पछतावा…

पछतावा…

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कहा जाता है कि मुसीबत जब आती है तो छप्पर फाड़ कर आती है. यह कहावत वास्तविक में राज्य  बिहार में चिरतार्थ हो रही है.

पूरी दुनिया में वैश्विक महामारी का रूप ले चुकी है कोरोना फिर भी देश एवं राज्यवासी इस संकट में भी नियम का उल्लंघन करने से नहीं चूक रहें  है.

बुजुर्गों से बात-चीत करने पर कहा कि आज से पहले भी ऐसी कई बीमारियाँ हुई है जिसकी दवा बाद में मिली हो या कुछ ऐसी भी  बीमारी  हुई है जिसमें लोग अपने घर के किसी एक कमरे को कोरण्टाईन किया हो. आज से कई साल पहले भी एक ऐसी ही बीमारी हुई थी जिसमें हम सभी लोगों ने उसे छोटी माता (चेचक) का नाम दिया था. उस वक्त भी लोगों ने अपने आप को  कोरण्टाईन किया था. वर्तमान समय में भी जेबी खुद को कोरण्टाईन करने की बात है तब लोग खुद को कोरण्टाईन नहीं कर रहें हैं

बताते चलें कि, विश्व में इससे पहले भी कई महामारी आई और आपसी सदाचार और संवयन के कारन हम  सभी ने इन बीमारियों पर विजय प्राप्त की. वर्तमान समय में कोरोना एक विशाल संकट के रूप में हम सबके सामने है. ज्ञात है कि पूरी दुनिया में बिहार का नाम आदर से लिया जाता है तो फिर हमसब मिलकर अपने राज्य का नाम डुबाने पर क्यों तुले हुये हैं? राज्य में जिस तरह से कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ रही है फिर भी राज्यवासी इस महासंकट को दरवाजे पर खड़ा होने के बाद भी उसे अनदेखा कर रहें हैं. अभी हाल के दिनों में हुई मौतों के आधार पर हम सभी राज्यवासियों को सोचना चाहिए कि महासंकट कोरोना कैसे दूर हो … इस पर विचार अवश्य ही करना चाहिए.  अन्यथा देर हो जाने के बाद चिड़ियाँ चुग गई खेत और हम पछताएं….

शहर के मशहूर चिकित्सक डॉ० पंकज कुमार से बात करने पर राज्यवासियों से अपील करते हुये कहा कि ….….

राज्य बिहार में एक तरफ कोरोना अपने विकराल स्वरूप की ओर अग्रसर है वहीं दूसरी तरफ बिहार का शोक कही जाने वाली नदी कोशी और सहायक नदियां भी अपने शबाव पर है.हर दिन और हर रात राज्य के जान-माल को तबाह कर रही है. राज्य के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं और लोग गाँव छोडकर ऊंचे स्थानों पर पलायन करने को मजबूर है. ऐसी स्थिति में सोशल डिस्टेन्सिग का पालन कैसे होगा…? साथ ही मास्क और गल्ब्स का उपयोग कैसे करेंगे.

वर्तमान समय में दरवाजे पर खड़ी मौत को देखकर भी निश्चिंत और बेखबर होकर लॉक डाउन का उल्लंघन करने का कोई मौका नहीं छोड़ रह हैं….

संकलन :- अशोक सिन्हा और भास्कर.