ताना-बाना- 01…

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कापरेकर ने गणित में उच्च शिक्षा न प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने नंबर थ्योरी पर काम किया. कमाल अमरोही उर्दू और हिंदी कवि के साथ-साथ भारतीय फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक भी थे.फोटो:-गूगल

भारतीय इतिहास के स्वर्ण पन्नों में आज की तारीख कई मायनो  में अद्वितीय है. प्रसिद्ध निबन्धकार, व्यंग्यकार और साहित्यकार बाबू गुलाबराय,  गणितज्ञ डी. आर. कापरेकर, भारतीय सिनेमा के निर्माता-निर्देशक तथा अभिनेता एल. वी. प्रसाद, अभिनेता तथा राजनेता एम जी रामचंन्द्रन, फ़िल्म निर्माता-निर्देशक कमाल अमरोही,हिन्दी साहित्यकार रांगेय राघव,प्रथम सम्पादक अरविंद कुमार, लेखक महावीर सरन जैन एवं गीतकार एवं पटकथा लेखक जावेद अख़्तरका जन्म हुआ.

बाबू गुलाबराय:-

बाबू गुलाबराय का जन्म 17  जनवरी 1888 को  इटावा, उत्तर प्रदेश में हुआ था. इनके माता-पिता धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे इनके पिता का नाम भवानी प्रसाद था.गुलाबराय की प्रारम्भिक शिक्षा मैनपुरी में हुई. इन्होंने आगरा कॉलेज से बी.ए. की परीक्षा पास की.दर्शन शास्त्र में एम.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात गुलाबराय जी छतरपुर चले गए और वहाँ के महाराज के निजी सचिव हो गए.इसके बाद वे वहाँ दीवान और चीफ़ जज भी रहे.छतरपुर महाराजा के निधन के पश्चात गुलाबराय ने अवकाश ग्रहण किया और आगरा आकर रहने लगे और सेंट जॉन्स में हिंदी विभागाध्यक्ष के पद पर कार्य किया.अपने जीवन के अंतिम काल तक साहित्य-साधना में लीन रहे.

डी0 आर0 कापरेकर:-

डी0 आर0 कापरेकर का जन्म 17 जनवरी, 1905 को डहाणू, महाराष्ट्र में हुआ था. इनका पूरा नाम दत्तात्रय रामचन्द्र कापरेकर है. इनकी प्रारम्भिक शिक्षा थाने और पुने में, तथा स्नातक की शिक्षा मुंबई विश्वविद्यालय से हुई थी.कापरेकर ने गणित या किसी अन्य विषय में स्नातकोत्तर डिग्री की पढ़ाई नहीं की थी.

कापरेकर ने गणित में उच्च शिक्षा न प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने नंबर थ्योरी पर काम किया. इन्होंने संख्या सिद्धान्त के क्षेत्र में अनेक योगदान दिया, जिनमें से कापरेकर संख्या तथा कापरेकर स्थिरांक प्रमुख हैं..कुछ स्थिरांक (constant) और बहुत सी संख्यायें (numbers) उनके नाम से जाने जाते हैं.

कापरेकर स्थिरांक –

गणित में एक संख्या 6174 है जिसे कापरेकर स्थिरांक कहते हैं-

  • कोई भी चार अंक की संख्या लीजिये जिसके दो अंक भिन्न हों.
  • संख्या के अंको को आरोही और अवरोही क्रम में लिखें.
  • इससे आपको दो संख्यायें मिलेंगी. अब बड़ी संख्या को छोटी से घटायें.
  • जो संख्या मिले इस पर पुनः 2 नंबर वाली प्रक्रिया दोहराएँ. इस प्रक्रिया को कापरेकर व्यवहार कहते हैं.
  • कुछ निश्चित चरणों के बाद आपको 6174 संख्या मिलेगी. इसके साथ प्रक्रिया क्रमांक 2 को अपनाने पर भी फिर यही संख्या मिलती है इसीलिये इसे कापरेकर स्थिरांक कहा जाता हैं.

