देश-दुनिया में 19 मई का इतिहास…

देश-दुनिया में 19 मई का इतिहास…

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मात्र 18 वर्ष की उम्र में ही नीलम संजीव रेड्डी स्वाधीनता संग्राम के आंदोलन में कूद पड़े.फोटो:-गूगल.
  • वर्ष 1568 में इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने स्कॉटलैंड की रानी मैरी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था.
  • वर्ष 1571 में मिग्यूल लोपेज डी जगाज्पी ने फिलीपींस की राजधानी मनीला की स्थापना की थी.
  • वर्ष 1792 में रूसी सेना पोलैंड में दाखिल हुई थी.
  • वर्ष 1881 में आधुनिक तुर्की के निर्माता कमाल अतातुर्क का जन्म सलोनिका (सैलोनिका) के एक किसान परिवार में हुआ था. इनके पिता का नाम अली रजा और माता का नाम जुवैदा था. कमाल के पिता अली रजा सलोनिका के चुंगी दफ्तर में क्लर्क थे. कमाल के बचपन का नाम मुस्तफा था. जन्म के कुछ वर्ष बाद ही पिता की मृत्यु हो गयी तब माता जुबैदा ने मजहबी तालीम दिलाने के उद्देश्य से मदरसे में दाखिल करा दिया जहाँ उनके सीनियर छात्रो के तंग (रैंगिंग) करने पर वह मरने मारने पर उतर आए.उसके बाद उन्हें मोनास्तीर (मैनिस्टर) के सैनिक स्कूल में भर्ती कराया गया.परन्तु वहाँ भी उनका मर मिटने वाला उग्रवादी स्वभाव बना रहा लेकिन सैन्य-शिक्षा में दिलचस्पी के कारण उनकी पढाई बदस्तूर जारी रही, उसमें कोई व्यवधान नहीं आया.बालक मुस्तफा उग्र अवश्य था परन्तु गणित में उसकी गति आश्चर्य जनक थी. अध्यापक के ब्लैक बोर्ड पर सवाल लिखते ही वह उसे मुँहजबानी हल कर दिया करता था. उसमें कमाल की काबिलियत देखकर स्कूल के गणित अध्यापक कैप्टन मुस्तफा उफैंदी ने नाम बदल कर कमाल रख दिया। उसके बाद ही वह कमाल पाशा के नाम से जाना जाने लगा.कुछ काल तक उद्दण्डतापूर्ण जीवन बिताने के बाद वह वतन नामक एक गुप्त क्रान्तिकारी दल के पहले सदस्य बने और थोड़े ही दिनों बाद उसके नेता हो गए.
  • वर्ष 1904 में टाटा समूह के संस्थापक जमशेद जी टाटा का निधन बैड नौहाइम (जर्मनी) में हुआ था.
