रदर्शन किया. इस अवसर पर बड़ी संख्या में मीडियाकर्मियों ने भाग लिया.

मांगें ….

  1. पत्रकार सम्मान पेंशन योजना में मुफ्फ्लिस के पूर्ण कालिका पत्रकारों को शामिल किया जाए.
  2. महारष्ट्र सरकार के तर्ज पर बिहार में भी पत्रकार सुरक्षा कानून अविलंब बनाया जाय.
  3. सभी खबारों के प्रबंधन द्वारा मुफ्फ्लिस पत्रकारों को परिचय पत्र और अन्य सुविधाए दी जाए.
  4. पत्रकार उत्पीडन के घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस मुख्यालय या राज्य सरकार के स्तर पर पत्रकार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी की संयुक्त स्थायी कमिटी बनाई जाए.
  5. संगद संकलन के दरम्यान हत्या / दुर्घटना में मौत या एनी हादसे के शिकार पत्रकारों के परिजनों के सरकारी स्तर पर सरकारी कर्मियों को मिलने वाली मुआवजा राशि एवं अन्य सुविधाएं दी जाएं.

मीडियाकर्मियों पर बार-बार हमले होते रहते है और इन हमलों में मीडियाकर्मियों घायल भी हो जाते हैं लेकिन, उन्हें ना राज्य या केंद्र की सरकार की ओर से कोई सुरक्षा या किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता ही मिलती है. यहाँ तक की मीडियाकर्मी जहाँ काम करते हैं वहां से भी किसी प्रकार की सहायता मिलती है.

बताते चलें कि, आजादी के कई सालों के बाद भूतपूर्व प्रधानमन्त्री स्व० इंदिरा गांधी ने पत्र-पत्रिका और अखबार के लिए कानून बनाये थे आज कई साल बीत गये लेकिन, उस कानून का किसी भी सरकार ने संशोधन  नहीं किया. सरकारें आती है और चली जाती है लेकिन,पत्रकार हमेशा दिन हो या रात अपने परिवार से दूर होकर साल के 365 दिनों तक एक ही काम करते हैं वो है “समाचार का संकलन करना”. समाचार संकलन के दौरान उन्हें कई प्रकार की परेशानियां होती है कभी मार-पीट के शिकार होते है तो कभी प्रशासनिक स्तर पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है या उन्हें जान मारने की धमकी मिलती है या पत्रकारों की हत्या कर दी जाती है लेकिन, पत्रकार अपना काम करते रहते है.

सम या विषम परिस्थिति में पत्रकार अपनी पूरी ताकत से समाचार संकलन का काम करते रहते है. अभी हाल ही में बिहार राज्य में पत्रकार पेंशन योजना लागु की गई है जिसका लाभ शायद ही कुछ लोगों को मिले. राज्य सरकार खानापूर्ति करने के लिए इस योजना को लागू की है जिसका विरोध सभी पत्रकार संगठनों ने किया है.