टाइफाइड…

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टाइफाइड का बुखार अधिकांशत दूषित पानी (Polluted Water) पीने से होता है. फोटो:-गूगल.

टाइफाइड का बुखार पाचन तंत्र और बल्डस्ट्रीम (Blood Stream) में बैक्टीरिया के इंफेक्शन के कारण होता है. सलोमोनेला टाइफी (Salomonela Typhi) नाम का यह बैक्टीरिया (Bacteria) पानी, किसी पेय या खाने के साथ हमारे शरीर के अंदर प्रवेश करता है और पाचन तंत्र में जाकर यह बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं. यह बैक्टीरिया शरीर के भीतर एक जगह से दूसरी जगह जैसे, लिवर, स्पलीन, गॉलब्लेडर आदि जगहों पर घूमते रहते हैं.

टाइफाइड का बुखार अधिकांशत दूषित पानी (Polluted Water) पीने से होता है. टाइफाइड के लक्षणों में सिर में दर्द, पेट में दर्द और बुखार का होना है, लेकिन टाइफाइड के बिगड़ने पर उल्टी (Vomiting), डायरिया (Diarrhea), मल में खून आना, लिवर का बढ़ना (Enlargement Of Liver) आदि भी हो सकते हैं. टाइफाइड में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए तथा इसके दवाई का कोर्स पूरा किया जाना भी जरूरी होता है क्योंकि इसके दोबारा होने के चांसेस भी रहते है. टाइफाइड से निजात के लिए यहां हम आपको कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में बताएंगे जिन्हें अपनाकर आप टाइफाइड से राहत पा सकते हैं.

ठंडा पानी:-

किसी कपड़े को ठंडे पानी में भिगोकर शरीर को पोंछे. इसके अलावा ठंडे पानी की पट्टियां सिर पर रखने से भी लाभ होता है और शरीर का तापमान भी कम होता है. कपड़े को समय समय पर बदलते रहना चाहिए. सामान्य बुखार के लिए यह बेहद अच्छी प्रक्रिया है जो तापमान को बढ़ने नहीं देती है.

नोट:- इसके लिए बर्फ या बर्फ के पानी की इस्तेमाल न करके, ताजे पानी का इस्तेमाल करना चाहिए.

सेब का सिरका:-

सेब का सिरका भी बुखार के लिए बेहद सस्ती और प्रभावी दवा होती है. इससे बुखार तेजी से दूर होता है, क्योंकि इसमें मौजूद एसिड गर्माहट को शरीर की त्वचा से बाहर कर देता है साथ ही इसमें मौजूद मिनरल शरीर को बुखार से दूर भी रखने में मदद करता हैं.

विधि:-

किसी कपड़े को एक भाग सिरका और दो भाग पानी लेकर उसमें भिगोएं, अतिरिक्त पानी को निचोड़ दें और इस पट्टी को माथे और पेट पर रखें. एक पट्टी पैर के तलवों पर भी रखी जा सकती है. जैसे ही कपड़ा गरम हो जाए, दोबारा घोल में डुबाएं और प्रक्रिया को दोहराएं.

लहसुन:-

लहसुन की गर्म तासीर भी शरीर में पसीना लाकर, शरीर का तापमान कम कर सकती है. यह शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को भी बाहर निकालने में सहायक होता है. इतना ही नहीं लहसुन एंटीफंगल (Antifungal) और एंटीबैक्टीरियल (Antibacterial) गुणों से भरा होता है जो शरीर को इम्यूनिटी प्रदान करता है.

लहसुन की एक कली को पीसकर गरम पानी में मिलाएं। 10 मिनट ढक कर रखें. अब पानी को छान लें और घूंट घूंट करके धीरे धीरे पीएं. एक दिन में इस पेय को दो बार पीएं, अगले ही दिन आप बुखार से राहत महसूस करेंगे.

दो चम्मच ऑलिव ऑयल में दो कली लहसुन की डालकर भूनें. इस तेल को ठंडा करके पैर के तलवों में लगाएं.

तुलसी:-

तुलसी भी टाइफाइड के बुखार के लिए उत्तम औषधि है. इसके एंटीबैक्टीरियल और एंटीबायोटिक गुण बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते है, जिससे बुखार जल्दी भी ठीक होता है.