  • वर्ष 1910 में नाथूराम गोडसे का जन्म नासिक (महाराष्ट्र) के निकट मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था. इनके पिता विनायक वामनराव गोडसे पोस्ट आफिस में काम करते थे और माता लक्ष्मी गोडसे एक गृहणी थीं. नाथूराम के जन्म का नाम रामचन्द्र था. बताते चलें कि, नाथूराम के जन्म से पहले इनके माता-पिता की सन्तानों में तीन पुत्रों की अल्पकाल में ही मृत्यु हो गयी थी केवल एक पुत्री ही जीवित बची थी इसलिये, इनके माता-पिता ने पुरुष सन्तानों की जीवन पर श्राप समझ कर ईश्वर से प्रार्थना की थी कि यदि अब कोई पुत्र हुआ तो उसका पालन-पोषण लड़की की तरह किया जायेगा। इसी मान्यता के कारण बालक रामचन्द्र की नाक बचपन में ही छिदवा दिया गया और मान्यता अनुसार रामचन्द्र को बालकाल में अपने नाक में एक नथ। भी पहनना पड़ता था इसी के कारण बालक रामचन्द्र को नथुराम के नाम से बुलाया जाने लगा.इनकी प्रारम्भिक शिक्षा पुणे में हुई थी परन्तु हाईस्कूल के बीच में ही अपनी पढ़ाई-लिखाई छोड़ दी तथा उसके बाद कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली.धार्मिक पुस्तकों में गहरी रुचि होने के कारण रामायण, महाभारत, गीता, पुराणों के अतिरिक्त स्वामी विवेकानन्द, स्वामी दयानन्द, बाल गंगाधर तिलक तथा महात्मा गान्धी के साहित्य का इन्होंने गहरा अध्ययन किया था.राजनैतिक जीवन के प्रारम्भिक दिनों में नाथूराम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हो गये, और अन्त में 1930 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी छोड़ दिया और अखिल भारतीय हिन्दू महासभा में चले गए. 1940 में हैदराबाद के तत्कालीन शासक निजाम ने उसके राज्य में रहने वाले हिन्दुओं पर बलात जजिया कर लगाने का निर्णय लिया जिसका हिन्दू महासभा ने विरोध करने का निर्णय लिया। वर्ष 1947 में भारत का विभाजन और विभाजन के समय हुई साम्प्रदायिक हिंसा ने नाथूराम को अत्यन्त उद्वेलित कर दिया। विभाजन के समय हुए निर्णय के अनुसार भारत द्वारा पकिस्तान को 75 करोड़ रुपये देने थे, जिसमें से 20 करोड़ दिए जा चुके थे. उसी समय पाकिस्तान ने भारत के कश्मीर प्रान्त पर आक्रमण कर दिया जिसके कारण भारत के तत्कालीन प्रधानमन्त्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और गृहमन्त्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में भारत सरकार ने पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये न देने का निर्णय किया, परन्तु भारत सरकार के इस निर्णय के विरुद्ध गांधी अनशन पर बैठ गये.गांधी के इस निर्णय से क्षुब्ध नाथूराम गोडसे और उनके कुछ साथियों ने महात्मा गांधी की हत्या करने का निर्णय लिया। 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे दिल्ली के बिड़ला भवन में प्रार्थना-सभा के समय से 40 मिनट पहले पहुँच गये. जैसे ही गान्धी जी प्रार्थना-सभा के लिये परिसर में दाखिल हुए, नाथूराम ने पहले उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम किया उसके बाद बिना कोई बिलम्ब किये अपनी पिस्तौल से तीन गोलियाँ मार कर गांधी का अन्त कर दिया. गोडसे ने उसके बाद भागने का कोई प्रयास नहीं किया।