एल0 वी0 प्रसाद :-

एल0 वी0 प्रसाद का जन्म 17 जनवरी, 1908 को आन्ध्र प्रदेश के इलुरु तालुका में एक किसान परिवार में हुआ था. इनका पुर नाम अक्कीनेनी लक्ष्मी वारा प्रसाद राव थ. इनके पिता क नाम अक्कीनेनी श्रीरामुलु और माता का नाम बासवम्मा था.

एल0 वी0 प्रसाद प्रारम्भ से ही बहुत बुद्धिमान थे, किंतु उनका पढ़ाई में ध्यान बिल्कुल भी नहीं लगता था.कम उम्र में ही वे नाटकों और नृत्य मंडलियों की ओर आकर्षित हो गए थे। इन्हीं सपनों को लेकर वे एक दिन घर छोड़कर मुंबई चले आये. इन्होंने  भारत की तीन भाषाओं की पहली बोलती फ़िल्मों में काम किया.

बताते चलें कि, ‘आलम आरा’ हिन्दी की पहली बोलती फ़िल्म थी वहीं ‘कालिदास’ पहली तमिल भाषा की बोलती फ़िल्म थी और ‘भक्त प्रह्लाद’ पहली तेलुगु बोलती फ़िल्म थी. एल0 वी0 प्रसाद  ने हिन्दी भाषा में कई चर्चित फ़िल्में बनाईं.इन फ़िल्मों में ‘शारदा’, ‘छोटी बहन’, ‘बेटी बेटे’, ‘दादी माँ’, ‘शादी के बाद’, ‘हमराही’, ‘मिलन’, ‘राजा और रंक’, ‘खिलौना’, ‘एक दूजे के लिए’ आदि शामिल हैं.

एल0 वी0 प्रसाद को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले. फ़िल्मों में विशेष योगदान के लिए देश का सर्वोच्च सम्मान “दादा साहब फाल्के पुरस्कार” वर्ष 1982 में प्रदान किया गया था.

एम जी रामचंन्द्रन:-

एम0 जी0 रामचंन्द्रन का जन्म 17 जनवरी, 1917 को कैंडी, श्रीलंका में हुआ था. इनके पिता क नाम एम0 गोपाल मेनन और माता का नाम मरुदुर सत्यभामा था. एम0 जी0 रामचंन्द्रन का  पूरा नाम मारुदुर गोपालन रामचन्द्रन है. वे तमिल फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता, फ़िल्म निर्माता-निर्देशक थे जो बाद में राजनीति में आये और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने.

कमाल अमरोही:-

कमाल अमरोही का जन्म 17 जनवरी 1918 को  ब्रिटिश भारत में संयुक्त प्रांत अमरोहा में हुआ था. अमरोही पाकिस्तानी लेखक जौन एलिया और रायस अमरोवी के चचेरे भाई थे.

कमाल अमरोही उर्दू और हिंदी कवि थे. साथ ही भारतीय फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक भी  थे. उनकी हिंदी फिल्मों में महल (1949), पकीजाह (1972) और रजिया सुल्तान (1983) शामिल हैं. इन्होंने  वर्ष 1958 में बॉम्बे में कमलिस्तान स्टूडियो की स्थापना की थी.

कमाल अमरोही को वर्ष 1961 में फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ संवाद पुरस्कार फिल्म मुग़ल-ए आज़म के लिये मिला था.

रांगेय राघव:-

रांगेय राघव का जन्म 17 जनवरी, 1923 ई. में आगरा में हुआ था. इनके पिता  का नाम रंगाचार्य था. रांगेय की शिक्षा आगरा में हुई थी.इन्होने ‘सेंट जॉन्स कॉलेज’ से 1944 में स्नातकोत्तर और 1949 में ‘आगरा विश्वविद्यालय’ से गुरु गोरखनाथ पर शोध करके उन्होंने पी.एच.डी. की थी.राघव को हिन्दी, अंग्रेज़ी, ब्रज और संस्कृत पर असाधारण अधिकार था.