पुदीने की बीस पत्तियों में एक छोटी चम्मच अदरक को कद्दूकस करके एक कप पानी में उबाल लें. इस पानी को गुनगुना होने पर इसे छानकर इसमें शहद मिलाकर पीएं. इस पेय को दिन दो से तीन बार ले सकते हैं.

खानपान:-

टाइफाइड बुखार की शुरुआत में साबूदाना, अरारोट, पानी मिला दूध, छेने का पानी (फटे दूध का पानी), होल ग्रेन डबल रोटी, बार्ली, पानी, और बिस्कुट कम मात्रा में सेवन करें. एक लीटर पानी में 3-4 लौंग डालकर उबाल लें, फिर इसे छानकर ठंडा कर लें.  इस पानी को एक कप की मात्रा में एक चम्मच शहद में मिलाकर बार-बार पिएं. ध्यान दें, टाइफाइड में पानी उबाल कर ही पिये और जितना ज्यादा हो सके पानी पीना चाहिए. फलों में केला, चीकू, पपीता, सेब, मौसमी, संतरे का सेवन करें. बुखार उतर जाने के बाद टाइफाइड से आई कमजोरी को दूर करने के लिए किशमिश, मुनक्का, मूंग की पतली दाल, पतला दलिया, मक्खन, उबला हुआ दूध, दही आदि प्रयोग करें. टाइफाइड में दाल, खिचड़ी, हरी सब्जियां पालक, पत्तागोभी, फूलगोभी, गाजर और पपीता खाएं. आसानी से पचने वाले हल्के फल सब्जियां ले जैसे -पके हुए फल, आलू ,दही खाने से बहुत लाभ मिलता है इससे भूख और जलन भी शांत होती है लेकिन मरीज को खांसी, जुकाम या जोड़ो में दर्द हो तो, दही का सेवन बिलकुल ना करें. यदि दस्त की तकलीफ न हो, तो एक कप दूध में अथवा इतने ही पानी में एक चम्मच ग्लूकोज मिलाकर बार-बार सेवन करें. दूध के सेवन से दवाइयों की गर्मी कम होती है और शरीर को उर्जा भी मिलती है. कम मात्रा में चाय, कॉफी पिएं. टाइफाइड में खान-पान के अनुसार पका हुआ भोजन ही करें, अगर फल खाने की इच्छा हो तो, अच्छी तरह धोकर ही खाएं फलों को काट कर किसी प्लेट में लंबे समय तक ना रखें.

तुलसी, काली मिर्च और केसर:- चार तुलसी की पत्ती को पीस लें, सात काली मिर्च के दाने और सात रेशे (लड़ी) केसर के लें और इन सबका पेस्ट बना लें. इस पेस्ट की गोलियां बनाकर दिन में तीन-चार बार लें. टाइफाइड में मट्ठा, धनिया और केला का प्रयोग करें. प्रतिदिन (छाछ) मट्ठा का सेवन करें. अच्छे नतीजे के लिए इसमें ताजा धनिया का रस भी मिला लें और प्रतिदिन  दो बार पीएं. पके केले को मसलकर मट्ठा में मिला लें और इस मिश्रण को बनाकर रोजाना सेवन करें. टाइफाइड में केला खाना बहुत लाभकारी होता है क्योकि यह टाइफाइड में होने वाली कमजोरी को दूर करता है, चुकिं इसकी तासीर भी ठंडी होती है जो दवा से पैदा होने वाली गर्मी को कम करता हैं. टाइफाइड में संतरा, गन्ने का जूस, अनार, चुकंदर का जूस , नारियल पानी और सेब के जूस का सेवन भी बेहतर होता है साथ ही सब्जियों का भी सूप लेना बेहतर होता है. सूप में कोई भी मसाला या अन्य चीज न मिलाएं. सूप अच्छी तरह से उबला होना चाहिए और सेवन से पहले इसे छानना जरूर चाहिए. टाइफाइड में पालक का सूप भुत ही फायदेमंद होता है. टाइफाइड का बुखार बहुत ज्यादा कमजोरी लाता है, इसलिए टायफाइड में भोजन की बहुत अहमियत होती है इसलिए कम मात्रा में बार-बार खाना चाहिए और पूरा आराम करना चाहिए.