  • वर्ष 1913 में भारत के छठे राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी का जन्म इल्लुर ग्राम, अनंतपुर (आंध्र प्रदेश) ज़िले के कृषक परिवार में हुआ था.इनके पिता का नाम नीलम चिनप्पा रेड्डी था जो कांग्रेस पार्टी के काफ़ी पुराने कार्यकर्ता और प्रसिद्ध नेता टी० प्रकाशम के साथी थे.नीलम संजीव रेड्डी की प्राथमिक शिक्षा ‘थियोसोफिकल हाई स्कूल’ अड़यार, मद्रास में सम्पन्न हुई. महात्मा गांधी के आह्वान पर जब लाखों युवा पढ़ाई और नौकरी का त्याग कर स्वाधीनता संग्राम में जुड़ रहे थे, तभी नीलम संजीव रेड्डी मात्र 18 वर्ष की उम्र में ही इस आंदोलन में कूद पड़े और पढ़ाई छोड़ दी थी.रेड्डी 1940 से 1945 तक जेल में कैद रहे. प्रथम बार सितम्बर 1940 में छह माह के लिए जेल गए. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान इन्हें 11 अगस्त 1942 को गिरफ्तार करके अमरावती तथा वेल्लूर की जेलों में कैद थे.रिहाई के बाद 1946 में यह मद्रास विधायिका में निर्वाचित हुए तथा 1947 में मद्रास विधायिका में सेक्रेटरी बनाए गए.वर्ष 1947 में यह भारत की संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य भी रहे. 10 मार्च 1962 को इन्होंने कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था.12 मार्च 1962 को पुन: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, जब डी०संजीवैय्या मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया. 09 जून 1964 को रेड्डी राष्ट्रीय राजनीति में आए और प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने इन्हें केन्द्र में स्टील एवं खान मंत्रालय प्रदान किया. वर्ष 1964 में ही यह राज्यसभा के लिए मनोतीत हुए और 1967 तक इसके सदस्य बने रहे.17 मार्च 1967 को इन्हें लोक सभा का स्पीकर बनाया गया लेकिन, 19 जुलाई 1969 को इन्होंने लोकसभा के स्पीकर पद से त्यागपत्र दे दिया. 21 जुलाई को सायंकाल 03 बजे तक नाम वापस लिया जा सकता था. तभी 03 बजकर 05 मिनट पर चुनाव अधिकारी ने प्रेस को सूचित किया कि नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध चुनाव जीत गए हैं. 25 जुलाई 1977 को प्रात: काल 10 बजे केन्द्रीय हॉल में शपथ ग्रहण समारोह सम्पन्न हुआ.
  • वर्ष 1934 में अंग्रेज़ी भाषा के प्रसिद्ध भारतीय लेखक रस्किन बॉण्ड का जन्म कसौली (हिमाचल प्रदेश) में हुआ था. उनके पिता रॉयल एयर फोर्स में थे. जब रस्किन की उम्र 04 साल की थी तो, उनके पिता की मृत्यु हो गई थी जिसके बाद ‘वो’ दादी के साथ रहते थे. रस्किन बॉण्ड ने अपनी पढ़ाई शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से पूरी की. इसके बाद वे लंदन चले गये. बचपन से ही लिखने का शौक होने की वजह से वे कॉलेज तक आते-आते एक मंझे हुए लेखक बन गए और कई पुरस्कार भी जीते थे.उन्होंने 17 साल की उम्र में पहला उपन्यास रूम ऑन द रूफ लिखा था.जिसके लिए उन्हें उन्हें वर्ष 1957 में जॉन लिवेलिन् राइस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. वर्ष 1999 में बाल साहित्य में योगदान के लिये वे पद्म श्री से और वर्ष 2014 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था.
  • वर्ष 1938 कवि, रंगमंच कर्मी, कहानी लेखक, नाटककार, फ़िल्म निर्देशक और फ़िल्म अभिनेता गिरीश कर्नाड का जन्म माथेरान( महाराष्ट्र) के कोंकणी भाषी परिवार में हुआ था. बचपन से उनकी रुचि नाटकों की तरफ थी। महाराष्ट्र में जन्में गिरीश ने स्कूल के समय से ही थियेटर से जुड़कर काम करना शुरू कर दिया था. वर्ष 1958 में धारवाड़ स्थित कर्नाटक विश्वविद्यालय से स्नातक उपाधि ली. इसके पश्चात वे एक रोड्स स्कॉलर के रूप में इंग्लैंड चले गए जहां उन्होंने ऑक्सफोर्ड के लिंकॉन तथा मॅगडेलन महाविद्यालयों से दर्शनशास्त्र, राजनीतिशास्त्र तथा अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की. कन्नड़ भाषा में लिखे उनके नाटकों का अंग्रेजी समेत कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है. कार्नाड ने ऐतिहासिक तथा पौराणिक पात्रों से तत्कालीन व्यवस्था को दर्शाने का तरीका अपनाया तथा काफी लोकप्रिय हुए.उनके नाटक ययाति (1961, प्रथम नाटक) तथा तुग़लक़ (1964) ऐसे ही नाटकों का प्रतिनिधित्व करते हैं. तुगलक से कार्नाड को बहुत प्रसिद्धि मिली और इसका कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ है. वर्ष 1972 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला उसके बाद वर्ष 1974 में पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया. वर्ष 1992 में पद्मभूषण तथा कन्नड़ साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