राघव 13 वर्ष की आयु में लिखना शुरू किया। इन्होने अल्पायु में ही एक साथ उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार, आलोचक, नाटककार, कवि, इतिहासवेत्ता तथा रिपोर्ताज लेखक के रूप में स्वंय को स्थापित कर दिया, साथ ही अपने रचनात्मक कौशल से हिंदी की महान सृजनशीलता के दर्शन भी करा दिए. इनकी अलौकिक प्रतिभा के कारण हिन्दी के ‘शेक्सपीयर’ की संज्ञा भी दी गई.

महावीर सरन जैन:-

महावीर सरन जैन का जन्म 17 जनवरी, 1941 को बुलन्दशहर, उत्तर प्रदेश में हुआ था.

जैन ने भारत सरकार के केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के निदेशक, रोमानिया के बुकारेस्त विश्वविद्यालय के हिन्दी के विजिटिंग प्रोफेसर तथा जबलपुर के विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी एवं भाषा विज्ञान विभाग के लैक्चरर, रीडर तथा प्रोफेसर एवम् अध्यक्ष के रूप में सन् 1964 से 2001 तक हिन्दी के अध्ययन, अध्यापन एवं अनुसंधान तथा हिन्दी के प्रचार-प्रसार-विकास के क्षेत्रों में भारत एवं विश्व स्तर पर कार्य किया है.

प्रोफेसर जैन ने भारत के अनेक विश्वविद्यालयों की विद्वत-परिषद, कला संकाय तथा चयन समिति के सदस्य के रूप में भी कार्य किया. इन्हे कई पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया.प्रोफेसर जैन को भारतीय राजदूतावास, बुकारेस्त (रोमानिया) द्वारा बुकारेस्त विश्वविद्यालय में हिन्दी शिक्षण में योगदान के लिए ‘स्वर्ण-पदक’ से अलंकृत किया गया.

अरविंद कुमार:-

अरविंद कुमार का जन्म 17 जनवरी 1930 को  उत्तर प्रदेश के मेरठ नगर में हुआ था. इनकी प्रारम्भिक शिक्षा मेरठ के नगरपालिका विद्यालय में हुई थी. इन्होने  अंग्रेज़ी साहित्य में एमए किया.

पत्रकारिता में उनका प्रवेश दिल्ली प्रेस समूह की पत्रिका सरिता से हुआ.माधुरी और सर्वोत्तम (रीडर्स डाईजेस्ट का हिन्दी संस्करण) के प्रथम संपादक भी थे.कई वर्ष इसी समूह की अंग्रेज़ी पत्रिका कैरेवान के सहायक संपादक भी रहे.अरविंद कुमार की कला, नाटक और फिल्म समीक्षाओं के अतिरिक्त उनकी अनेक फुटकर कवितायें, लेख व कहानियां प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं. इन्होने केन्द्रीय हिंदी संस्थान, आगरा, की हिंदी लोक शब्दकोश परियोजना के अवैतनिक प्रधान संपादक के रूप में काम भी किया.

जावेद अख़्तर:-

जावेद अख़्तर का जन्म 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में हुआ था. इनके पिता का नाम जाँ निसार अख़्तर था जो प्रगतिशील कवि थे और उनके माता का नाम सफिया अखतर था जो  मशहूर उर्दु लेखिका तथा शिक्षिका भी थीं। अपने दौर के प्रसिद्ध शायर मुज़्तर ख़ैराबादी जावेद के दादा थे.इतना सब होने के बावजूद जावेद का बचपन विस्थापितों सा बीता.

छोटी उम्र में ही माँ का आंचल सर से उठ गया  जिसके बाद जावेद को नाना नानी के घर,बाद में उन्हें अलीगढ  खाला के पास भेज दिया गया. जहाँ से उनकी स्कूली शिक्षा की शुरुआत हुई. जावेदकवि और हिन्दी फिल्मों के गीतकार और पटकथा लेखक हैं. उन्होंने  सीता और गीता, ज़ंजीर, दीवार और शोले की कहानी, पटकथा और संवाद लिखें हैं. इसके बाद उन्होंने गीत लिखना जारी किया जिसमें तेज़ाब, 1942: अ लव स्टोरी, बॉर्डर और लगान शामिल हैं.

जावेद को कई फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार, राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार और पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.