पानी और शहद:- एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद डालकर दिन में कई बार सेवन करें. यह पाचन-तंत्र को काफी राहत देता है. क्योंकि टाइफाइड में बहुधा मरीज को पेट से जुडी समस्याए भी होती है जैसे बदहजमी, दस्त, गैस.

आदिलौंग के दाने:- लौंग के 5 दाने लेकर दो लीटर पानी में डालें, इसे तब तक उबालें, जब तक एक लीटर पानी न रह जाए. फिर आंच से उतारकर कुछ देर ऐसे ही रख दें. इसके बाद इसे छान लें और इस मिश्रण को थोड़ा-थोड़ा करके पूरे दिन पीएं. टाइफाइड में बुखार रहने तक तरल पदार्थों और फलों के जूस पर ही निर्भर रहें तो ज्यादा बेहतर होता है. जब बुखार से कुछ राहत मिले तो अच्छी तरह से पकी खिचड़ी, दही, चावल आदि ठोस आहार की शुरुआत करें.

परहेज:-

टाइफाइड में गरिष्ठ, भारी, पेट में गैस पैदा करने वाली चीजो से परहेज रखें. टाइफाइड में शराब, चाय, कॉफी और अन्य कैफीनयुक्त पेय, रिफाइंड और प्रोसेस फूड जैसे मैदा से बने उत्पाद, केक, सफेद ब्रेड, पेस्ट्री आदि भी नहीं खानी चाहिए. घी, तेल और बेसन,मक्का, शक्करकंद, कटहल, भूरे चावल आदि का परहेज रखें. लाल मिर्च, मिर्च का सॉस, सिरका, गर्म मसाला, खटाई आदि नहीं खाना चाहिए. गंदे पानी वाली मछलियों और अंडो को नहीं खाना चाहिए. जंक फूड व बाजारों के खानपान का भी परहेज करें. टाइफाइड में परहेज के अनुसार पूरी, परांठे, पिज़्ज़ा, बर्गर, नूडल्स, मैगी और चटपटे व्यंजन बिलकुल ना खाए. मीट, सॉस, अचार और मसालेदार पदार्थ भी नहीं खाना चाहिए. टाइफाइड में बुखार के साथ डायरिया (दस्त) भी होने पर दूध, पनीर और डेयरी उत्पादों को रोगी के डाइट चार्ट से बिलकुल निकाल देना चाहिए.  टाइफाइड में जब ठोस आहार लें तो उसके साथ पानी नहीं पीना चाहिए. खुले पड़े हुए दूषित खाद्य पदार्थ या पानी से भी परहेज रखें.  जब आपको टाइफाइड हो जाता हो तो आप रोगमुक्त होने तक चपाती नहीं खाना चाहिए व इससे परहेज रखना चाहिए.

ध्यान दें:-

चिकित्सा पदाधिकारी के अनुसार टाइफाइड में मुनक्का भी बहुत लाभकारी होता है इसको प्रयोग करने की विधि इस प्रकार है 8-10 मुनक्के लेकर इन्हें बीच में से चीरकर इनका बीज निकाल लें फिर इसमें हल्का सा काला नमक लगाकर थोडा सा सेंक कर खाएं.  टाइफाइड में कब्ज की शिकायत होने पर गुनगुने पानी में इसबगोल के दाने डालकर पी जाएं. टाइफाइड में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए, बाथरूम जाने के बाद और कुछ भी खाने से पहले हाथों को खूब अच्छी तरह साबुन से धोएं. मलेरिया के लक्षण, कारण, बचाव व उपचारटॉयलेट, पानी की टोंटियां, टेलीफोन रिसीवर और दरवाजों के हैंडलों को रोज अच्छे से साफ करें. बीमारी की स्थिति में भोजन को हाथ न लगाए. इससे बीमारी और भी फैल सकती है. अपना तौलिया, कपड़े और खाने-पीने के बर्तन अलग रखें तथा इन्हें रोजाना साबुन और गर्म पानी से धोएं. टाइफाइड में आपको क्या खाना चाहिए ये ज्यादा महत्त्वपूर्ण है, इसलिए आप इस डाइट प्लान के दिशा निर्देशानुसार ही अपने आहार की योजना बनाएं.

डा० विनोद कुमार उपाध्याय (चिकित्सा पदाधिकारी),

दयानंद आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल,सीवान,(बिहार)

ध्रुव आयुर्वेद केंद्र,चित्रगुप्त नगर, (पटना).