  • वर्ष 1974 में भारतीय फ़िल्म अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी का जन्म मुज़फ्फरनगर(उत्तर प्रदेश) डिस्ट्रिक्ट के एक छोटे से गाँव बुढ़ाना के ज़मींदार किसान परिवार में हुआ था. नवाज़ुद्दीन अपना करियर बनाते वक्त उन्होंने परिवार से कोई आर्थिक मदद नहीं ली और बहुत बुरे दिन देखे जिसके कारण वो काफी स्ट्रोंग हो गए.उन्होने गुरुकुल कंगरी विश्वविद्यालया से अपनी केमिस्ट्री में बीएससी की पढाई पूरी की.इसके बाद वो वडोदरा (गुजरात) में एक कम्पनी में बतौर केमिस्ट काम करने लगे. उन्होने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला ले लिया और वर्ष 1996 में वहां से ग्रेजुएट होकर निकले. वर्ष 1999 में शूल फिल्म में वेटर और सरफरोश में मुखबिर का रोल करने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी ऐसे सितारे बन चुके हैं जिनका कान फिल्म फेस्टिवल में एक साथ तीन-तीन फिल्में जलवा बिखेरती है.नवाजुद्दीन को वर्ष 2012 की तलाश, गैंग्स ऑफ वासेपुर-1, 2 और कहानी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया.
  • वर्ष 1979 में हिन्दी के साहित्यकार हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का निधन हुआ था.
  • वर्ष 1999 में फिजी के प्रधानमंत्री भारतीय मूल के महेन्द्र चौधरी बने.
  • वर्ष 2008 में भारतीय नाटककार और रंगमंचकर्मी विजय तेंदुलकर का निधन हुआ था.
  • वर्ष 2008 में भारत व चीन के बीच नाथुला दर्रे से व्यापार पुनः शुरू हुआ.
  • वर्ष 2008 में विश्व श्रम संगठन के कार्यकारी अक्ष्यक्ष असाने ने नई दिल्ली में सामाजिक सुरक्षा पर सम्मेलन का उदघाटन किया.
  • वर्ष 2008 में बैंक आफ़ बड़ौंदा ने वर्ष 2007-08 में अपने शुद्ध लाभ में 9% की वृद्धि दर्ज की थी.
  • वर्ष 2008 में कैलाश मानसरोवर के लिए चीन ने भारतीय यात्रियों का दौरा स्थगित किया.
  • वर्ष 2010 में बिहार के मुजफ्फरपुर-रक्सौल रेलखंड पर मोतीहारी ज़िला के जीवधारा और पीपरा रेलवे स्टेशन के बीच बंगारी हॉल्ट के समीप नक्सलियों ने रेल पटरी उड़ा दी, जिससे एक टैंकर मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई तथा इसकी 13 बोगियों में आग लग गई.
  • वर्ष 2010 में भारत सरकार को 34 दिनों से चले आ रहे 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से 95 करोड़ रुपए का शुल्क मिलना तय हो गया.
  • वर्ष 2011 में 58वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों की घोषणा हुई. फ़िल्म ‘मोनेर मानुस’ को राष्ट्रीय एकता के लिए पुरस्कृत किया गया है. इसके अलावा फिल्मक ‘दबंग’ को सर्वाधिक मनोरंजक फ़िल्म का पुरस्कार दिया गया. मलयालम फ़िल्म ‘एदेमाइन्ते माकान अबू’ को सर्वश्रेठ फ़िल्म चुना गया. जबकि अरुणिमा शर्मा को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार दिया गया है. मलयालम फ़िल्म ‘एदेमाइन्ते माकान अबू’ के लिए मलयालम अभिनेता सलीम कुमार और तमिल अभिनेता धनुष संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुने गए. मिताली जगताप और सरन्ना पी को संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया.